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विजिलेंस खंगालने लगी मुख्य सचिव के बेटे का शराब कारोबार, सीएम के निर्देश पर टीम डिस्टलरी पहुंची

Sun, 17 May 2020 05:02 PM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: ajay kumar Updated Sun, 17 May 2020 05:02 PM IST
सार

  • सीएम के निर्देश पर, ब्यूरो व एक्साइज टीमें डिस्टलरी पहुंची
  • मुख्य सचिव के बेटे के खिलाफ नहीं मिला अब तक कोई सबूत
  • मंत्री-विधायकों ने भी कोरे आरोप लगाए, सबूत कोई नहीं दिया

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Vigilance and Excise Department team reached the distillery on the instructions of CM
सांकेतिक तस्वीर।

विस्तार

एक्साइज पॉलिसी को लेकर मुख्य सचिव और मंत्रियों के बीच छिड़े विवाद में अंदरखाने कार्रवाई शुरू हो गई है। मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के निर्देश पर राज्य के विजिलेंस ब्यूरो और एक्साइज विभाग के अधिकारी यह खंगालने में जुट गए हैं कि मुख्य सचिव के बेटे का शराब कारोबार से कोई नाता है या नहीं।

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सूत्रों के अनुसार, विजिलेंस और एक्साइज विभाग के अधिकारियों ने छानबीन के क्रम में हमीरा डिस्टलरी का भी दौरा किया और वहां दस्तावेजों की जांच की है। यह भी पता चला है कि अधिकारियों को फिलहाल ऐसा कोई सबूत नहीं मिला है, जिससे यह साबित हो सके कि मुख्य सचिव का बेटा शराब कारोबार से जुड़ा है। 
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उल्लेखनीय है कि कांग्रेस विधायक राजा वड़िंग ने मुख्य सचिव के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए आरोप लगाए थे कि मुख्य सचिव करन अवतार सिंह का बेटा शराब कारोबार से जुड़ा है, इसीलिए मुख्य सचिव एक्साइज पॉलिसी को मनमाने तरीके से लागू करने की कोशिश कर रहे हैं।
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एक्साइज पॉलिसी के मामले पर कैबिनेट सब-कमेटी की बैठक में वित्त मंत्री मनप्रीत सिंह बादल और मुख्य सचिव करन अवतार सिंह के बीच बहस के मुद्दे में राज्य के बाकी कैबिनेट मंत्री और कुछ विधायक भी शामिल हो गए थे, जिन्होंने कैबिनेट की मीटिंग में मुख्यमंत्री को विवाद सुलझाने का जिम्मा सौंपा था। 

मंत्रियों की ओर से मुख्य सचिव को हटाने की मांग भी की गई, जिसके दबाव में सोमवार क कैबिनेट बैठक में करन अवतार सिंह की जगह सतीश चंद्रा को संसदीय सचिव का कार्य सौंपा गया था। मनप्रीत बादल और चरनजीत चन्नी ने मुख्यमंत्री से यहां तक कह दिया था कि अगर करन अवतार सिंह बैठक में आते हैं तो वे उस बैठक में हिस्सा नहीं लेंगे।

दूसरी ओर, मुख्यमंत्री ने इस पूरे मामले पर चुप्पी साधे रखते हुए सबसे पहले करन अवतार सिंह से टैक्सेशन विभाग के एडिशनल प्रिंसिपल सेक्रेटरी का कार्यभार वापस लेकर मंत्रियों को शांत करने की कोशिश की। यह मामला अभी खत्म नहीं हो सका। मुख्य सचिव को हटाए जाने की मांग को देखते हुए अब मुख्यमंत्री ने इस मामले में तथ्य तलाशने के निर्देश दे दिए हैं। 

विधायक राजा वड़िंग के लगाया था यह आरोप
राजा वड़िंग ने ट्वीट कर आरोप लगाया था-क्या पंजाब के मुख्य सचिव करण अवतार सिंह इस बात से इनकार करेंगे कि इनके इकलौते बेटे हरमन सिंह ने हाल ही में पंजाब के कपूरथला जिले में हमीरा डिस्टलरी के पट्टे में बेनामी ब्याज लिया है, जोकि जगजीत इंडस्ट्रीज से संबंधित है? एक अन्य ट्वीट में उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि- मुख्य सचिव करण अवतार सिंह इस बात से इनकार करते हैं कि वे चंडीगढ़ के शराब व्यवसायी अरविंद सिंगला और जालंधर के व्यवसायी चंदन को नहीं जानते, हमीरा डिस्टलरी का पट्टा लेने वाली फर्म के दो साझेदार हैं?

अकाली दल ने किया मुख्य सचिव का बचाव 

राज्य के विपक्षी दलों आप और अकाली दल ने मुख्य सचिव का बचाव करते हुए पूरे झगड़े को कांग्रेसी नेताओं की शराब में हिस्सेदारी का झगड़ा करार दिया है। अकाली दल के डॉ. दलजीत सिंह चीमा ने बयान में कहा कि तीन साल से एक्साइज ड्यूटी में घाटे के लिए इसी साल नियुक्त हुए मुख्य सचिव को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। अकाली दल का आरोप है कि भ्रष्टाचार उजागर करने वाले अधिकारी को निशाना बनाया जा रहा है। 

अफसरों पर आरोप साबित करें या माफी मांगें कांग्रेसी मंत्री: अमन अरोड़ा
आम आदमी पार्टी (आप) पंजाब के सीनियर नेता और विधायक अमन अरोड़ा ने राज्य के कांग्रेसी मंत्रियों और विधायकों को चुनौती दी है कि उनकी ओर से आबकारी राजस्व में 600 करोड़ के घाटे के लिए जिन अफसरों को आरोपी ठहराया जा रहा है, उनके बारे में सबूत पेश करें, क्योंकि मुख्यमंत्री की तरफ से उन अफसरों को क्लीन चिट मिल चुकी है। 

अमन अरोड़ा ने कहा, ‘‘कैबिनेट मंत्री सुखजिंदर सिंह रंधावा, चरनजीत सिंह चन्नी और मुख्यमंत्री के सलाहकार राजा वड़िंग समेत जितने मंत्रियों और विधायकों को आबकारी घाटे के लिए मुख्य सचिव समेत अफसरों को आरोपी ठहराया था, वह आरोप साबित करे या फिर पंजाब के लोगों और संबंधित अफसरों से माफी मांगें।’’

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