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नगर निगम को यूटी प्रशासन देगा 500 करोड़ का फंड
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चंडीगढ़। वित्तीय वर्ष 2021-22 के लिए यूटी प्रशासन नगर निगम को 500 करोड़ रुपये देगा। इसके अलावा हाल ही में नगर निगम में शामिल हुए 13 गांवों के विकास के लिए अलग से 70 करोड़ रुपये मिलने की उम्मीद है। प्रशासन ने वित्त मामलों की स्थायी संसदीय समिति की बैठक में इसकी मांग की थी। अधिकारियों का कहना है कि उन्हें उम्मीद है कि गांवों के विकास के लिए यह पैसे जरूर मिल जाएंगे।
गृह मामलों पर बनी स्थायी संसदीय समिति ने बजट सत्र के दौरान अपनी रिपोर्ट राज्यसभा में पेश कर चंडीगढ़ के गांवों की हालात पर चिंता जताई थी और गृह मंत्रालय से चंडीगढ़ को अतिरिक्त फंड जारी करने की सिफारिश की थी। रिपोर्ट में कहा गया था कि वित्तीय वर्ष 2021-22 के लिए चंडीगढ़ की तरफ से 5670.31 करोड़ रुपये का बजट मांगा गया थे लेकिन केंद्र सरकार ने 5186.12 करोड़ ही दिए। ऐसे में करीब 484.19 करोड़ के बजट पर कैंची चल गई है। समिति ने टिप्पणी की थी कि केंद्र सरकार की कटौती की वजह से चंडीगढ़ के गांवों के विकास कार्यों पर बुरा असर पड़ेगा। इसके बाद बीते दिनों कांग्रेस नेता और राज्यसभा सांसद आनंद शर्मा की अध्यक्षता वाली संसदीय समिति ने प्रशासन के अधिकारियों के साथ एक बैठक की। इसमें अधिकारियों ने गांवों के लिए अतिरिक्त फंड जारी करने की मांग की। समिति ने चंडीगढ़ को आश्वासन दिया है कि गांवों के विकास के लिए अलग से फंड जारी किया जाएगा। इस बैठक में शामिल होने के लिए चंडीगढ़ प्रशासक के सलाहकार मनोज परिदा, गृह व वित्त सचिव अरुण कुमार गुप्ता समेत अन्य अधिकारी दिल्ली गए थे।
गांवों की हालत खराब, अतिरिक्त फंड की जरूरत
नगर निगम के अंदर कुल 23 गांव हैं। इनमें से 13 गांव वर्ष 2019 में निगम में शामिल हुए थे। इन गांवों में सीवरेज, स्ट्रॉम वाटर व अन्य सुविधाएं प्रदान किए हुए 15 से 20 साल हो गए हैं। समय के साथ इन गांवों की जनसंख्या भी बढ़ गई है और समस्याएं भी। सीवरेज सिस्टम पर भार बढ़ने के साथ ही अब वह ओवरफ्लो होने शुरू हो गए हैं, जिसके चलते गलियों में सीवरेज का पानी आ जाता है। इससे लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। इस कारण गलियों व सड़कों को भी नुकसान हो रहा है। स्ट्रीट लाइट्स की हालत भी खस्ता है, इन सब के लिए ही अतिरिक्त फंड की जरूरत है। हालांकि प्रशासन के अधिकारियों का मानना है कि रिवाइज्ड एस्टीमेट में प्रशासन को कुछ राहत मिल सकती है।
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प्रशासन को चंडीगढ़ के लिए मिले 5186.12 करोड़
केंद्र सरकार से चंडीगढ़ प्रशासन को वित्तीय वर्ष 2021-22 के लिए रेवेन्यू हेड यानी वेतन, भत्ते व अन्य खर्चों के लिए 4567.67 करोड़ जबकि कैपिटल हेड यानी विकास कार्यों के लिए 618.45 करोड़ रुपये मिले हैं। कुल 5186.12 करोड़ रुपये मिले हैं। पिछली बार के बजट के मुकाबले 48.02 करोड़ ज्यादा मिले हैं, जो महज 0.93 प्रतिशत की वृद्धि है। केंद्र ने वर्ष 2021-22 के लिए कैपिटल हेड पिछली बार के मुकाबले करीब 124.31 करोड़ ज्यादा दिए हैं। प्रशासन के अधिकारियों को उम्मीद है कि इससे कोरोना की वजह से प्रभावित हुए विकास कार्यों में तेजी आएगी लेकिन केंद्र ने यूटी के रेवेन्यू हेड में पिछले वर्ष के मुकाबले 76.29 करोड़ रुपये कम कर दिए हैं।
