{"_id":"59a50dbc4f1c1baf018b4633","slug":"verdict-on-self-styled-rampal-satlok-ashram-onwner-profile-and-life","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"रामपालः बिजली बोर्ड के जेई से बने 'सतलोक' के करोड़पति 'संत'","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
रामपालः बिजली बोर्ड के जेई से बने 'सतलोक' के करोड़पति 'संत'
ब्यूरो/अमर उजाला, हिसार(हरियाणा)
Updated Tue, 29 Aug 2017 07:29 PM IST
विज्ञापन
संत रामपाल
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बहुचर्चित रामपाल कभी हरियाणा बिजली बोर्ड में जेई थे, उसके बाद वह सतलोक आश्रम के 'संत' बने। सोनीपत जिले के धनाना गांव में 8 सितंबर, 1951 को भगत नंदराम के घर में जन्मे रामपाल ने इंजीनियरिंग में डिप्लोमा कर जेई बने थे। इसी दौरान उनकी मुलाकात कबीरपंथी संत स्वामी रामदेवानंद महाराज से हुई। स्वामी रामदेवानंद से रामपाल इतने प्रभावित हुए कि शिष्य के तौर पर उनकी बताई शिक्षाओं का पालन करने लगे।
उनके शिष्य बनने के बाद रामपाल ने नौकरी से इस्तीफा दे दिया और फिर एक वक्त ऐसा भी आया जब वो इस पंथ की गद्दी पर आसीन हुए और खुद का आश्रम बना डाला, जिसमें उनके नियमित प्रवचन होने लगे। इसके बाद संत रामपाल का कद और साम्राज्य बढ़ने लगा।
1999 में खुला पहला आश्रम
इसी बीच उनकी भक्त कमला देवी ने करौंथा गांव में आश्रम के लिए जमीन दान में दी। सन् 1999 में उन्होंने करौंथा में सतलोक आश्रम की स्थापना की। शुरुआत में पहली जून, 1999 से 7 जून, 1999 तक लगातार सप्ताह भर का सत्संग शुरू किया। देखते-देखते कुछ ही वर्षों में इस आश्रम ने भव्य रूप ले लिया और यह कई एकड़ में फैल गया।
विज्ञापन
इतना ही नहीं, हिसार जिला के बरवाला के अलावा अन्य राज्यों में भी उन्होंने अपने आश्रम बना डाले। शुरुआत के कुछ वर्षों में तो सब सामान्य चला किंतु धीरे-धीरे करौंथा व साथ लगते गांवों के लोगों खासकर आर्यसमाजियों ने रामपाल द्वारा किए जा रहे प्रचार पर आपत्ति जतानी शुरू कर दी।
विज्ञापन
उनके शिष्य बनने के बाद रामपाल ने नौकरी से इस्तीफा दे दिया और फिर एक वक्त ऐसा भी आया जब वो इस पंथ की गद्दी पर आसीन हुए और खुद का आश्रम बना डाला, जिसमें उनके नियमित प्रवचन होने लगे। इसके बाद संत रामपाल का कद और साम्राज्य बढ़ने लगा।
विज्ञापन
1999 में खुला पहला आश्रम
इसी बीच उनकी भक्त कमला देवी ने करौंथा गांव में आश्रम के लिए जमीन दान में दी। सन् 1999 में उन्होंने करौंथा में सतलोक आश्रम की स्थापना की। शुरुआत में पहली जून, 1999 से 7 जून, 1999 तक लगातार सप्ताह भर का सत्संग शुरू किया। देखते-देखते कुछ ही वर्षों में इस आश्रम ने भव्य रूप ले लिया और यह कई एकड़ में फैल गया।
विज्ञापन
इतना ही नहीं, हिसार जिला के बरवाला के अलावा अन्य राज्यों में भी उन्होंने अपने आश्रम बना डाले। शुरुआत के कुछ वर्षों में तो सब सामान्य चला किंतु धीरे-धीरे करौंथा व साथ लगते गांवों के लोगों खासकर आर्यसमाजियों ने रामपाल द्वारा किए जा रहे प्रचार पर आपत्ति जतानी शुरू कर दी।
2006 में एक किताब पर टिप्पणी से शुरू हुआ विवाद
सतलोक आश्रम के प्रमुख कथित संत रामपाल
- फोटो : File Photo
