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दिल की बात... पिता की अर्थी को कंधा नहीं दे पाने का मलाल, कोरोना को जीतने पर मिला सुकून

Tue, 25 Aug 2020 12:13 PM IST
पंचकुला ब्‍यूरो अमर उजाला, चंडीगढ़
अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: पंचकुला ब्‍यूरो Updated Tue, 25 Aug 2020 12:13 PM IST
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corona warrior shared feelings via interview
कोरोना वॉरियर का परिवार - फोटो : अमर उजाला
चंडीगढ़ सेक्टर-41 कृष्णा मार्केट के प्रधान सुनील कुमार जैन के लिए कोरोना से पिता की मौत बेहद दुखद रही। पूरा परिवार इस बात को सच मानने के लिए तैयार नहीं है, लेकिन सच तो यही है। सुनील ने बताया कि कोरोना की वजह से अंतिम समय में पिता उनसे अलग हो गए।
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उन्होंने हंसते खेलते परिवार को बड़े नाजो से पाला और हर पल प्यार लुटाया, लेकिन अंतिम समय में अचानक हमसे जुदा हो गए। सुनील को दुख है कि बचपन में उनकी उंगली पकड़कर चलना सीखे, लेकिन अंतिम समय अर्थी को कंधा नहीं दे पाए। सुनील का कहना है कि कोरोना काल में उनकी तरह कई अन्य लोगों को अपनों को खोने का गम होगा, लेकिन यह समय अपने परिवार और देश के लिए कोरोना से जंग जीतने का है।
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पहले पिता फिर परिवार आया पॉजिटिव
सुनील ने बताया कि कोरोना की चपेट में सबसे पहले उनके पिता कृष्ण लाल जैन आए थे। 2 अगस्त को रिपोर्ट पॉजिटिव आने के बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती किया गया। परिवार के सभी सदस्यों को जांच का नमूना लिया गया। इसमें 10 लोगों में कोरोना की पुष्टि हुई। सुनील के घर में उनका और उनके छोटे भाई का परिवार एक साथ रहता है, जिसमें सुनील, उनकी पत्नी, उनके तीन बेटे, सुनील के भाई, भाई की पत्नी और उनके दो बच्चे और सुनील की मां रहती हैं।
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पिता के बाद 6 अगस्त को सुनील के घर के अन्य लोगों में कोरोना की पुष्टि हुई। परिवार में उनकी मां, पत्नी, छोटा भाई और छोटा बेटा कोरोना की चपेट में आने से बच गए थे। पिता को सेक्टर-48 हॉस्पिटल में भर्ती किया गया था। परिवार के अन्य सदस्यों को सूद धर्मशाला में क्वारंटीन किया गया। पिता तो नहीं रहे, लेकिन यह पूरा परिवार 16 अगस्त को स्वस्थ होकर घर आ गया।

देखते ही देखते सिर से उठ गया पिता का साया
दो अगस्त को अस्पताल में भर्ती किए जाने के बाद से कृष्ण लाल जैन की हालत बिगड़ती गई। 7 अगस्त को उन्होंने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। सुनील को इसकी जानकारी दी गई। यह सुनते ही ऐसा लगा मानो सब कुछ लुट गया हो। सुनील ने अपने पिता के अंतिम दर्शन के लिए प्रशासन से अनुरोध किया, लेकिन प्रशासन ने स्वीकार नहीं किया। सुनील के मोहाली में रह रहे बड़े भाई ने पिता का अंतिम संस्कार किया। उन्हें भी अंतिम क्षणों में पिता का चेहरा तक देखने को नहीं मिला। उन्हें पिता की पैक की गई बॉडी देकर कहा गया कि अंतिम संस्कार कर दीजिए।


इस जंग का मिलकर करना होगा मुकाबला
सुनील का कहना है कि कोरोना पॉजिटिव लोगों के ठीक हो जाने के बाद आसपास़ के लोग और समाज उनसे दूरी बना ले रहा है। यह बिल्कुल ही गलत है। बीमारी से बचाव के लिए मानकों का पालन किया जाना चाहिए न कि ठीक हो चुके मरीजों से दूरी बनानी चाहिए। सुनील के लिए इस बीमारी से लड़ने में रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बनाने में अपनों से मिला प्यार और सहयोग ही सबसे बड़ी ताकत बनकर सामने आ रहा है। यह बात सबको समझना होगी।
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