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Chandigarh News: सीटी स्कैन में एआई बताएगा शरीर की मांसपेशियां कितनी कमजोर
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चंडीगढ़। पेट के सीटी स्कैन से अब बीमारी के साथ शरीर की मांसपेशियों की कमजोरी का भी पता लगाने में मदद मिल सकती है। पीजीआई के विशेषज्ञों ने एआई आधारित ऐसी तकनीक पर शोध किया है जो सीटी स्कैन में मांसपेशियों को खुद पहचानकर उनकी मात्रा का आकलन कर सकती है। इससे सारकोपीनिया यानी शरीर में मांसपेशियों की मात्रा और ताकत कम होने की समस्या की पहचान में मदद मिलेगी। यह जानकारी मस्कुलोस्केलेटल और ब्रेस्ट इमेजिंग पर पीजीआई में आयोजित कॉन्फ्रेंस में साझा की गई।
इंडियन जर्नल ऑफ गैस्ट्रोएंटरोलॉजी में 2026 में प्रकाशित शोध में अलग-अलग बीमारियों से जूझ रहे मरीजों के सीटी स्कैन पर इस एआई आधारित तरीके की जांच की गई। विशेषज्ञों के मुताबिक, अभी सीटी स्कैन में मांसपेशियों की मात्रा जानने के लिए डॉक्टरों को तस्वीर के एक खास हिस्से में मांसपेशियों को अलग से चिन्हित करना पड़ता है। इसमें समय लगता है और अलग-अलग लोगों के आकलन में कुछ अंतर भी हो सकता है।
शोध में इस प्रक्रिया को एआई के जरिये स्वचालित करने की कोशिश की गई। इसके लिए सीटी स्कैन में कमर की तीसरी हड्डी यानी एल-3 के स्तर की तस्वीर चुनी जाती है। एआई इस तस्वीर में मौजूद मांसपेशियों को खुद पहचानकर उनकी मात्रा का आकलन करता है। इसका फायदा यह होगा कि जिस मरीज का पेट का सीटी स्कैन किसी दूसरी बीमारी की जांच के लिए पहले से हो रहा है, उसी जांच से उसकी मांसपेशियों की स्थिति की अतिरिक्त जानकारी भी मिल सकती है।
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अलग-अलग मरीजों पर हुई जांच
शोध में पहले 550 सीटी स्कैन की मदद से एआई मॉडल तैयार किया गया। इसके बाद 601 सीटी स्कैन पर इसकी जांच की गई। इनमें अग्नाशय में सूजन, आंतों की बीमारी, पित्ताशय का कैंसर और पित्त की नली में रुकावट जैसी अलग-अलग बीमारियों वाले मरीज शामिल थे। शोध में एआई ने अलग-अलग तरह की सीटी जांच और विभिन्न बीमारियों वाले मरीजों में मांसपेशियों की पहचान लगातार अच्छी तरह की। सारकोपीनिया की पहचान में इसकी संवेदनशीलता 94 से 97 फीसदी तक रही।
मरीज के लिए क्यों जरूरी
सारकोपीनिया केवल उम्र बढ़ने के साथ ही नहीं बल्कि कई बीमारियों के दौरान भी हो सकता है। मांसपेशियों की मात्रा और ताकत कम होने से मरीज की कमजोरी बढ़ सकती है और बीमारी से उबरने में परेशानी हो सकती है। ऐसे में पेट का सीटी स्कैन पहले से हो रहे मरीज में उसी जांच के जरिये मांसपेशियों की स्थिति की अतिरिक्त जानकारी मिलना डॉक्टर के लिए उपयोगी हो सकता है।
सारकोपीनिया : आप भी जानें
सारकोपीनिया में शरीर की मांसपेशियों की मात्रा और ताकत धीरे-धीरे कम होने लगती है। यह समस्या उम्र बढ़ने के साथ ज्यादा देखने को मिलती है लेकिन लंबे समय तक बीमारी, कम खाना, कम शारीरिक गतिविधि या अस्पताल में लंबे समय तक रहने वाले मरीजों में भी मांसपेशियां कमजोर हो सकती हैं। इसके कारण शरीर में कमजोरी, चलने-फिरने में परेशानी और रोजमर्रा के काम करने में दिक्कत हो सकती है। समय पर पहचान होने पर डॉक्टर मरीज के खानपान, व्यायाम और इलाज की योजना में जरूरी बदलाव कर सकते हैं।
ये विशेषज्ञ रहे शामिल