विवाद की शुरुआत उस वक्त हुई जब साल 2006 में आर्य समाज के संस्थापक स्वामी दयानंद की एक किताब पर संत रामपाल ने एक टिप्पणी की। आर्य समाज ने इस टिप्पणी का कड़ा विरोध किया। रामपाल के अनुयायियों और आर्यसमाजियों में हुए खूनी टकराव में एक व्यक्ति की मौत हो गई थी। रामपाल को 2006 में हुई उस घटना के बाद करीब 21 महीने जेल में रखा गया।
तब आश्रम के प्रवक्ता राजकपूर ने कहा था कि संत रामपाल को 21 महीने तक झूठे केस में जेल में रखा गया, लेकिन इसके बावजूद उनकी ओर से कोई प्रदर्शन नहीं किया गया। इसी मामले में जारी अदालती कार्रवाई में पेश न होने की वजह से संत रामपाल के खिलाफ अवमानना के मामले में गैर जमानती वारंट जारी हुआ। कई बार बीमारी और अन्य चीजों का बहाना बनाकर वे पेश होने से बचते रहे। आखिरकार अदालत ने उनके खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी कर दिया।
करौंथा आश्रम खाली कराने को लेकर हुई हिंसा
मामला यही नहीं है, कुछ स्थानीय लोगों और आर्य समाजी लोगों की मांग थी कि संत रामपाल करौंथा आश्रम खाली कर दें। इसे लेकर लंबी कानूनी लड़ाई चली। इसके बाद आश्रम पर कब्जे के लिए चली लंबी कानूनी जंग में संत रामपाल को तब जीत मिली, जब 2009 में हाईकोर्ट ने सतलोक आश्रम को दोबारा संत रामपाल ट्रस्ट को सौंपने का आदेश दिया। इस फैसले को राज्य सरकार और आर्यसमाज प्रतिनिधि सभा ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी।
18 फरवरी 2013 को सुप्रीम कोर्ट ने आर्य समाजियों की अपील खारिज कर दी। इससे आर्य समाजी नाराज हो गए। इसके बाद हुए प्रदर्शन में 12 मई 2013 को रोहतक के करौंथा गांव में जबरदस्त टकराव और हिंसा हुई। इस हिंसा में एक शख्स की मौत हो गई थी और पुलिस जवानों समेत 120 लोग घायल हुए थे।
तब आश्रम के प्रवक्ता राजकपूर ने कहा था कि संत रामपाल को 21 महीने तक झूठे केस में जेल में रखा गया, लेकिन इसके बावजूद उनकी ओर से कोई प्रदर्शन नहीं किया गया। इसी मामले में जारी अदालती कार्रवाई में पेश न होने की वजह से संत रामपाल के खिलाफ अवमानना के मामले में गैर जमानती वारंट जारी हुआ। कई बार बीमारी और अन्य चीजों का बहाना बनाकर वे पेश होने से बचते रहे। आखिरकार अदालत ने उनके खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी कर दिया।
करौंथा आश्रम खाली कराने को लेकर हुई हिंसा
मामला यही नहीं है, कुछ स्थानीय लोगों और आर्य समाजी लोगों की मांग थी कि संत रामपाल करौंथा आश्रम खाली कर दें। इसे लेकर लंबी कानूनी लड़ाई चली। इसके बाद आश्रम पर कब्जे के लिए चली लंबी कानूनी जंग में संत रामपाल को तब जीत मिली, जब 2009 में हाईकोर्ट ने सतलोक आश्रम को दोबारा संत रामपाल ट्रस्ट को सौंपने का आदेश दिया। इस फैसले को राज्य सरकार और आर्यसमाज प्रतिनिधि सभा ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी।
18 फरवरी 2013 को सुप्रीम कोर्ट ने आर्य समाजियों की अपील खारिज कर दी। इससे आर्य समाजी नाराज हो गए। इसके बाद हुए प्रदर्शन में 12 मई 2013 को रोहतक के करौंथा गांव में जबरदस्त टकराव और हिंसा हुई। इस हिंसा में एक शख्स की मौत हो गई थी और पुलिस जवानों समेत 120 लोग घायल हुए थे।
नवंबर 2014 में रामपाल पुलिस के हत्थे चढ़े
rampal
2014 की है। एक क्रिमिनल केस में रामपाल को 43 बार कोर्ट में हाजिर होने के लिए कहा जा चुका था लेकिन वह नहीं आया। इसके बाद उसे गिरफ्तार करने के लिए पुलिस हिसार के बरवाला वाले आश्रम पहुंची थी। वह जगह चंडीगढ़ से 200 किलोमीटर दूर है। वहां बाबा के 15,000 समर्थक मौजूद थे जिन्होंने पुलिस पर हमला कर दिया। पुलिस अंदर नहीं जा पा रही थी।
