Chandigarh News: हेरिटेज फर्नीचरों की होगी वीडियोग्राफी, पेटेंट भी कराएगा प्रशासन
पेटेंट हो जाने से हेरिटेज फर्नीचर के जैसे दिखने वाले फर्नीचर कोई नहीं बना सकेगा। न ही उसकी तस्करी कर सकेगा। अगर कोई फर्नीचर बनाना चाहेगा तो उसे रॉयल्टी चुकानी होगी। हेरिटेज वस्तुओं की पहचान कर उनकी नंबरिंग की जाएगी और उसकी वीडियो रिकॉर्डिंग भी होगी।
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चंडीगढ़ प्रशासन ने हेरिटेज वस्तुओं को सहेजने का प्रयास शुरू कर दिया है। ली कार्बूजिए फाउंडेशन का एक डेलिगेशन चंडीगढ़ पहुंचा है। मंगलवार को सलाहकार धर्मपाल ने उनके साथ एक बैठक की। सुझाव दिया गया कि अगर प्रशासन हेरिटेज आइटम्स को अपने नाम पेटेंट करा ले तो चोरी व नकली आइटम बनाने की घटनाएं कम हो सकती हैं। सलाहकार ने इस पर काम करने का निर्देश दिया है।
प्रशासन के अधिकारियों के साथ हुई बैठक में हेरिटेज वस्तुओं की सुरक्षा, संरक्षण और पुनर्स्थापन की कार्ययोजना के बारे में चर्चा की गई। फ्रांसीसी मंत्रालय ने ली कार्बूजिए फाउंडेशन की निदेशक ब्रिगिट बाउवियर की अध्यक्षता में एक 10 सदस्यीय विशेषज्ञ टीम चंडीगढ़ भेजी है। टीम में संरक्षण वैज्ञानिक, विरासत पुनर्स्थापन, संरक्षण वास्तुकार, फ्रांसीसी केंद्रीय न्यायिक पुलिस निदेशक के प्रतिनिधि, फ्रांसीसी संस्कृति मंत्रालय के ऐतिहासिक स्मारकों के वास्तुकार और महानिरीक्षक शामिल हैं।
चंडीगढ़ प्रशासन को हेरिटेज वस्तुओं के संरक्षण में मार्गदर्शन करने के लिए ये टीम 19 नवंबर तक शहर में रहेगी। टीम चंडीगढ़ प्रशासन को विरासत वस्तुओं की प्रामाणिकता, वस्तुओं की टैगिंग, विरासत वस्तुओं के कानूनी संरक्षण में मार्गदर्शन, उनके संरक्षण और बहाली के लिए दिशा-निर्देशों व प्रक्रिया का पालन करने में मदद करेगी।
पांच दिनों के दौरान फ्रांसीसी टीम व्यक्तिगत रूप से विरासत वस्तुओं की पहचान करने के लिए विभिन्न स्थलों का दौरा करेगी और विभिन्न विभागों, संस्थानों और कार्यालयों की ओर से नियुक्त नोडल अधिकारियों के साथ बैठक करेगी। इसके बाद हेरिटेज आइटम्स की सूची को भी प्रशासन अपग्रेड करेगा। इसमें कई नए आइटम्स को शामिल किया जाएगा।
पेटेंट कराने का यह होगा लाभ
पेटेंट हो जाने से हेरिटेज फर्नीचर के जैसे दिखने वाले फर्नीचर कोई नहीं बना सकेगा। न ही उसकी तस्करी कर सकेगा। अगर कोई फर्नीचर बनाना चाहेगा तो उसे रॉयल्टी चुकानी होगी। हेरिटेज वस्तुओं की पहचान कर उनकी नंबरिंग की जाएगी और उसकी वीडियो रिकॉर्डिंग भी होगी। सभी की जानकारी डिजिटल माध्यम से सुरक्षित रखी जाएगी ताकि भविष्य में हेरिटेज फर्नीचर की तस्करी पर पूरी तरह रोक लगाई जा सके।
बता दें कि शहर का हेरिटेज फर्नीचर पिछले कई साल से विदेश में लाखों में नीलाम हो रहा है। यह सभी फर्नीचर चंडीगढ़ के पंजाब यूनिवर्सिटी, यूटी सचिवालय, पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट, विभिन्न स्कूल व कॉलेज का है। इनके चाहने वाले इसे मुंहमांगी कीमत पर खरीदते हैं। दाम कई गुना ज्यादा होने की वजह से इसकी तस्करी भी बढ़ गई है।
हेरिटेज आइटम्स की पहचान कर रही है एचआईआईआईसी
प्रशासन को यह भी नहीं पता था कि चंडीगढ़ में कितने हेरिटेज आइटम हैं। वर्ष 2016 में चंडीगढ़ के हेरिटेज फर्नीचर आइटमों की सुरक्षा और संरक्षण के लिए विरासत आइटम पहचान और निरीक्षण समिति (एचआईआईआईसी) का गठन किया गया था। इसके बाद 2019 और 2020 में चंडीगढ़ के एक सीनियर आर्किटेक्ट की अध्यक्षता में एचआईआईआईसी का गठन हुआ। एचआईआईआईसी ने अब तक विभिन्न विभागों, संस्थानों, कार्यालयों में उपलब्ध विरासत वस्तुओं की सूची करण और निरीक्षण किया है।