शोध में रेडियोडायग्नोसिस एंड इमेजिंग समेत अन्य विभागों के मुख्य विशेषज्ञों में डॉ. पंकज गुप्ता, डॉ. निहारिका दत्ता, डॉ. सरोज के. सिन्हा, डॉ. हरजीत सिंह, डॉ. अजय गुलाटी, डॉ. मधुरिमा शर्मा, डॉ. महेश प्रकाश, डॉ. अनिंदिता सिन्हा, डॉ. गौरव प्रकाश, डॉ. ठाकुर दीन, डॉ. रजनीकांत यादव, डॉ. अर्चना गुप्ता, डॉ. इशान कुमार, डॉ. काजल कुमारी, डॉ. राजेश गुप्ता और डॉ. उषा दत्ता शामिल थीं।
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इंडियन जर्नल ऑफ गैस्ट्रोएंटरोलॉजी में 2026 में प्रकाशित शोध में अलग-अलग बीमारियों से जूझ रहे मरीजों के सीटी स्कैन पर इस एआई आधारित तरीके की जांच की गई। विशेषज्ञों के मुताबिक, अभी सीटी स्कैन में मांसपेशियों की मात्रा जानने के लिए डॉक्टरों को तस्वीर के एक खास हिस्से में मांसपेशियों को अलग से चिन्हित करना पड़ता है। इसमें समय लगता है और अलग-अलग लोगों के आकलन में कुछ अंतर भी हो सकता है।
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शोध में इस प्रक्रिया को एआई के जरिये स्वचालित करने की कोशिश की गई। इसके लिए सीटी स्कैन में कमर की तीसरी हड्डी यानी एल-3 के स्तर की तस्वीर चुनी जाती है। एआई इस तस्वीर में मौजूद मांसपेशियों को खुद पहचानकर उनकी मात्रा का आकलन करता है। इसका फायदा यह होगा कि जिस मरीज का पेट का सीटी स्कैन किसी दूसरी बीमारी की जांच के लिए पहले से हो रहा है, उसी जांच से उसकी मांसपेशियों की स्थिति की अतिरिक्त जानकारी भी मिल सकती है।
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अलग-अलग मरीजों पर हुई जांच
शोध में पहले 550 सीटी स्कैन की मदद से एआई मॉडल तैयार किया गया। इसके बाद 601 सीटी स्कैन पर इसकी जांच की गई। इनमें अग्नाशय में सूजन, आंतों की बीमारी, पित्ताशय का कैंसर और पित्त की नली में रुकावट जैसी अलग-अलग बीमारियों वाले मरीज शामिल थे। शोध में एआई ने अलग-अलग तरह की सीटी जांच और विभिन्न बीमारियों वाले मरीजों में मांसपेशियों की पहचान लगातार अच्छी तरह की। सारकोपीनिया की पहचान में इसकी संवेदनशीलता 94 से 97 फीसदी तक रही।
मरीज के लिए क्यों जरूरी
सारकोपीनिया केवल उम्र बढ़ने के साथ ही नहीं बल्कि कई बीमारियों के दौरान भी हो सकता है। मांसपेशियों की मात्रा और ताकत कम होने से मरीज की कमजोरी बढ़ सकती है और बीमारी से उबरने में परेशानी हो सकती है। ऐसे में पेट का सीटी स्कैन पहले से हो रहे मरीज में उसी जांच के जरिये मांसपेशियों की स्थिति की अतिरिक्त जानकारी मिलना डॉक्टर के लिए उपयोगी हो सकता है।
सारकोपीनिया : आप भी जानें
सारकोपीनिया में शरीर की मांसपेशियों की मात्रा और ताकत धीरे-धीरे कम होने लगती है। यह समस्या उम्र बढ़ने के साथ ज्यादा देखने को मिलती है लेकिन लंबे समय तक बीमारी, कम खाना, कम शारीरिक गतिविधि या अस्पताल में लंबे समय तक रहने वाले मरीजों में भी मांसपेशियां कमजोर हो सकती हैं। इसके कारण शरीर में कमजोरी, चलने-फिरने में परेशानी और रोजमर्रा के काम करने में दिक्कत हो सकती है। समय पर पहचान होने पर डॉक्टर मरीज के खानपान, व्यायाम और इलाज की योजना में जरूरी बदलाव कर सकते हैं।
ये विशेषज्ञ रहे शामिल
शोध में रेडियोडायग्नोसिस एंड इमेजिंग समेत अन्य विभागों के मुख्य विशेषज्ञों में डॉ. पंकज गुप्ता, डॉ. निहारिका दत्ता, डॉ. सरोज के. सिन्हा, डॉ. हरजीत सिंह, डॉ. अजय गुलाटी, डॉ. मधुरिमा शर्मा, डॉ. महेश प्रकाश, डॉ. अनिंदिता सिन्हा, डॉ. गौरव प्रकाश, डॉ. ठाकुर दीन, डॉ. रजनीकांत यादव, डॉ. अर्चना गुप्ता, डॉ. इशान कुमार, डॉ. काजल कुमारी, डॉ. राजेश गुप्ता और डॉ. उषा दत्ता शामिल थीं।