Punjab New DGP: वीके भावरा बने पंजाब के नए डीजीपी, सिद्धार्थ चट्टोपाध्याय की ली जगह
संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) ने पंजाब में नए पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) के लिए तीन आईपीएस अधिकारियों के नाम पर विचार किया था। इन नामों में मौजूदा डीजीपी सिद्धार्थ चट्टोपाध्याय का नाम शामिल नहीं था। तीन नामों में दिनकर गुप्ता, बीके भावरा और प्रबोध कुमार थे।
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1987 बैच के आईपीएस अधिकारी वीरेश कुमार भावरा ने शनिवार को पंजाब के पुलिस महानिदेशक का पदभार ग्रहण कर लिया। राज्य सरकार की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) से प्राप्त पैनल के विचार करने के बाद राज्यपाल ने आईपीएस अधिकारी वीरेश कुमार भावरा को पुलिस महानिदेशक (पुलिस बल के प्रमुख) के रूप में नियुक्त करने का आदेश जारी किया।
कार्यभार संभालने के बाद नवनियुक्त डीजीपी ने कहा कि पंजाब विधानसभा चुनाव-2022 करीब हैं और पंजाब पुलिस चुनाव का सुचारु संचालन सुनिश्चित करेगी। चुनाव को ध्यान में रखते हुए पुलिस यह भी सुनिश्चित करेगी कि चुनाव प्रलोभन मुक्त तरीके से हो। उनका ध्यान राज्य से नशीली दवाओं के खतरे और आतंकवाद को खत्म करने पर होगा। पीपल सेंट्रिक पुलिसिंग (जनता केंद्रित पुलिसिंग) और पब्लिक सर्विस डिलीवरी (लोक सेवा वितरण) उनकी सर्वोच्च प्राथमिकताओं में है।
उल्लेखनीय है कि यूपीएससी की ओर से 4 जनवरी को पंजाब में स्थायी डीजीपी की नियुक्ति के लिए तीन अफसरों का पैनल भेज दिया गया था। सूत्रों के अनुसार गुरुवार रात मुख्यमंत्री ने पैनल पर विचार किया। रात एक बजे बुलाई बैठक में मुख्यमंत्री चन्नी के अलावा उपमुख्यमंत्री सुखजिंदर सिंह रंधावा, मुख्य सचिव अनिरुद्ध तिवारी और गृह विभाग के एडिशनल चीफ सेक्रेटरी अनुराग वर्मा मौजूद रहे।
पता चला है कि बैठक में तो फैसला नहीं हो सका था लेकिन शनिवार को चुनाव आचार संहिता लागू होने की खबरों के बीच सीएम ने आनन-फानन भावरा के नाम पर मुहर लगा दी। इस पैनल में भावरा के अलावा दिनकर गुप्ता और प्रबोध कुमार के नाम थे लेकिन इन दोनों अधिकारियों ने पहले ही केंद्र सरकार में डेपुटेशन में जाने की अनुमति मांग रखी थी। यूपीएससी को भेजे गए पैनल में भावरा का नाम सबसे ऊपर रहा।
2017 के चुनाव में सुरक्षा व्यवस्था संभाल चुके हैं भावरा
वीके बावरा 1987 बैच के आईपीएस अधिकारी हैं और इस समय डीजीपी होमगार्ड तैनात थे। वे विजिलेंस चीफ के तौर पर भी काम कर चुके हैं। भावरा पुलिस मेडल मेरिटोरियस सर्विस और डिस्टिंगुइश्ट सेवा के लिए राष्ट्रपति पुलिस मेडल के अवार्डी हैं। उन्होंने पंजाब, असम और इंटेलिजेंस ब्यूरो भारत सरकार में अलग-अलग पदों पर शानदार सेवाएं निभाई हैं। वह एसएसपी मानसा, डीआईजी पटियाला रेंज और आईजीपी/बठिंडा के तौर पर भी काम कर चुके हैं। वह डीजीपी/एडीजीपी-इंटेलिजेंस, प्रोविजनिंग और आधुनिकीकरण, सूचना प्रौद्योगिकी और दूरसंचार, ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन, आंतरिक निगरानी और मानवीय अधिकार और कल्याण के तौर पर पंजाब पुलिस के अलग-अलग विंगों के प्रमुख के तौर पर काम कर चुके हैं।
उन्होंने ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन की सृजन करने में अहम भूमिका निभाई और ब्यूरो के पहले निदेशक के तौर पर भी तैनात रहे हैं। आईटी एंड टी विंग में अपनी तैनाती के दौरान उन्होंने सीसीटीएनएस प्रोजेक्ट को लागू करने और पंजाब पुलिस की ओर से सोशल मीडिया के क्रियाशील प्रयोग का नेतृत्व किया। वह 2017 के पंजाब विधानसभा चुनाव के दौरान चुनाव आयोग द्वारा पूरे प्रदेश में सुरक्षा व्यवस्था के लिए नोडल अधिकारी नियुक्त किए गए थे। इस बार भावरा की डीजीपी पद पर नियुक्ति ऐसे समय में हो रही है, जब राज्य में विधानसभा चुनाव की तैयारी शुरू हो चुकी है।
पत्रकारिता से जुड़ा है डीजीपी का परिवार
राजस्थान के भरतपुर के बयाना निवासी वीके भावरा के पिता गोपालराम स्वतंत्रता सेनानी रहे हैं। नौ माह पहले 91 वर्ष की उम्र में उनका निधन हो गया था। उनके भाई योगेश भावरा और योगेश की पत्नी वरिष्ठ पत्रकार हैं। वहीं, वीके भावरा की पत्नी भी वरिष्ठ आईएएस अधिकारी हैं।