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वाड्रा लैंड डील: गायब पन्ने ढूंढने में सरकार नाकाम

Sat, 27 Dec 2014 05:45 PM IST
प्रवीण पाण्डेय/अमर उजाला, चंडीगढ़
प्रवीण पाण्डेय/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Sat, 27 Dec 2014 05:45 PM IST
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vadra land deal: government failed to find missing page

वाड्रा लैंड डील मामले से जुड़ी फाइल से गायब हुए महत्वपूर्ण पन्ने हरियाणा सरकार नहीं ढूंढ सकी है। माना जा रहा है कि फाइल के महत्वपूर्ण दस्तावेज गुम हुए भी लंबा समय बीत चुका है। जांच के लिए कमेटी गठित होने के आठ दिन बीत जाने के बाद भी गायब पन्नों का सुराग नहीं लगा है।

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कमेटी से सरकार ने इस मामले में दस दिन में रिपोर्ट देने को कहा था। सरकार ने जिस व्यक्ति को फाइल के बारे में सूचना आरटीआई के तहत दी थी। उस व्यक्ति से भी संपर्क साधा जा चुका है, लेकिन गायब पन्ने वहां से भी हासिल नहीं हो सके।
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हरियाणा सरकार के अधिकारियों का तर्क है कि तत्कालीन मुख्यमंत्री ने इस मामले में जांच के लिए जो कमेटी गठित की थी, उन कागजों पर उस कमेटी के गठन संबंधी आदेश थे। उन आदेशों के आधार पर ही कमेटी का गठन हुआ था। उन आदेशों की अधिसूचना सरकार के पास है। कमेटी ने जो रिपोर्ट दी थी वह रिपोर्ट भी सरकार के पास पूरी है।
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जमीनी सौदे की म्यूटेशन रद्द करने के मामले में गठित जांच कमेटी की रिपोर्ट सरकार के पास जून माह तक तो सुरक्षित थी। आईएस अशोक खेमका पहले ही साफ कर चुके हैं कि फाइल से गायब दोनों पेज बहुत महत्वपूर्ण है। पूरे प्रकरण में खेमका द्वारा लिखे गएपत्र के बाद सरकार में कागजों की तलाशी को लेकर हड़कंप मचा था। उन्हीं पन्नों में तीन अफसरों की कमेटी की ओर से नोटिंग कर वाड्रा को क्लीन चिट दी गई थी।

तीन अफसरों की जांच कमेटी गठित की गई थी

vadra land deal: government failed to find missing page

इस बारे में पीके गुप्ता, मुख्य सचिव हरियाणा हमने जांच के लिए जो कमेटी बनाई है उससे दस दिन में रिपोर्ट मांगी है। अभी तक कागज नहीं मिले हैं। कमेटी की जांच जारी है।

दो वर्ष पहले चकबंदी विभाग में महानिदेशक पद पर तैनाती के दौरान अशोक खेमका ने गुड़गांव के शिकोहपुर स्थित राबर्ट वाड्रा और डीएलएफ के बीच हुए जमीन सौदे की म्यूटेशन रद्द कर दी थी। कांग्रेस सरकार के लिए यह आफत का सबब बन गया और खेमका को चार्जशीट कर दिया गया।

मामले में आईएएस अधिकारी कृष्ण मोहन की अध्यक्षता में तीन अफसरों की जांच कमेटी गठित की गई थी। कमेटी में वरिष्ठ आईएएस राजन गुप्ता और केके जालान भी शामिल थे। अफसरों की कमेटी ने सरकार को दी रिपोर्ट में वाड्रा को क्लीन चिट देते हुए खेमका की कार्रवाई पर सवालिया निशान लगाया था। इसके बाद से खेमका अपनी चार्जशीट के खिलाफ दस्तावेज एकत्र करने में जुटे हुए थे।

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