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आरटीपीसीआर जांच रिपोर्ट के इंतजार में बिगड़ रही मरीजों की सेहत
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चंडीगढ़। बेशक प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग ने कोरोना संक्रमण की बढ़ती रफ्तार पर काबू पाने के लिए स्क्रीनिंग की संख्या बढ़ा दी है, लेकिन इसका पूरी तरह लाभ मरीजों को नहीं मिल पा रहा है। आरटीपीसीआर जांच रिपोर्ट देरी से मिलने की वजह से मरीजों की सेहत बिगड़ रही है। आलम यह है कि प्रतिदिन दो से ढाई सौ मरीजों की जांच लंबित रह जा रही है। स्थिति ये है कि 24 घंटे में मिलनी वाली रिपोर्ट मरीजों को दो से तीन दिन बाद भी नहीं मिल पा रही है। ऐसे में मरीजों का इलाज प्रभावित हो रहा है। साथ ही शहर से बाहर जाने वाले लोगों की यात्राएं भी टल जा रही है। इसको लेकर विभाग का कहना है कि निजी लैब से 24 घंटे के अंदर रिपोर्ट प्राप्त हो जा रही है। ऐसे में पीजीआई और जीएमसीएच 32 से आने वाली रिपोर्ट में कुछ हद तक विलंब की गुंजाइश रहती है।
केस- 1
सेक्टर- 46 निवासी सुनीता देवी (बदला हुआ नाम) की पीजीआई में 28 मार्च को सर्जरी होनी है। उन्होंने 24 मार्च की शाम को कोरोना जांच के लिए जीएमएसएच-16 में जांच का नमूना दिया था, लेकिन चौथे दिन भी देर शाम तक उन्हें रिपोर्ट नहीं मिली। उनके परिजनों का कहना है कि बिना रिपोर्ट के पीजीआई में उनकी सर्जरी नहीं होगी। ऐसे में अगर समय पर सर्जरी न हुई तो उनकी स्थिति और बिगड़ जाएगी।
केस- 2
खुड्डा जस्सू निवासी रमेश कुमार (बदला हुआ नाम) को ऑफिस की बैठक में शामिल होने के लिए 27 मार्च को दिल्ली जाना था। उन्हें भी आरटीपीसीआर जांच करवाना अनिवार्य था। उन्होंने 24 मार्च को जीएमएसएच- 16 में जांच का नमूना दिया था, लेकिन 27 मार्च तक उन्हें जांच रिपोर्ट नहीं मिली। इस कारण उन्हें अपनी यात्रा स्थगित करनी पड़ी।
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प्रतिदिन 150 से 200 रिपोर्ट लंबित
स्वास्थ्य विभाग की तरफ से प्रतिदिन 1800 से 2000 आरटीपीसीआर जांच के नमूने लिए जा रहे हैं। उनमें से प्रतिदिन डेढ़ सौ से दो सौ लोगों की जांच रिपोर्ट लंबित रह जा रही है। स्वास्थ्य विभाग से मिली जानकारी के अनुसार जीएमसीएच- 32 में 200 और पीजीआई में 600 जांच नमूने भेजे जा रहे हैं। इसके अतिरिक्त बाकी नमूनों की जांच चिह्नित निजी लैब में की जा रही है। निजी लैब में भेजे जा रहे सभी नमूनों की रिपोर्ट समय के अंदर प्राप्त हो जा रही है। बता दें की जांच की संख्या बढ़ाने को लेकर पीजीआई और जीएमसीएच- 32 ने पहले ही हाथ खड़े कर दिए थे। इसके बाद प्रशासन ने जीएमसीएच- 32 को महज 200 और पीजीआई को 600 जांच करने का निर्देश दिया है, इसके बावजूद जांच रिपोर्ट में देरी परेशानी का कारण बन रही है।
स्वास्थ्य विभाग लगातार यही प्रयास कर रहा है कि स्क्रीनिंग की संख्या बढ़ाई जाए, ताकि संक्रमण की रफ्तार को नियंत्रित किया जा सके। आरटीपीसीआर जांच रिपोर्ट में देरी के कारणों की जांच कर उसे भी जल्द दुरुस्त करने का प्रयास किया जा रहा है।
-डॉ. अमनदीप कंग, निदेशक स्वास्थ्य
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केस- 1
सेक्टर- 46 निवासी सुनीता देवी (बदला हुआ नाम) की पीजीआई में 28 मार्च को सर्जरी होनी है। उन्होंने 24 मार्च की शाम को कोरोना जांच के लिए जीएमएसएच-16 में जांच का नमूना दिया था, लेकिन चौथे दिन भी देर शाम तक उन्हें रिपोर्ट नहीं मिली। उनके परिजनों का कहना है कि बिना रिपोर्ट के पीजीआई में उनकी सर्जरी नहीं होगी। ऐसे में अगर समय पर सर्जरी न हुई तो उनकी स्थिति और बिगड़ जाएगी।
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केस- 2
खुड्डा जस्सू निवासी रमेश कुमार (बदला हुआ नाम) को ऑफिस की बैठक में शामिल होने के लिए 27 मार्च को दिल्ली जाना था। उन्हें भी आरटीपीसीआर जांच करवाना अनिवार्य था। उन्होंने 24 मार्च को जीएमएसएच- 16 में जांच का नमूना दिया था, लेकिन 27 मार्च तक उन्हें जांच रिपोर्ट नहीं मिली। इस कारण उन्हें अपनी यात्रा स्थगित करनी पड़ी।
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प्रतिदिन 150 से 200 रिपोर्ट लंबित
स्वास्थ्य विभाग की तरफ से प्रतिदिन 1800 से 2000 आरटीपीसीआर जांच के नमूने लिए जा रहे हैं। उनमें से प्रतिदिन डेढ़ सौ से दो सौ लोगों की जांच रिपोर्ट लंबित रह जा रही है। स्वास्थ्य विभाग से मिली जानकारी के अनुसार जीएमसीएच- 32 में 200 और पीजीआई में 600 जांच नमूने भेजे जा रहे हैं। इसके अतिरिक्त बाकी नमूनों की जांच चिह्नित निजी लैब में की जा रही है। निजी लैब में भेजे जा रहे सभी नमूनों की रिपोर्ट समय के अंदर प्राप्त हो जा रही है। बता दें की जांच की संख्या बढ़ाने को लेकर पीजीआई और जीएमसीएच- 32 ने पहले ही हाथ खड़े कर दिए थे। इसके बाद प्रशासन ने जीएमसीएच- 32 को महज 200 और पीजीआई को 600 जांच करने का निर्देश दिया है, इसके बावजूद जांच रिपोर्ट में देरी परेशानी का कारण बन रही है।
स्वास्थ्य विभाग लगातार यही प्रयास कर रहा है कि स्क्रीनिंग की संख्या बढ़ाई जाए, ताकि संक्रमण की रफ्तार को नियंत्रित किया जा सके। आरटीपीसीआर जांच रिपोर्ट में देरी के कारणों की जांच कर उसे भी जल्द दुरुस्त करने का प्रयास किया जा रहा है।
-डॉ. अमनदीप कंग, निदेशक स्वास्थ्य