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वीसी ने किया ‘परिशोध’ का लोकार्पण
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चंडीगढ़। पंजाब यूनिवर्सिटी के हिंदी विभाग की शोध-पत्रिका ‘परिशोध’ (अंक 64 वर्ष 2019-20) का बुधवार को कुलपति प्रो. राज कुमार की ओर से लोकार्पण किया गया। परिशोध का यह अंक भारतीय साहित्य विशेषांक के रूप में प्रकाशित किया गया है। कुलपति प्रो. राज कुमार ने भारतीय साहित्य पर विशेषांक प्रकाशित करने के लिए हिंदी विभाग के अध्यक्ष व संपादक मंडल को बधाई दी।
हिंदी विभाग के चेयरपर्सन प्रो. गुरमीत सिंह ने बताया कि परिशोध में महात्मा गांधी को समर्पित इस अंक में हिंदी के अतिरिक्त 9 भारतीय भाषाओं की कृतियों और लेखकों पर केंद्रित 30 लेख शामिल किए गए हैं। जिसमें बांग्ला और मराठी के छह-छह, पंजाबी के पांच , संस्कृत के तीन, तमिल, कन्नड़, मलयालम एवं उर्दू के दो-दो तथा तेलगु का एक आलेख शामिल है। कुलपति प्रो. राज कुमार ने कहा कि यह बहुत जरूरी है कि सभी भारतीय भाषाएं एक-साथ मिलजुल कर आगे बढ़े। प्रो. गुरमीत सिंह ने आगे बताया कि परिशोध का यह अंक एक वर्ष से भी कम समय में तैयार किया गया। इसके साथ ही बहुत जल्द ही श्री गुरु नानक के 550वें प्रकाश वर्ष के उपलक्ष्य में परिशोध का श्री गुरु नानक केंद्रित बहुभाषीय अंक भी प्रकाशित किया जाएगा। जिसमें पहली बार अंग्रेजी और पंजाबी भाषा के लेख भी शामिल किए गए हैं। लोकार्पण के अवसर पर विभागाध्यक्ष डॉ. गुरमीत सिंह, प्रो. नीरजा सूद, प्रो. सत्यपाल सहगल, प्रो. बैजनाथ प्रसाद और प्रो. अशोक कुमार, प्रेस मैनेजर जितेंद्र मोदगिल, प्रकाशन समिति के संयोजक शोधार्थी सुमित और सह-संयोजक अर्चना भी मौजूद रहीं।
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हिंदी विभाग के चेयरपर्सन प्रो. गुरमीत सिंह ने बताया कि परिशोध में महात्मा गांधी को समर्पित इस अंक में हिंदी के अतिरिक्त 9 भारतीय भाषाओं की कृतियों और लेखकों पर केंद्रित 30 लेख शामिल किए गए हैं। जिसमें बांग्ला और मराठी के छह-छह, पंजाबी के पांच , संस्कृत के तीन, तमिल, कन्नड़, मलयालम एवं उर्दू के दो-दो तथा तेलगु का एक आलेख शामिल है। कुलपति प्रो. राज कुमार ने कहा कि यह बहुत जरूरी है कि सभी भारतीय भाषाएं एक-साथ मिलजुल कर आगे बढ़े। प्रो. गुरमीत सिंह ने आगे बताया कि परिशोध का यह अंक एक वर्ष से भी कम समय में तैयार किया गया। इसके साथ ही बहुत जल्द ही श्री गुरु नानक के 550वें प्रकाश वर्ष के उपलक्ष्य में परिशोध का श्री गुरु नानक केंद्रित बहुभाषीय अंक भी प्रकाशित किया जाएगा। जिसमें पहली बार अंग्रेजी और पंजाबी भाषा के लेख भी शामिल किए गए हैं। लोकार्पण के अवसर पर विभागाध्यक्ष डॉ. गुरमीत सिंह, प्रो. नीरजा सूद, प्रो. सत्यपाल सहगल, प्रो. बैजनाथ प्रसाद और प्रो. अशोक कुमार, प्रेस मैनेजर जितेंद्र मोदगिल, प्रकाशन समिति के संयोजक शोधार्थी सुमित और सह-संयोजक अर्चना भी मौजूद रहीं।
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