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हर सर्वे सही नहीं होता, चंडीगढ़ आज भी ‘सिटी ब्युटीफुल’ : बदनौर
अतुल सिन्हा/विशाल पाठक/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Sat, 06 May 2017 10:37 AM IST
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चंडीगढ़ के प्रशासक वीपी सिंह बदनौर
- फोटो : file photo
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पंजाब के गवर्नर व चंडीगढ़ के प्रशासक वीपी सिंह बदनौर स्वच्छ सर्वेक्षण में चंडीगढ़ के गिरते ग्राफ को लेकर चिंतित तो हैं लेकिन वो मानते हैं कि हर सर्वे सही नहीं होता और न ही चंडीगढ़ की खूबसूरती में कोई फर्क पड़ा है। बेशक यहां के आम लोगों में सर्वे को लेकर जानकारी न होना इसकी एक बड़ी वजह रही है। इस मामले में उनकी मुलाकात आज चंडीगढ़ की मेयर आशा जसवाल से भी हुई और लोगों को सर्वे के बारे में जागरूक न होने की वजहों पर भी चर्चा की गई।
वीपी सिंह बदनौर के लिए सबसे ज्यादा परेशान करने वाली बात चंडीगढ़ की कानून व्यवस्था है। यहां बढ़ते अपराध और हाई प्रोफाइल क्राइम के मामलों की वे गहराई से पड़ताल करने में लगे हैं और इसके लिए पुलिस के आला अफसरों से लगातार संपर्क में हैं। उनका कहना है कि दरअसल बाहर से आकर अपराध करने वालों की वजह से चंडीगढ़ बदनाम हो रहा है और यहां के लोग खुद को असुरक्षित महसूस करने लगे हैं।
अमर उजाला के साथ अनौपचारिक बातचीत में वीपी सिंह बदनौर ने अपनी तमाम पुरानी यादें साझा कीं और उन दिनों में खो गए जब भैरोंसिंह शेखावत और प्रमोद महाजन सरीखे नेताओं ने भारतीय जनता पार्टी के भविष्य की इबारत लिखनी शुरू कर दी थी। शेखावत जी की जनादेश यात्रा को भी उन्होंने याद किया और अपने संसद के दिनों को भी। राजस्थान का बूंदी और भीलवाड़ा उनके रग रग में बसा है।
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ये उनके अपने इलाके हैं। जब सफाई के मामले में राजस्थान के बूंदी का नाम आया तो उनका चेहरा खिल उठा। उन्होंने खुद वहां के डीसी से बात की और बधाई दी। उनका कहना है कि बूंदी को खूबसूरत बनाने के लिए उन्होंने बहुत कोशिशें कीं। अब वो चंडीगढ़ की परिकल्पना आने वाले 50 वर्षों के हिसाब से करना चाहते हैं।
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वीपी सिंह बदनौर के लिए सबसे ज्यादा परेशान करने वाली बात चंडीगढ़ की कानून व्यवस्था है। यहां बढ़ते अपराध और हाई प्रोफाइल क्राइम के मामलों की वे गहराई से पड़ताल करने में लगे हैं और इसके लिए पुलिस के आला अफसरों से लगातार संपर्क में हैं। उनका कहना है कि दरअसल बाहर से आकर अपराध करने वालों की वजह से चंडीगढ़ बदनाम हो रहा है और यहां के लोग खुद को असुरक्षित महसूस करने लगे हैं।
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अमर उजाला के साथ अनौपचारिक बातचीत में वीपी सिंह बदनौर ने अपनी तमाम पुरानी यादें साझा कीं और उन दिनों में खो गए जब भैरोंसिंह शेखावत और प्रमोद महाजन सरीखे नेताओं ने भारतीय जनता पार्टी के भविष्य की इबारत लिखनी शुरू कर दी थी। शेखावत जी की जनादेश यात्रा को भी उन्होंने याद किया और अपने संसद के दिनों को भी। राजस्थान का बूंदी और भीलवाड़ा उनके रग रग में बसा है।
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ये उनके अपने इलाके हैं। जब सफाई के मामले में राजस्थान के बूंदी का नाम आया तो उनका चेहरा खिल उठा। उन्होंने खुद वहां के डीसी से बात की और बधाई दी। उनका कहना है कि बूंदी को खूबसूरत बनाने के लिए उन्होंने बहुत कोशिशें कीं। अब वो चंडीगढ़ की परिकल्पना आने वाले 50 वर्षों के हिसाब से करना चाहते हैं।
अब सियासत नहीं, विकास की बात हो
चंडीगढ़ के प्रशासक वीपी सिंह बदनौर
- फोटो : file photo