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गृह मामलों पर बनी स्थायी संसदीय समिति ने बजट सत्र के दौरान अपनी रिपोर्ट राज्यसभा में पेश कर चंडीगढ़ के गांवों की हालात पर चिंता जताई थी और गृह मंत्रालय से चंडीगढ़ को अतिरिक्त फंड जारी करने की सिफारिश की थी। रिपोर्ट में कहा गया था कि वित्तीय वर्ष 2021-22 के लिए चंडीगढ़ की तरफ से 5670.31 करोड़ रुपये का बजट मांगा गया थे लेकिन केंद्र सरकार ने 5186.12 करोड़ ही दिए। ऐसे में करीब 484.19 करोड़ के बजट पर कैंची चल गई है। समिति ने टिप्पणी की थी कि केंद्र सरकार की कटौती की वजह से चंडीगढ़ के गांवों के विकास कार्यों पर बुरा असर पड़ेगा। इसके बाद बीते दिनों कांग्रेस नेता और राज्यसभा सांसद आनंद शर्मा की अध्यक्षता वाली संसदीय समिति ने प्रशासन के अधिकारियों के साथ एक बैठक की। इसमें अधिकारियों ने गांवों के लिए अतिरिक्त फंड जारी करने की मांग की। समिति ने चंडीगढ़ को आश्वासन दिया है कि गांवों के विकास के लिए अलग से फंड जारी किया जाएगा। इस बैठक में शामिल होने के लिए चंडीगढ़ प्रशासक के सलाहकार मनोज परिदा, गृह व वित्त सचिव अरुण कुमार गुप्ता समेत अन्य अधिकारी दिल्ली गए थे।
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गांवों की हालत खराब, अतिरिक्त फंड की जरूरत
नगर निगम के अंदर कुल 23 गांव हैं। इनमें से 13 गांव वर्ष 2019 में निगम में शामिल हुए थे। इन गांवों में सीवरेज, स्ट्रॉम वाटर व अन्य सुविधाएं प्रदान किए हुए 15 से 20 साल हो गए हैं। समय के साथ इन गांवों की जनसंख्या भी बढ़ गई है और समस्याएं भी। सीवरेज सिस्टम पर भार बढ़ने के साथ ही अब वह ओवरफ्लो होने शुरू हो गए हैं, जिसके चलते गलियों में सीवरेज का पानी आ जाता है। इससे लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। इस कारण गलियों व सड़कों को भी नुकसान हो रहा है। स्ट्रीट लाइट्स की हालत भी खस्ता है, इन सब के लिए ही अतिरिक्त फंड की जरूरत है। हालांकि प्रशासन के अधिकारियों का मानना है कि रिवाइज्ड एस्टीमेट में प्रशासन को कुछ राहत मिल सकती है।
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प्रशासन को चंडीगढ़ के लिए मिले 5186.12 करोड़
केंद्र सरकार से चंडीगढ़ प्रशासन को वित्तीय वर्ष 2021-22 के लिए रेवेन्यू हेड यानी वेतन, भत्ते व अन्य खर्चों के लिए 4567.67 करोड़ जबकि कैपिटल हेड यानी विकास कार्यों के लिए 618.45 करोड़ रुपये मिले हैं। कुल 5186.12 करोड़ रुपये मिले हैं। पिछली बार के बजट के मुकाबले 48.02 करोड़ ज्यादा मिले हैं, जो महज 0.93 प्रतिशत की वृद्धि है। केंद्र ने वर्ष 2021-22 के लिए कैपिटल हेड पिछली बार के मुकाबले करीब 124.31 करोड़ ज्यादा दिए हैं। प्रशासन के अधिकारियों को उम्मीद है कि इससे कोरोना की वजह से प्रभावित हुए विकास कार्यों में तेजी आएगी लेकिन केंद्र ने यूटी के रेवेन्यू हेड में पिछले वर्ष के मुकाबले 76.29 करोड़ रुपये कम कर दिए हैं।