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Chandigarh News: स्मार्ट पार्किंग के लिए फिर बढ़ा इंतजार, पांचवीं बार टेंडर का समय बढ़ा आगे
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चंडीगढ़। सिटी ब्यूटीफुल में स्मार्ट पार्किंग व्यवस्था शुरू होने का इंतजार और बढ़ गया है। प्रशासन ने पांचवीं बार टेंडर प्रक्रिया की समय सीमा आगे बढ़ा दी है। 4 मार्च को टेंडर खुलना था, लेकिन अब 4 जून तक टल चुका है। अधिकारियों का कहना है कि कुछ मामलों में सेक्रेटरी लोकल गवर्नमेंट की मंजूरी और जीएसटी से जुड़े एक मुद्दे पर स्पष्टीकरण की जरूरत है, जिसके चलते देरी हो रही है।
स्मार्ट पार्किंग का टेंडर सितंबर 2024 में ही खुलना था। निगम ने पीपीपी मॉडल पर स्मार्ट पार्किंग के डिजाइन, विकास, कार्यान्वयन, संचालन और रखरखाव को कंपनी के चयन के लिए रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल (आरएफपी) जारी किया है। प्रस्ताव के अनुसार शहर की 89 पेड पार्किंग को स्मार्ट किया जाना है। निगम ने पहले 21 दिन के लिए टेंडर को आगे बढ़ाकर 4 अक्तूबर को टेंडर खोलने की बात कही। दूसरी बार एक महीने के लिए समय बढ़ाकर 5 नवंबर, फिर 5 दिसंबर, फिर तीन महीने आगे बढ़ाकर 4 मार्च और अब तीन महीने का एक्सटेंशन देकर 4 जून को टेंडर खोलने की बात कही है।
स्मार्ट पार्किंग की खासियत
नगर निगम के एक अधिकारी ने बताया कि मामला जीएसटी के क्लेरिफिकेशन को लेकर फंसा हुआ है। इसके अलावा कुछ मामलों में सेक्रेटरी लोकल गवर्नमेंट की मंजूरी भी लंबित हैं। स्मार्ट पार्किंग के अनुसार सभी पार्किंग आईसीसीसी से कनेक्टेड होंगे। अलग-अलग एंट्री-एग्जिट प्वाइंट होंगे। फास्टैग से पेमेंट की सुविधा और क्यूआर कोड से पेमेंट की सुविधा मिलेगी। पार्किंग की जगह की प्री बुकिंग भी लोग कर सकेंगे। ऑटोमेटिक बूम बैरियर्स और पार्किंग गाइडेंस सिस्टम लगाया जाएगा।
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यहां फंसा है पेंच, आप ने टेंडर रद्द करने की रखी है मांग
आम आदमी पार्टी ने सदन में मुफ्त पार्किंग का एजेंडा पास किया था, लेकिन प्रशासक ने खारिज कर नए रेट जारी कर दिए। अगस्त में निगम की तरफ से रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल (आरएफपी) का टेंडर जारी किया गया था और बोलियां आमंत्रित की थीं। इसके बाद आप ने टेंडर को रद्द करने की मांग की है, लेकिन निगम ने ऐसा नहीं किया। हालांकि जीएसटी का पेंच फंसने की वजह से देरी हो रही है। निगम के एक अधिकारी ने बताया कि अगर कोई निजी कांट्रेक्टर पार्किंग चलाता है तो उसे जीएसटी चुकाना पड़ता है जबकि निगम नहीं चुकाता। लेकिन अब टेंडर पीपीपी मोड पर किया जा रहा है। पार्किंग से जो राजस्व आएगा वो दो हिस्सों में बंटेगा। एक हिस्सा ठेकेदार का होगा और दूसरा नगर निगम का। ऐसे में निगम का कहना है कि पूरा जीएसटी ठेकेदार ही चुकाए, लेकिन ठेकेदार की तरफ से इस पर आपत्ति जताई जा चुकी है। उनका कहना है कि वो राजस्व निगम को हो रहा है, उस हिस्से का जीएसटी वो क्यों चुकाएं। इसको लेकर निगम ने जीएसटी दफ्तर से क्लेरिफिकेशन भी मांगी थी, जिसका इंतजार है।
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स्मार्ट पार्किंग का टेंडर सितंबर 2024 में ही खुलना था। निगम ने पीपीपी मॉडल पर स्मार्ट पार्किंग के डिजाइन, विकास, कार्यान्वयन, संचालन और रखरखाव को कंपनी के चयन के लिए रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल (आरएफपी) जारी किया है। प्रस्ताव के अनुसार शहर की 89 पेड पार्किंग को स्मार्ट किया जाना है। निगम ने पहले 21 दिन के लिए टेंडर को आगे बढ़ाकर 4 अक्तूबर को टेंडर खोलने की बात कही। दूसरी बार एक महीने के लिए समय बढ़ाकर 5 नवंबर, फिर 5 दिसंबर, फिर तीन महीने आगे बढ़ाकर 4 मार्च और अब तीन महीने का एक्सटेंशन देकर 4 जून को टेंडर खोलने की बात कही है।
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स्मार्ट पार्किंग की खासियत
नगर निगम के एक अधिकारी ने बताया कि मामला जीएसटी के क्लेरिफिकेशन को लेकर फंसा हुआ है। इसके अलावा कुछ मामलों में सेक्रेटरी लोकल गवर्नमेंट की मंजूरी भी लंबित हैं। स्मार्ट पार्किंग के अनुसार सभी पार्किंग आईसीसीसी से कनेक्टेड होंगे। अलग-अलग एंट्री-एग्जिट प्वाइंट होंगे। फास्टैग से पेमेंट की सुविधा और क्यूआर कोड से पेमेंट की सुविधा मिलेगी। पार्किंग की जगह की प्री बुकिंग भी लोग कर सकेंगे। ऑटोमेटिक बूम बैरियर्स और पार्किंग गाइडेंस सिस्टम लगाया जाएगा।
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यहां फंसा है पेंच, आप ने टेंडर रद्द करने की रखी है मांग
आम आदमी पार्टी ने सदन में मुफ्त पार्किंग का एजेंडा पास किया था, लेकिन प्रशासक ने खारिज कर नए रेट जारी कर दिए। अगस्त में निगम की तरफ से रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल (आरएफपी) का टेंडर जारी किया गया था और बोलियां आमंत्रित की थीं। इसके बाद आप ने टेंडर को रद्द करने की मांग की है, लेकिन निगम ने ऐसा नहीं किया। हालांकि जीएसटी का पेंच फंसने की वजह से देरी हो रही है। निगम के एक अधिकारी ने बताया कि अगर कोई निजी कांट्रेक्टर पार्किंग चलाता है तो उसे जीएसटी चुकाना पड़ता है जबकि निगम नहीं चुकाता। लेकिन अब टेंडर पीपीपी मोड पर किया जा रहा है। पार्किंग से जो राजस्व आएगा वो दो हिस्सों में बंटेगा। एक हिस्सा ठेकेदार का होगा और दूसरा नगर निगम का। ऐसे में निगम का कहना है कि पूरा जीएसटी ठेकेदार ही चुकाए, लेकिन ठेकेदार की तरफ से इस पर आपत्ति जताई जा चुकी है। उनका कहना है कि वो राजस्व निगम को हो रहा है, उस हिस्से का जीएसटी वो क्यों चुकाएं। इसको लेकर निगम ने जीएसटी दफ्तर से क्लेरिफिकेशन भी मांगी थी, जिसका इंतजार है।