राज्यपाल होने के नाते अब बदनौर राजनीतिक सवालों से बचते हैं और चाहते हैं कि अब बात सियासत की न हो। अब बात विकास और नवनिर्माण की हो, एक नए भारत की हो और ऐसी योजनाओं के क्रियान्वयन की हो जिससे वाकई आम आदमी को फायदा हो। परंपरागत राज्यपालों की भूमिका बेशक बेहद औपचारिक रहती आई हो लेकिन बदनौर खुद को इससे कुछ अलग साबित करने की कोशिशों में रहते हैं।
खासकर चंडीगढ़ के प्रशासक के तौर पर वो ज्यादा सक्रिय महसूस करते हैं और यहां के लिए कुछ ऐसा करना चाहते हैं जिससे उन्हें याद किया जाए। इसके लिए उन्होंने कुछ मुद्दे तय कर रखे हैं। मसलन, स्कूलों को डिजिटल बनाकर हर बच्चे को पढ़ाई की वो सारी सुविधाएं मुहैया कराना, जिससे उसका संपूर्ण विकास हो सके। चंडीगढ़ को जाम से मुक्ति दिलाने के लिए ट्रैफिक की ऐसी व्यवस्था करना, जिससे लोगों को कहीं रुकना न पड़े।
बुज़ुर्गों को सुरक्षा के साथ वो सारी सुविधाएं दिलाना, जिससे उन्हें खुली हवा, साफ पर्यावरण और इलाज के लिए बेहतर अस्पताल और डॉक्टर मिल सकें। इसके अलावा बदनौर चंडीगढ़ में आम लोगों के भीतर सुरक्षा का माहौल बनाने को लेकर खासे चिंतित हैं।
खुद ड्राइविंग करना पसंद करता, लेकिन अब प्रोटोकॉल का मामला है :
सेहत को लेकर खासे फिक्रमंद रहने वाले वीपी सिंह बदनौर की दिलचस्पी जहां पर्यावरण और वन्य जीवों में है, वहीं खेलकूद उन्हें बहुत प्रिय है। वे एक अच्छे तैराक रहे हैं और सरिस्का में बाघों के संरक्षण के लिए काफी काम किया है। लिखने पढ़ने और कला संस्कृति में उनकी काफी दिलचस्पी है और वो कला-संस्कृति को बढ़ावा देने का कोई मौका छोड़ना नहीं चाहते।
चंडीगढ़ में भी वो ऐसे तमाम कार्यक्रमों में लगातार शिरकत करते रहे हैं। बदनौर का कहना है, अभी तो यहां आए कुछ ही महीने हुए हैं। खुद ड्राइविंग करना पसंद करता हूं, लेकिन अब प्रोटोकॉल का मामला है, इसलिए शहर को समझ रहा हूं, पहचानने की कोशिश कर रहा हूं। लेकिन इतने दिनों में यहां की समस्याओं का अंदाजा जरूर हो गया है। कोशिश है कि कोई ऐसी कार्य योजना बनाई जाए, जिससे चंडीगढ़ सचमुच ‘सिटी ब्युटीफुल’ हो जाए।
खासकर चंडीगढ़ के प्रशासक के तौर पर वो ज्यादा सक्रिय महसूस करते हैं और यहां के लिए कुछ ऐसा करना चाहते हैं जिससे उन्हें याद किया जाए। इसके लिए उन्होंने कुछ मुद्दे तय कर रखे हैं। मसलन, स्कूलों को डिजिटल बनाकर हर बच्चे को पढ़ाई की वो सारी सुविधाएं मुहैया कराना, जिससे उसका संपूर्ण विकास हो सके। चंडीगढ़ को जाम से मुक्ति दिलाने के लिए ट्रैफिक की ऐसी व्यवस्था करना, जिससे लोगों को कहीं रुकना न पड़े।
बुज़ुर्गों को सुरक्षा के साथ वो सारी सुविधाएं दिलाना, जिससे उन्हें खुली हवा, साफ पर्यावरण और इलाज के लिए बेहतर अस्पताल और डॉक्टर मिल सकें। इसके अलावा बदनौर चंडीगढ़ में आम लोगों के भीतर सुरक्षा का माहौल बनाने को लेकर खासे चिंतित हैं।
खुद ड्राइविंग करना पसंद करता, लेकिन अब प्रोटोकॉल का मामला है :
सेहत को लेकर खासे फिक्रमंद रहने वाले वीपी सिंह बदनौर की दिलचस्पी जहां पर्यावरण और वन्य जीवों में है, वहीं खेलकूद उन्हें बहुत प्रिय है। वे एक अच्छे तैराक रहे हैं और सरिस्का में बाघों के संरक्षण के लिए काफी काम किया है। लिखने पढ़ने और कला संस्कृति में उनकी काफी दिलचस्पी है और वो कला-संस्कृति को बढ़ावा देने का कोई मौका छोड़ना नहीं चाहते।
चंडीगढ़ में भी वो ऐसे तमाम कार्यक्रमों में लगातार शिरकत करते रहे हैं। बदनौर का कहना है, अभी तो यहां आए कुछ ही महीने हुए हैं। खुद ड्राइविंग करना पसंद करता हूं, लेकिन अब प्रोटोकॉल का मामला है, इसलिए शहर को समझ रहा हूं, पहचानने की कोशिश कर रहा हूं। लेकिन इतने दिनों में यहां की समस्याओं का अंदाजा जरूर हो गया है। कोशिश है कि कोई ऐसी कार्य योजना बनाई जाए, जिससे चंडीगढ़ सचमुच ‘सिटी ब्युटीफुल’ हो जाए।