लगभग दो हफ्ते तक बड़े से गेट से बंद आश्रम के पीछे लोग छिपे रहे। फिर पुलिस ने वहां बिजली और पानी की सप्लाई काट दी। उसके बाद जब खाना खत्म होने लगा तब लोग धीरे-धीरे बाहर आने लगे। कई लोगों का तो कहना था कि उनको अंदर कैद कर लिया गया था और मानव ढाल की तरह इस्तेमाल किया गया था। पूरी घटना में 200 लोग जख्मी हुए थे। छह लोग मारे गए थे।
जिसमें पांच महिलाएं और एक बच्चा भी शामिल था। रामपाल के समर्थकों ने अंदर से पुलिस पर गोलियां, पत्थर सब चलाए थे। पेट्रोल बम और एसिड बम भी फेंके गए थे। 10 दिन चले संघर्ष के बाद 14 नवंबर 2014 की रात रामपाल गिरफ्तार कर लिया गया। उसी समय से रामपाल जेल में बंद है।
लगभग दो हफ्ते तक बड़े से गेट से बंद आश्रम के पीछे लोग छिपे रहे। फिर पुलिस ने वहां बिजली और पानी की सप्लाई काट दी। उसके बाद जब खाना खत्म होने लगा तब लोग धीरे-धीरे बाहर आने लगे। कई लोगों का तो कहना था कि उनको अंदर कैद कर लिया गया था और मानव ढाल की तरह इस्तेमाल किया गया था। पूरी घटना में 200 लोग जख्मी हुए थे। छह लोग मारे गए थे।
जिसमें पांच महिलाएं और एक बच्चा भी शामिल था। रामपाल के समर्थकों ने अंदर से पुलिस पर गोलियां, पत्थर सब चलाए थे। पेट्रोल बम और एसिड बम भी फेंके गए थे। 10 दिन चले संघर्ष के बाद 14 नवंबर 2014 की रात रामपाल गिरफ्तार कर लिया गया। उसी समय से रामपाल जेल में बंद है।
इस तरह चला घटनाक्रम
हरियाणा के हिसार के कथित संत रामपाल
- फोटो : File Photo
5 नवंबर -
रामपाल की हाईकोर्ट में पेशी थी, लेकिन रामपाल हाईकोर्ट में पेश नहीं हुए। हाई कोर्ट ने सतलोक आश्रम के श्रद्धालुओं को पंचकूला में ही रोकने के आदेश दिए थे।
6 नवंबर -
सतलोक आश्रम के संचालक रामपाल और रामकुमार ढाका के खिलाफ पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट ने गैर जमानती वारंट जारी कर सोमवार तक कोर्ट में पेश करने के निर्देश दिए। हाईकोर्ट ने डीजीपी और गृह सचिव को वारंट को लागू करवाने और दोनों को गिरफ्तार करने के सख्त निर्देश दिए थे। हालांकि रामपाल का मेडिकल सर्टिफिकेट जारी करने वाले डॉ. हुड्डा अदालत में पेश हुए और उन्होंने रामपाल के अस्वस्थ होने की बात कही।
7 नवंबर
रामपाल के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी होने के बाद उनके बरवाला के पास स्थित सतलोक आश्रम में अनुयायी जुटने शुरू हो गए। इस दिन करीब आठ हजार अनुयायी आश्रम में पहुंचे। इसी दिन से आश्रम में तीन दिवसीय सत्संग शुरू हुआ। वहीं डीसी और एसपी इसी दिन चंडीगढ़ पहुंचे।
8 नवंबर -
हाईकोर्ट के आदेश के बाद हिसार में अर्धसैनिक बल तैनात हो गया। पुलिस की ओर से 10 अर्धसैनिक बलों की टुकड़ियों के साथ विभिन्न जिलों से 35 कंपनियां हिसार बुलाई गईं। 10 पर्यवेक्षक नियुक्त किए गए। पुलिस ने बरवाला को चारों तरफ से नाकेबंदी कर सील कर दिया। उधर, इस दिन आश्रम में करीब 25000 अनुयायी इकट्ठा हो गए।
13 नवंबर
इस दिन रामपाल के अनुयायियों ने चेतावनी दी कि अगर उनके हक में फैसला नहीं आया तो 17 नवंबर को दिल्ली घेरेंगे और राष्ट्रपति आवास पहुंचकर न्याय दो या मौत दो का नारा बुलंद करेंगे। वहीं आश्रम कमेटी की ओर से सुप्रीम कोर्ट का भी दरवाजा खटखटाया गया। वहीं मामले से संबंधित रणनीति बनाने के लिए डीजीपी एसएन वशिष्ठ भी हिसार पहुंचे और पुलिस कर्मियों की बैठक ली। प्रशासन ने अस्पताल, अग्निशमन, रोडवेज विभागों को साथ लेकर संत रामपाल पर शिकंजा कसने के लिए तैयारियों को मुस्तैद किया गया।
