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Chandigarh News: विनोबा भावे के विचारों की गूंज, कवियों ने दी श्रद्धांजलि
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चंडीगढ़। संत विनोबा भावे की 130वीं जयंती पर सोमवार को चंडीगढ़ के सेक्टर-43 स्थित कम्युनिटी सेंटर में आचार्य कुल संस्था द्वारा काव्य श्रद्धा सुमन कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर हिंदी, पंजाबी और उर्दू भाषा के करीब 50 कवियों और शायरों ने कविताओं और ग़ज़लों के माध्यम से संत विनोबा को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।
कार्यक्रम का शुभारंभ विनोबा भावे के चित्र पर माल्यार्पण और गायिका पल्लवी रामपाल की ओर से प्रस्तुत प्रसिद्ध भजन वैष्णव जन तो तेने कहिए से हुआ। कार्यक्रम की मुख्य अतिथि डॉ. मिशील गोयल रहीं, जबकि अध्यक्षता पार्षद प्रेमलता ने की। संस्था अध्यक्ष केके शारदा ने कहा कि विनोबा भावे जैसी महान विभूतियों को आज सरकारी स्तर पर भुला दिया गया है। इस आयोजन का उद्देश्य नई पीढ़ी को उनके विचारों से जोड़ना है।
भावभीनी प्रस्तुतियों से भरा रहा आयोजन
काव्य गोष्ठी में कवियों ने अपने रचनात्मक शब्दों से विनोबा के जीवन, दर्शन और उनके भूदान आंदोलन को स्मरण करते हुए प्रस्तुति दी।
प्रेम विज ने कहा- भू-दान देकर जग को दिखलाया, कैसे प्रेम ने सबको भाया।
डॉ. अनीश गर्ग की पंक्तियां - जहां से दर्द उठा है, वहीं से सूरज उगेगा ने श्रोताओं को प्रभावित किया।
डॉ. प्रज्ञा शारदा की रचना को गायक सुरजीत सिंह धीर ने सुरों में पिरोकर प्रस्तुत किया, जबकि संचालन डॉ. संगीता शर्मा कुंद्रा ने किया और गुरु-शिष्य पर आधारित दोहे भी सुनाए।
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नामचीन कवियों की उपस्थिति
इस मौके पर सतवंत कौर गोगी गिल, अशोक नादिर, पल्लवी रामपाल, डॉ. गुरदर्शन सिंह मावी, हरिंदर सिन्हा, राजेश कुमारी, विंदर माझी, एमएल अरोड़ा, राज विज, भूपेंद्र सिंह कपूर, आरके भगत, सुभाष भास्कर, बृजभूषण शर्मा, गुरदीप गुल, डॉ. उमा शर्मा, प्रिं. बहादुर सिंह गोसल, विमला गुगलानी, राजन सुदामा, नलिन आचार्य, वीणा ढींगरा, कृष्णा गोयल, नीलम नारंग, डॉ. राजेंद्र कौर, डॉ. सीमा कंवर, संगीता पुखराज, विनोद कश्यप, पुष्प हंस, पाल अजनबी, राजेंद्र सिंह समेत अनेक साहित्यप्रेमी उपस्थित रहे। कार्यक्रम के अंत में सभी प्रतिभागियों को स्मृति चिह्न प्रदान किए गए और विनोबा भावे के विचारों को जन-जन तक पहुंचाने का संकल्प लिया गया।
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कार्यक्रम का शुभारंभ विनोबा भावे के चित्र पर माल्यार्पण और गायिका पल्लवी रामपाल की ओर से प्रस्तुत प्रसिद्ध भजन वैष्णव जन तो तेने कहिए से हुआ। कार्यक्रम की मुख्य अतिथि डॉ. मिशील गोयल रहीं, जबकि अध्यक्षता पार्षद प्रेमलता ने की। संस्था अध्यक्ष केके शारदा ने कहा कि विनोबा भावे जैसी महान विभूतियों को आज सरकारी स्तर पर भुला दिया गया है। इस आयोजन का उद्देश्य नई पीढ़ी को उनके विचारों से जोड़ना है।
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भावभीनी प्रस्तुतियों से भरा रहा आयोजन
काव्य गोष्ठी में कवियों ने अपने रचनात्मक शब्दों से विनोबा के जीवन, दर्शन और उनके भूदान आंदोलन को स्मरण करते हुए प्रस्तुति दी।
प्रेम विज ने कहा- भू-दान देकर जग को दिखलाया, कैसे प्रेम ने सबको भाया।
डॉ. अनीश गर्ग की पंक्तियां - जहां से दर्द उठा है, वहीं से सूरज उगेगा ने श्रोताओं को प्रभावित किया।
डॉ. प्रज्ञा शारदा की रचना को गायक सुरजीत सिंह धीर ने सुरों में पिरोकर प्रस्तुत किया, जबकि संचालन डॉ. संगीता शर्मा कुंद्रा ने किया और गुरु-शिष्य पर आधारित दोहे भी सुनाए।
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नामचीन कवियों की उपस्थिति
इस मौके पर सतवंत कौर गोगी गिल, अशोक नादिर, पल्लवी रामपाल, डॉ. गुरदर्शन सिंह मावी, हरिंदर सिन्हा, राजेश कुमारी, विंदर माझी, एमएल अरोड़ा, राज विज, भूपेंद्र सिंह कपूर, आरके भगत, सुभाष भास्कर, बृजभूषण शर्मा, गुरदीप गुल, डॉ. उमा शर्मा, प्रिं. बहादुर सिंह गोसल, विमला गुगलानी, राजन सुदामा, नलिन आचार्य, वीणा ढींगरा, कृष्णा गोयल, नीलम नारंग, डॉ. राजेंद्र कौर, डॉ. सीमा कंवर, संगीता पुखराज, विनोद कश्यप, पुष्प हंस, पाल अजनबी, राजेंद्र सिंह समेत अनेक साहित्यप्रेमी उपस्थित रहे। कार्यक्रम के अंत में सभी प्रतिभागियों को स्मृति चिह्न प्रदान किए गए और विनोबा भावे के विचारों को जन-जन तक पहुंचाने का संकल्प लिया गया।