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घाटी के दो सौ बाढ़ पीड़ितों को पठानकोट में मिली शरण
पठानकोट।
Updated Tue, 09 Sep 2014 10:36 PM IST
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जम्मू-कश्मीर के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों की स्थिति यह है कि वहां पानी में ताश के पत्तों की तरह मकान ढहते नजर आ रहे हैं। यहां तक कि श्रीनगर में बाढ़ से व्यापक तबाही हुई है। यह कहना है कि मंगलवार को विशेष विमान से यहां पहुंचे जम्मू-कश्मीर के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों से आए लोगों का। उनके चेहरे पर बाढ़ से हुई तबाही का गम साफ नजर आया। घाटी के करीब 200 बाढ़ पीड़ितों को पठानकोट में शरण मिली है। उन्होंने यहां पहुंचकर कर आपबीती सुनाई तो सुनने वालों के रोंगटे खड़े हो गए। हालांकि जान बचाने के लिए उन्होंने भारत सरकार व आर्मी के प्रयासों की सराहना की।
झेलम में उफान और बादल फटने से मचा हाहाकार
होशियारपुर निवासी बिट्टू सिंह ने बताया कि वह अल्चीबाग में काम करता था। दो सितंबर को वर्षा शुरू हुई। दो तीन दिन तक लगातार वर्षा होती रही, जिस कारण झेलन नदी का जल स्तर बढ़ गया। बाढ़ का पानी शहरों में घुस गया। इस कारण क्षेत्र में तबाही हुई। तराल में बादल फटने से भी कई इलाकों में भारी नुकसान हुआ। आपदा में भारी संख्या में लोगों ने अपनी जानें गवाईं है, जबकि कई लोग लापता हैं। उन्होंने कहा कि वह स्वंय 4 दिनों तक घरों की छतों पर भूखे प्यासे फंसे रहे।
सेना मदद न करती तो नहीं बचती जान
पठानकोट एयरपोर्ट पर उतरे नरोट जैमल सिंह ने बताया कि वह अल्चीबाग में 15-16 सालों से लकड़ी का काम कर रहे हैं। श्रीनगर में बाढ़ आई, तो वह भी अपने साथियों के साथ गुरुद्वारा शहीद बुंगा साहिब की छत पर भूखे प्यासे फंसे रहे। हमारे सामने कई मकान पानी में ताश के पत्तों की तरह ढहते नजर आए। अल्चीबाग में लकड़ी का काम करने वाले जगीर सिंह ने नम आंखों से कहा कि यदि हमारी सरकार व आर्मी हमारी मदद नहीं करती, तो शायद आज हम जीवित न बच पाते।
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कई दिनों तक रहे भूखे
बाढ़ पीड़ित शीतल रानी ने बताया कि वह अपने परिवार के साथ भूखे प्यासे गुरुद्वारे की छत पर बैठे थे। उन्होंने कहा कि करीब दो दिन से भूखे प्यासे पल-पल मौत की आहट को महसूस करते रहे। उनके बच्चे तो इस तबाही को देखकर बुरी तरह से डर गए हैं। आर्मी के जवान अपनी जान की परवाह किए बिना लोगों को बचाने में जुटे हैं। हमारे लिए भी वह देवदूत साबित हुए।
अपनों से बिछड़ने का गम
कश्मीर के निवासी आतिफ ने बताया कि वह चंडीगढ़ में पढ़ता है, लेकिन उसका पूरा परिवार कश्मीर में रहता है। जब उन्होंने टीवी में कश्मीर में आई भयंकर बाढ़ के बारे में सुना, तो वह तुरंत अपने परिवार का हाल जानने के लिए कश्मीर के लिए रवाना हुए, लेकिन एयरपोर्ट पर उन्हें रोक लिया गया। उनके परिवार का अभी तक कुछ अता-पता नहीं है। एयरपोर्ट ऊंचाई पर होने के कारण लोगों को बचा कर वहां लाया जा रहा है। जिस कारण एयरपोर्ट पर करीब 2-3 हजार लोग जमा हो चुके हैं।
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झेलम में उफान और बादल फटने से मचा हाहाकार
होशियारपुर निवासी बिट्टू सिंह ने बताया कि वह अल्चीबाग में काम करता था। दो सितंबर को वर्षा शुरू हुई। दो तीन दिन तक लगातार वर्षा होती रही, जिस कारण झेलन नदी का जल स्तर बढ़ गया। बाढ़ का पानी शहरों में घुस गया। इस कारण क्षेत्र में तबाही हुई। तराल में बादल फटने से भी कई इलाकों में भारी नुकसान हुआ। आपदा में भारी संख्या में लोगों ने अपनी जानें गवाईं है, जबकि कई लोग लापता हैं। उन्होंने कहा कि वह स्वंय 4 दिनों तक घरों की छतों पर भूखे प्यासे फंसे रहे।
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सेना मदद न करती तो नहीं बचती जान
पठानकोट एयरपोर्ट पर उतरे नरोट जैमल सिंह ने बताया कि वह अल्चीबाग में 15-16 सालों से लकड़ी का काम कर रहे हैं। श्रीनगर में बाढ़ आई, तो वह भी अपने साथियों के साथ गुरुद्वारा शहीद बुंगा साहिब की छत पर भूखे प्यासे फंसे रहे। हमारे सामने कई मकान पानी में ताश के पत्तों की तरह ढहते नजर आए। अल्चीबाग में लकड़ी का काम करने वाले जगीर सिंह ने नम आंखों से कहा कि यदि हमारी सरकार व आर्मी हमारी मदद नहीं करती, तो शायद आज हम जीवित न बच पाते।
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कई दिनों तक रहे भूखे
बाढ़ पीड़ित शीतल रानी ने बताया कि वह अपने परिवार के साथ भूखे प्यासे गुरुद्वारे की छत पर बैठे थे। उन्होंने कहा कि करीब दो दिन से भूखे प्यासे पल-पल मौत की आहट को महसूस करते रहे। उनके बच्चे तो इस तबाही को देखकर बुरी तरह से डर गए हैं। आर्मी के जवान अपनी जान की परवाह किए बिना लोगों को बचाने में जुटे हैं। हमारे लिए भी वह देवदूत साबित हुए।
अपनों से बिछड़ने का गम
कश्मीर के निवासी आतिफ ने बताया कि वह चंडीगढ़ में पढ़ता है, लेकिन उसका पूरा परिवार कश्मीर में रहता है। जब उन्होंने टीवी में कश्मीर में आई भयंकर बाढ़ के बारे में सुना, तो वह तुरंत अपने परिवार का हाल जानने के लिए कश्मीर के लिए रवाना हुए, लेकिन एयरपोर्ट पर उन्हें रोक लिया गया। उनके परिवार का अभी तक कुछ अता-पता नहीं है। एयरपोर्ट ऊंचाई पर होने के कारण लोगों को बचा कर वहां लाया जा रहा है। जिस कारण एयरपोर्ट पर करीब 2-3 हजार लोग जमा हो चुके हैं।