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विजिलेंस करेगी छह ऑपरेटरों की फर्जी नियुक्ति की जांच, ये है मामला
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Sun, 21 May 2017 11:11 PM IST
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विजिलेंस करेगी फर्जी नियुक्ति की जांच
- फोटो : Demo Pic
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पंजाब पुलिस के आईटी एंड टेली-कम्युनिकेशन विंग में छह वायरलेस ऑपरेटरों की फर्जी नियुक्ति के मामले की जांच अब विजिलेंस ब्यूरो करेगा। रविवार को इस संबंध में आदेश जारी कर दिए गए। पंजाब पुलिस सोमवार को मामले से संबंधित सारा रिकॉॅर्ड विजिलेंस को सौंप देगी।
पंजाब पुलिस की आईटीएंडटी डिपार्टमेंट के मोहाली विंग केएएसआई संजीव कुमार की ओर से छह वायरलेस ऑपरेटरों की फर्जी नियुक्ति का मामला काफी तूल पकड़ गया था। इस मामले में विभाग केअपने ही छह इंस्पेक्टर और दो डीएसपी के नाम भी सामने आ गए थे। कुछ और अधिकारियों केशामिल होने की भी आशंका थी, जिसे देखते हुए पंजाब पुलिस केआला अधिकारी चाहते थे कि पुलिस के बजाय इसकी जांच विजिलेंस जैसी किसी बाहरी एजेंसी से कराई जाए।
डीजीपी सुरेश अरोड़ा की सहमति के बाद आखिरकार सोमवार को जांच विजिलेंस को सौंप दी गई है। एएसआई संजीव कुमार ने पिछले साल अपने तौर पर ही फर्जी तरीके से छह लोगों को बतौर वायरलेस ऑपरेटर नियुक्त कर लिया था। इन लोगों को फर्जी नियुक्ति पत्र से लेकर जाली आई-कार्ड तक दिए गए थे।
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पंजाब पुलिस की आईटीएंडटी डिपार्टमेंट के मोहाली विंग केएएसआई संजीव कुमार की ओर से छह वायरलेस ऑपरेटरों की फर्जी नियुक्ति का मामला काफी तूल पकड़ गया था। इस मामले में विभाग केअपने ही छह इंस्पेक्टर और दो डीएसपी के नाम भी सामने आ गए थे। कुछ और अधिकारियों केशामिल होने की भी आशंका थी, जिसे देखते हुए पंजाब पुलिस केआला अधिकारी चाहते थे कि पुलिस के बजाय इसकी जांच विजिलेंस जैसी किसी बाहरी एजेंसी से कराई जाए।
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डीजीपी सुरेश अरोड़ा की सहमति के बाद आखिरकार सोमवार को जांच विजिलेंस को सौंप दी गई है। एएसआई संजीव कुमार ने पिछले साल अपने तौर पर ही फर्जी तरीके से छह लोगों को बतौर वायरलेस ऑपरेटर नियुक्त कर लिया था। इन लोगों को फर्जी नियुक्ति पत्र से लेकर जाली आई-कार्ड तक दिए गए थे।
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ऐसे चलता रहा फर्जीवाड़े का खेल
जांच
- फोटो : demo pic
दिलचस्प बात यह थी कि मोहाली फेज नौ स्थित विंग के परिसर में रोजाना एक इंस्पेक्टर हाजिरी चेक करने जाता था। दो डीएसपी की ड्यूटी भी इसकेलिए लगाई गई थी, लेकिन छह महीने तक किसी आला अधिकारी को इसकी भनक नहीं लगने दी गई।
एएसआई संजीव कुमार की योजना थी कि विभाग की ओर से की जाने वाली 113 कांस्टेबलों की नियुक्ति केसाथ ही इन्हें भी चुपचाप एडजस्ट कर दिया जाए, लेकिन छह ऑपरेटरों का वेतन जारी न होने का मुद्दा उठा। अकाउंटेंट पैन नंबर लेने गई तो जालसाजी का खुलासा हुआ। उसके बाद से संजीव कुमार गैंगरीन की शिकायत के चलते मैक्स अस्पताल में भरती है।
एआईजी और डीलिंग क्लर्क के दस्तखत स्कैन किए
वायरलेस ऑपरेटरों के नियुक्ति पत्र पर नियमानुसार आईटी एंड टी विंग के एआईजी के दस्तखत होने जरूरी हैं। मास्टरमाइंड एएसआई संजीव कुमार इतना शातिर था कि उसने एआईजी के दस्तखत बड़ी सफाई से स्कैन किए। उसकेबाद उन्हें नियुक्ति पत्रों पर चस्पा कर दिया। इतना ही नहीं, एआईजी केदस्तखत के साथ डीलिंग क्लर्क के दस्तखत भी होते हैं। संजीव कुमार ने वह भी स्कैन करके नियुक्ति पत्रों पर उसी जगह लगाए, जहां आमतौर पर वे होते हैं।
एएसआई संजीव कुमार की योजना थी कि विभाग की ओर से की जाने वाली 113 कांस्टेबलों की नियुक्ति केसाथ ही इन्हें भी चुपचाप एडजस्ट कर दिया जाए, लेकिन छह ऑपरेटरों का वेतन जारी न होने का मुद्दा उठा। अकाउंटेंट पैन नंबर लेने गई तो जालसाजी का खुलासा हुआ। उसके बाद से संजीव कुमार गैंगरीन की शिकायत के चलते मैक्स अस्पताल में भरती है।
एआईजी और डीलिंग क्लर्क के दस्तखत स्कैन किए
वायरलेस ऑपरेटरों के नियुक्ति पत्र पर नियमानुसार आईटी एंड टी विंग के एआईजी के दस्तखत होने जरूरी हैं। मास्टरमाइंड एएसआई संजीव कुमार इतना शातिर था कि उसने एआईजी के दस्तखत बड़ी सफाई से स्कैन किए। उसकेबाद उन्हें नियुक्ति पत्रों पर चस्पा कर दिया। इतना ही नहीं, एआईजी केदस्तखत के साथ डीलिंग क्लर्क के दस्तखत भी होते हैं। संजीव कुमार ने वह भी स्कैन करके नियुक्ति पत्रों पर उसी जगह लगाए, जहां आमतौर पर वे होते हैं।