14 नवंबर
सतलोक आश्रम के बाहर टकराव के आसार बढ़ गए। प्रशासन की ओर से आश्रम की बिजली-पानी काट दिया गया। रोडवेज की बसें, एंबुलेंस और जेसीबी मंगवाई गईं। साथ ही इस ओर के सभी रूट डायवर्ट कर दिए गए। पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों ने आश्रम का हवाई सर्वे भी किया। दिल्ली से पैरामिलिट्री फोर्स भी मंगवाई गई। वहीं आश्रम के बाहर बैठे अनुयायियों ने किसी भी हालत में रामपाल को गिरफ्तार न होने देने का ऐलान किया। लेकिन देर रात आश्रम में घुसकर उसे गिरफ्तार कर लिया गया।
रामपाल की हाईकोर्ट में पेशी थी, लेकिन रामपाल हाईकोर्ट में पेश नहीं हुए। हाई कोर्ट ने सतलोक आश्रम के श्रद्धालुओं को पंचकूला में ही रोकने के आदेश दिए थे।
6 नवंबर -
सतलोक आश्रम के संचालक रामपाल और रामकुमार ढाका के खिलाफ पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट ने गैर जमानती वारंट जारी कर सोमवार तक कोर्ट में पेश करने के निर्देश दिए। हाईकोर्ट ने डीजीपी और गृह सचिव को वारंट को लागू करवाने और दोनों को गिरफ्तार करने के सख्त निर्देश दिए थे। हालांकि रामपाल का मेडिकल सर्टिफिकेट जारी करने वाले डॉ. हुड्डा अदालत में पेश हुए और उन्होंने रामपाल के अस्वस्थ होने की बात कही।
7 नवंबर
रामपाल के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी होने के बाद उनके बरवाला के पास स्थित सतलोक आश्रम में अनुयायी जुटने शुरू हो गए। इस दिन करीब आठ हजार अनुयायी आश्रम में पहुंचे। इसी दिन से आश्रम में तीन दिवसीय सत्संग शुरू हुआ। वहीं डीसी और एसपी इसी दिन चंडीगढ़ पहुंचे।
8 नवंबर -
हाईकोर्ट के आदेश के बाद हिसार में अर्धसैनिक बल तैनात हो गया। पुलिस की ओर से 10 अर्धसैनिक बलों की टुकड़ियों के साथ विभिन्न जिलों से 35 कंपनियां हिसार बुलाई गईं। 10 पर्यवेक्षक नियुक्त किए गए। पुलिस ने बरवाला को चारों तरफ से नाकेबंदी कर सील कर दिया। उधर, इस दिन आश्रम में करीब 25000 अनुयायी इकट्ठा हो गए।
13 नवंबर
इस दिन रामपाल के अनुयायियों ने चेतावनी दी कि अगर उनके हक में फैसला नहीं आया तो 17 नवंबर को दिल्ली घेरेंगे और राष्ट्रपति आवास पहुंचकर न्याय दो या मौत दो का नारा बुलंद करेंगे। वहीं आश्रम कमेटी की ओर से सुप्रीम कोर्ट का भी दरवाजा खटखटाया गया। वहीं मामले से संबंधित रणनीति बनाने के लिए डीजीपी एसएन वशिष्ठ भी हिसार पहुंचे और पुलिस कर्मियों की बैठक ली। प्रशासन ने अस्पताल, अग्निशमन, रोडवेज विभागों को साथ लेकर संत रामपाल पर शिकंजा कसने के लिए तैयारियों को मुस्तैद किया गया।
14 नवंबर
सतलोक आश्रम के बाहर टकराव के आसार बढ़ गए। प्रशासन की ओर से आश्रम की बिजली-पानी काट दिया गया। रोडवेज की बसें, एंबुलेंस और जेसीबी मंगवाई गईं। साथ ही इस ओर के सभी रूट डायवर्ट कर दिए गए। पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों ने आश्रम का हवाई सर्वे भी किया। दिल्ली से पैरामिलिट्री फोर्स भी मंगवाई गई। वहीं आश्रम के बाहर बैठे अनुयायियों ने किसी भी हालत में रामपाल को गिरफ्तार न होने देने का ऐलान किया। लेकिन देर रात आश्रम में घुसकर उसे गिरफ्तार कर लिया गया।