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Chandigarh News: नालों के पानी से उगी सब्जियों में जहर, सेहत पर मंडरा रहा खतरा

Tue, 30 Dec 2025 02:08 AM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Tue, 30 Dec 2025 02:08 AM IST
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Vegetables grown using drain water are poisonous, posing a health risk.
चंडीगढ़। नालों और सीवर के गंदे पानी से हो रही खेती सेहत के लिए गंभीर खतरा बनती जा रही है। पंजाब विश्वविद्यालय (पीयू) के पर्यावरण अध्ययन विभाग के एक शोध में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। शोध के मुताबिक चंडीगढ़ और आसपास के उप-शहरी इलाकों में अपशिष्ट जल से सिंचित खेतों में उगाई जा रही सब्जियों में सीसा, पारा, कैडमियम, आर्सेनिक और क्रोमियम जैसी धातु मिली है।
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यह शोध विभाग के चेयरपर्सन प्रो. आनंद नारायण सिंह के मार्गदर्शन में किया गया। इसके लिए साल 2018-2020 के बीच 221 किसानों से सेक्टर-26, सेक्टर-43 और राम दरबार की सब्जी मंडियों से पालक, धनिया और मूली के नमूने एकत्र किए गए। जांच में पाया गया कि कई नमूनों में सीसा और पारे की मात्रा तय सुरक्षित सीमा से अधिक थी। विशेष रूप से मूली में सीसे का अवशोषण अधिक पाया गया जबकि पालक और धनिया में पारे की मात्रा ज्यादा दर्ज की गई।
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शोध में यह भी सामने आया कि चंडीगढ़ के आसपास के क्षेत्रों में करीब 37.1 प्रतिशत किसान पूरे वर्ष केवल अपशिष्ट जल से सिंचाई करते हैं, जबकि 5.9 प्रतिशत किसान कभी-कभार नालों के पानी का इस्तेमाल करते हैं। किसानों ने इसकी वजह पानी की आसान उपलब्धता, कम लागत और उसमें मौजूद पोषक तत्वों को बताया।
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ये इलाके ज्यादा प्रभावित
शोध में मनीमाजरा, मौली, धनास और नागला गांवों को शामिल किया गया। मनीमाजरा, मौली और नागला के क्षेत्रों में मिट्टी और फसलों में भारी धातुओं का स्तर अपेक्षाकृत अधिक पाया गया। इसके पीछे औद्योगिक गतिविधियों की नजदीकी और लंबे समय से अपशिष्ट जल के इस्तेमाल को मुख्य कारण बताया गया। धनास क्षेत्र की स्थिति तुलनात्मक रूप से बेहतर रही।

सेहत पर धीरे-धीरे खतरा
प्रो. आनंद के अनुसार सब्जियों के माध्यम से भारी धातुएं धीरे-धीरे मानव शरीर में जमा होती हैं। हालांकि, दैनिक सेवन के आधार पर तत्काल गंभीर खतरा सामने नहीं आया लेकिन कुछ इलाकों में मूली और धनिया के लिए हैजर्ड इंडेक्स एक के आसपास या उससे अधिक दर्ज हुआ, जो भविष्य में गैर-कैंसर जैसे स्वास्थ्य जोखिम का संकेत है। शोधकर्ताओं ने चेताया है कि अपशिष्ट जल से सिंचाई जहां पैदावार बढ़ा रही है, वहीं यह खाद्य शृंखला में जहर घोलने का काम भी कर रही है। समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले वर्षों में यह एक बड़े सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट का रूप ले सकता है।
चौंकाने वाले आंकड़े
37.1% किसान पूरे साल नालों के पानी से खेती कर रहे
5.9% किसान कभी-कभार अपशिष्ट जल का उपयोग करते हैं
सेक्टर-26, सेक्टर-43 और राम दरबार सब्जी मंडी से दो वर्षों (2018-2020) तक नमूने लिए गए
मूली में सीसा, पालक और धनिया में पारा अधिक पाया गया
शोधकर्ताओं की सिफारिश
अपशिष्ट जल के उपयोग से पहले उन्नत ट्रीटमेंट अनिवार्य हो
सब्जियों और मिट्टी की नियमित जांच की जाए
किसानों को सुरक्षित फसलों के बारे में प्रशिक्षण दिया जाए
उपभोक्ताओं को जागरूक किया जाए कि सब्जी सिर्फ ताजी नहीं, सुरक्षित भी हो
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