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बेहतरीन परिचर्चा के साथ पंचकूला लिट्रेरी फेस्ट का समापन
ब्यूरो/अमर उजाला, पंचकूला
Updated Sun, 07 Feb 2016 08:39 PM IST
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साहित्य से लेकर कविता तक, तकनीक के नए रूझानों से लेकर युवाओं में कलात्मक रूचि को प्रोत्साहित करने के साथ ही पंचकूला लिट्रेरी फेस्ट का रविवार को समापन हो गया। दो दिन तक चले इस फेस्ट में देशभर से साहित्य जगत की जानी-मानी हस्तियों ने शिरकत की और कई विषयों पर परिचर्चा की।
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दूसरे दिन के दो सत्र पंजाब पर केंद्रित रहे। जिनमें से एक का शीर्षक ‘पंजाब का समसायिक इतिहास कैसे तलाश रहा अपने रास्ते’ रहा। इस दौरान अमनदीप संधू, नील कमल पुरी और खुशवंत सिंह जैसे जाने माने लेखकों ने पंजाब में वर्तमान दौर के राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक मामलों में अपने लेखन के बारे में बताया।
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वहीं पंजाबी सिनेमा पर केन्द्रित ‘पुलिंग द प्लग ऑन पंजाबी सिनेमा’ नाम से आयोजित सत्र में सविता भट्टी, हरीश वर्मा, इंद्रजीत निक्कू, अमरदीप गिल और गुरिंदर डिम्पी शामिल हुए। इस मौके पर इंद्रजीत निक्कू ने दर्शकों की फरमाइश पर आने वाले गीत साह्नू ओ नार पंसद नी, मैं जिन्ना दूर होई जावा और हरीश वर्मा ने मैं मंगदी खैर चन्ना टूटदे तारे तों आदि गाने गाकर सत्र में मौजूद लोगों का दिल जीत लिया।
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फेस्ट के दूसरे दिन दो किताबों का भी विमोचन हुआ। वहीं पंचकूला लिट्रेरी फेस्ट की चेयरमैन कृत सेराई ने कहा कि हमारा प्रयास पंचकूला शहर को साहित्यक नक्शे पर लाने का है। वहीं रूयूमर बुक्स इंडिया की सीईओ राधिका सेराई ने कहा कि अपनी तरह का ये पहल प्रयास था कि कला और कारोबार को एक साहित्यक उत्सव में शामिल किया गया हो।
भट्टी साहब के जिक्र पर भावुक हुईं सविता
मम्मी ओत्थे जा के रोण ना लग पयो, यह शब्द सविता भट्टी को उनके बच्चों ने सत्र में आने से पहले कहे थे। पंजाबी सिनेमा पर केंद्रित ‘पुलिंग द प्लग ऑन पंजाबी सिनेमा’ सत्र में जसपाल भट्टी का नाम आने पर सत्र में मौजूद सविता भट्टी भावुक हो गईं। उन्होंने कहा कि इसमें कोई दोराय नहीं कि पंजाबी सिनेमा को लेकर उनका विजन बेहद साफ था।
नए एक्सपेरीमेंट से कतराना गलत- वर्मा
सत्र में बोलते हुए पंजाबी एक्टर हरीश वर्मा कहा कि पॉलीवुड में अब भी निर्देशक नए एक्सपेरीमेंट करने से डरते हैं और बेहद सुरक्षित रहकर फिल्में बना रहे हैं। उन्होंने कहा कि जब तक फिल्ममेकर्स सीरियस नहीं होंगे और नए एक्सपेरीमेंट नहीं करेंगे, तब तक पंजाबी सिनेमा संघर्ष करता रहेगा। विजन क्लियर होने के साथ साथ सही स्टैप लेने पर ही पंजाबी सिनेमा आगे बढ़ेगा।
गलत गाने गाना हमारा कल्चर नहीं- निक्कू
सत्र में हिस्सा लेने पहुंचे पंजाबी सिंगर इंद्रजीत निक्कू ने कहा कि गलत गाने गाना हमारा कल्चर नहीं है, ये भी जरूरी है कि दर्शक अच्छी चीजों को ही सराहें। उन्होंने कहा कि आजकल पॉलीवुड में अलग ही माहौल है, क्योंकि प्रोड्यूसर के मनमुताबिक ही गाने बनकर सामने आ रहे हैं।
इंद्रजीत निक्कू ने कहा कि उन्होंने सोच कर बेहद कम गाने लिखे और गाये। जो बातें मन में आई, उन्हीं शब्दों को अपनी आवाज के जरिए दर्शकों तक पहुंचाया। उन्होंने कहा कि वे अपने विचारों को ही गीतों के जरिए समाज के लिए गाने का प्रयास कर रहे हैं।