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आईएएस ऑफिसर बनना चाहती थी बिरजू महाराज की नातिन.. यह बनी
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कथक की प्रस्तुति देतीं शिंजिनी कुलकर्णी।
- फोटो : CHANDIGARH
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चंडीगढ़। कला के साथ मुझे पढ़ाई से भी गहरा लगाव रहा है। आईएएस ऑफिसर बनना चाहती थी लेकिन बिरजू महाराज की नातिन होने के चलते परिवार को मुझसे काफी उम्मीदें थीं। इसलिए परंपरा से जुड़े रहने के लिए मैंने कथक को ही चुना। लखनऊ घराने की कथक नृत्यांगना शिंजिनी कुलकर्णी ने अपने दिल की बात कही। शिंजिनी रविवार को प्राचीन कला केंद्र सेक्टर 35 में आयोजित युवा कथक उत्सव में प्रस्तुति देने पहुंची थीं।
शिंजिनी ने कार्यक्रम की शुरुआत भगवान राम के खूबसूरत भजन श्री राम चरणष से की। इसके बाद लखनऊ घराने के शुद्ध कथक को प्रस्तुत किया, जिसमें कुछ खास रचनाओं एवं बंदिशों का उत्कृष्ट प्रदर्शन करके वाहवाही लूटी। कार्यक्रम के अंतिम भाग में शिंजिनी ने चौदह वर्ष के वनवास के बाद उर्मिला और लक्ष्मण के अनसुने अनकहे खूबसूरत एवं भावपूर्ण पलों को अपने प्रभावपूर्ण नृत्य से पेश किया। सभागार में मौजूद दर्शक उनके नृत्य और अभिनय के कायल हो गए। अपनी भाव भंगिमाओं से कुलकर्णी ने हर कहानी को जीवंत कर दिया। दर्शकों ने तालियां बजाकर उनका उत्साह बढ़ाया।
पंडित बिरजू महाराज की नातिन हैं कुलकर्णी
शिंजिनी कुलकर्णी ने बताया कि मैं पद्म विभूषण पंडित बिरजू महाराज की नातिन हूं। यही वजह है कि संगीत से मेरा गहरा लगाव है। महाराज के घराने में पैदा होने वाले सभी सदस्यों को गाना, नाचना, बजाना जरूरी होता है। मेरी शुरुआती शिक्षा भी नानाजी से ही हुई। इसके बाद मामा जयकृष्ण से शिक्षा ली, जो आज भी जारी है। शिंजिनी ने बताया कि मैं एक बंगाली फिल्म कर रही हूं, वहीं भोजपुरी फिल्म में बतौर अभिनेत्री काम कर चुकी हूं। कथक नृत्यांगना के नाते देश विदेश में कई संगीत कार्यक्रमों में प्रस्तुति दे चुकी हूं।
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आईएएस बनने का सपना था, मगर छोड़ दिया
शिंजिनी कुलकर्णी ने बताया कि मैं पढ़ाई में भी टॉपर रही हूं। एमए हिस्ट्री में की है और सेंट स्टीफंस कॉलेज से पासआउट हूं। आईएएस बनना चाहती थी। इसके लिए कोचिंग भी शुरू कर दी थी। लेकिन तभी कई फिल्मों के ऑफर आए। परिवार की भी इच्छा थी कि परंपरा को आगे बढ़ाऊं। यही वजह रही कि मैंने कला के क्षेत्र में ही अपनी पहचान बनाने की राह चुनी। आज अपनी यात्रा से मैं संतुष्ट हूं।
कथक और कलाकारों को बढ़ावा मिलेगा
शिंजिनी कुलकर्णी ने बताया कि लोग हर महीने 200 रुपये की टिकट खरीदकर मॉल में फिल्म देखने जाते हैं। यही लोग महीने में एक बार यदि टिकट खरीदकर शास्त्रीय नृत्य देखने जाएं तो कथक और कलाकारों कोई पहचान मिलेगी व उनका हौसला बढ़ेगा।
यहां दे चुकी हैं प्रस्तुति
खजुराहो नृत्य उत्सव - खजुराहो
संकटमोचन उत्सव- बनारस
ताज फेस्टिवल - आगरा
कथक सम्राट - दिल्ली
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शिंजिनी ने कार्यक्रम की शुरुआत भगवान राम के खूबसूरत भजन श्री राम चरणष से की। इसके बाद लखनऊ घराने के शुद्ध कथक को प्रस्तुत किया, जिसमें कुछ खास रचनाओं एवं बंदिशों का उत्कृष्ट प्रदर्शन करके वाहवाही लूटी। कार्यक्रम के अंतिम भाग में शिंजिनी ने चौदह वर्ष के वनवास के बाद उर्मिला और लक्ष्मण के अनसुने अनकहे खूबसूरत एवं भावपूर्ण पलों को अपने प्रभावपूर्ण नृत्य से पेश किया। सभागार में मौजूद दर्शक उनके नृत्य और अभिनय के कायल हो गए। अपनी भाव भंगिमाओं से कुलकर्णी ने हर कहानी को जीवंत कर दिया। दर्शकों ने तालियां बजाकर उनका उत्साह बढ़ाया।
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पंडित बिरजू महाराज की नातिन हैं कुलकर्णी
शिंजिनी कुलकर्णी ने बताया कि मैं पद्म विभूषण पंडित बिरजू महाराज की नातिन हूं। यही वजह है कि संगीत से मेरा गहरा लगाव है। महाराज के घराने में पैदा होने वाले सभी सदस्यों को गाना, नाचना, बजाना जरूरी होता है। मेरी शुरुआती शिक्षा भी नानाजी से ही हुई। इसके बाद मामा जयकृष्ण से शिक्षा ली, जो आज भी जारी है। शिंजिनी ने बताया कि मैं एक बंगाली फिल्म कर रही हूं, वहीं भोजपुरी फिल्म में बतौर अभिनेत्री काम कर चुकी हूं। कथक नृत्यांगना के नाते देश विदेश में कई संगीत कार्यक्रमों में प्रस्तुति दे चुकी हूं।
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आईएएस बनने का सपना था, मगर छोड़ दिया
शिंजिनी कुलकर्णी ने बताया कि मैं पढ़ाई में भी टॉपर रही हूं। एमए हिस्ट्री में की है और सेंट स्टीफंस कॉलेज से पासआउट हूं। आईएएस बनना चाहती थी। इसके लिए कोचिंग भी शुरू कर दी थी। लेकिन तभी कई फिल्मों के ऑफर आए। परिवार की भी इच्छा थी कि परंपरा को आगे बढ़ाऊं। यही वजह रही कि मैंने कला के क्षेत्र में ही अपनी पहचान बनाने की राह चुनी। आज अपनी यात्रा से मैं संतुष्ट हूं।
कथक और कलाकारों को बढ़ावा मिलेगा
शिंजिनी कुलकर्णी ने बताया कि लोग हर महीने 200 रुपये की टिकट खरीदकर मॉल में फिल्म देखने जाते हैं। यही लोग महीने में एक बार यदि टिकट खरीदकर शास्त्रीय नृत्य देखने जाएं तो कथक और कलाकारों कोई पहचान मिलेगी व उनका हौसला बढ़ेगा।
यहां दे चुकी हैं प्रस्तुति
खजुराहो नृत्य उत्सव - खजुराहो
संकटमोचन उत्सव- बनारस
ताज फेस्टिवल - आगरा
कथक सम्राट - दिल्ली