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यूटी प्रशासन ने चंडीगढ़ इस्टेट रूल्स 2020 में किया बदलाव, अब 15 साल से पहले भी ट्रांसफर कर सकेंगे मकान
Sat, 11 Jul 2020 10:37 PM IST
पंचकुला ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: पंचकुला ब्यूरो
Updated Sat, 11 Jul 2020 10:37 PM IST
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सांकेतिक तस्वीर।
यूटी प्रशासन ने चंडीगढ़ इस्टेट (अमेंडमेंट) रूल्स 2020 में कई महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं। अब प्रशासन की ओर से अलॉट की गई विभिन्न साइट्स जिन्हें 15 साल से पहले नहीं ट्रांसफर किया जा सकता था, उन्हें अब ट्रांसफर किया जा सकेगा। इसके अलावा ट्रांसफर के दौरान लगने वाली फीस को प्रशासन ने माफ कर दिया है। इससे शहरवासियों को राहत मिली है। हालांकि, प्रशासन ने इसके लिए कुछ शर्तें तय की हैं।
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प्रशासन की तरफ से शहरभर में पहले रियायत दरों पर फ्री होल्ड साइट अलॉटमेंट की जाती थी।
इसमें मूलरूप से डिफेंस कालोनियां शामिल हैं। इस दौरान अलॉटमेंट में कंडीशन होती थी कि अलॉटियों को घर बनाना है और इसका कंप्लीशन लेना है। इसके 15 साल बाद इसे बेच सकते हैं। अगर उससे पहले अलॉटी इसे बेचकर प्रॉफिट कमाते हैं तो उसका शेयर प्रशासन को देने का प्रावधान था।
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प्रशासन के इस फैसले के बाद शहर में रियायत दर पर अलॉट की गई साइट को 15 साल के अंदर भी ट्रांसफर किया जा सकेगा। इसके अलावा ट्रांसफर केस में अब प्रॉफिट भी नहीं लिया जाएगा, जबकि पहले प्रशासन की ओर से प्रॉफिट लेने का प्रावधान था। हालांकि, इसमें संबंधित साइट, बिल्डिंग का पूरा अमाउंट व ड्यूज क्लीयर करना अनिवार्य होगा।
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प्रशासन के पास आया था केस, जिसके बाद लिया गया फैसला
प्रशासन के पास ट्रांसफर के लिए एक केस आया था, जिसमें प्रशासन की तरफ से प्रॉफिट की डिमांड की गई थी, जिसके बाद ही अलॉटी पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट चला गया था। हाईकोर्ट ने साल 2015 में आदेश दिए थे कि प्रशासन को ये रुल्स संशोधन करना चाहिए, क्योंकि जब साइट बिल्डिंग को लेकर पूरी पेमेंट, किस्तें आ जाती हैं तो प्रशासन का प्रॉपर्टी पर बैन का कोई अधिकार नहीं है। इसके बाद प्रशासन ने इस बैन को हटाने का फैसला लिया है। इसमें एक बार पूरी पेमेंट और ड्यूज क्लीयर हो गए तो अलॉटी बिना कोई प्रॉफिट शेयर दिए कभी भी संबंधित प्रॉपर्टी को बेच सकते हैं।