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एचपीएससी फर्जीवाड़ा मामला: एचसीएस अनिल नागर को लेकर एचपीएससी कार्यालय पहुंची विजिलेंस
Mon, 22 Nov 2021 04:50 PM IST
भूपेंद्र सिंह
अमर उजाला ब्यूरो, चंडीगढ़
अमर उजाला ब्यूरो, चंडीगढ़
Published by: भूपेंद्र सिंह
Updated Mon, 22 Nov 2021 04:50 PM IST
सार
हरियाणा विजिलेंस ब्यूरो ने एचपीएससी के उप सचिव एचसीएस अनिल नागर को डेंटल सर्जन भर्ती की लिखित परीखा में नंबर बढ़ाने के लिए फर्जीवाड़े के आरोप में गिरफ्तार किया था। इस मामले में सोमवार को विजिलेंस अनिल नागर को एचपीएससी कार्यालय लेकर पहुंची।
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एचसीएस अनिल नागर को लेकर जाती विजिलेंस टीम।
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
हरियाणा लोक सेवा आयोग (एचपीएससी) में डेंटल सर्जन भर्ती फर्जीवाड़े में गिरफ्तार उप सचिव अनिल नागर से बड़े खुलासे हुए हैं। उसकी जेब से एक पर्ची बरामद हुई है जिसमें एचसीएस की परीक्षा के 24 रोल नंबर लिखे हुए हैं, जिनमें से छह अव्वल रहने वाले अभ्यर्थियों के हैं। पूछताछ में यह भी पता चला है कि 16 रोल नंबर अश्वनी ने नागर को दिए थे और इन अभ्यर्थियों से 20-20 लाख रुपये लिए थे।
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6 की परीक्षा कराई गई। शेष रोल नंबरों की भी जांच चल रही है। विजिलेंस ने एचसीएस प्री परीक्षा के 24 और डेंटल के 16 आवेदकों की ओएमआर शीट भी कार्यालय से बरामद कर ली है जिनकी जांच की जा रही है। उक्त जानकारी सामने आने के बाद विजिलेंस अधिक सक्रिय हो गई है।
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विजिलेंस सोमवार को डेंटल सर्जन भर्ती के आरोपियों को लेकर हरियाणा लोक सेवा आयोग के कार्यालय पहुंची और रिकॉर्ड खंगाला। एक प्रिंटर, दस्तावेज के अलावा डेंटल सर्जन और एचसीएस प्री परीक्षा की ओएमआर शीट कब्जे में ली हैं। इससे पहले रविवार देर रात भिवानी के कोंठ गांव में आरोपी नवीन के घर भी दबिश दी गई थी। वहां से डेंटल सर्जन भर्ती के फार्म और रोल नंबर मिले थे।
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सोमवार नवीन और अश्वनी को अदालत में पेश किया गया। दोनों आरोपियों का एक दिन का और रिमांड मिला है। इसके बाद विजिलेंस नवीन, अश्वनी और एचसीएस अनिल नागर को लेकर एचपीएससी के कार्यालय पहुंची और रिकॉर्ड खंगाला। अब अन्य भर्तियों की ओएमआर शीट भी जांची जाएगी, जिसके लिए जांच जारी है।
मुख्य आरोपी नागर का आज रिमांड होगा पूरा
मुख्य आरोपी नागर का रिमांड मंगलवार को पूरा होगा। इसके बाद नागर और उसके सहयोगी अश्वनी शर्मा को आमने-सामने बैठाकर पूछताछ की जा सकती है, ताकि गिरोह का चौधरी बंसी लाल विश्वविद्यालय से जुड़े कनेक्शन का पता चल सके। रविवार को हुई पूछताछ में तीनों आरोपियों ने कुबूला था कि एचसीएस परीक्षा पास करवाने के लिए कुल 16 नाम दिए थे। इसमें से पांच पास हुए थे। 10 नाम नवीन ने दिए थे। पांच नाम पवन और एक नाम देवेंद्र रावत ने दिया था। पवन और देवेंद्र रावत का लिंक भिवानी के चौधरी बंसीलाल विश्वविद्यालय के साथ है।
नवीन ने अश्वनी को दिए थे रोल नंबर
विजिलेंस को भिवानी में नवीन के घर से जो रोल नंबर और डेंटल सर्जन के फार्म मिले हैं, वे नवीन ने दिए थे। इनमें 11 में से 8 अभ्यर्थी पास हो गए थे। हिसार के दौलतपुर निवासी नरेंद्र की शिकायत में जिस उम्मीदवार दलबीर सिंह का डेंटल सर्जन का पेपर पास करवाने के लिए रोल नंबर दिया था, उसका भी फार्म मिला है। इस रोल नंबर का डेंटल सर्जन का पेपर पास करवाने के लिए नवीन ने 20 लाख रुपये थे।