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Chandigarh News: हरविंदर सिंह को उस्ताद बिस्मिल्लाह खां युवा पुरस्कार
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चंडीगढ़। संगीत नाटक अकादमी नई दिल्ली की ओर से शुक्रवार को वर्ष 2022-2023 के लिए देशभर के 82 कलाकारों को बिस्मिल्लाह खां युवा पुरस्कार दिया गया। इनमें अभिनय के क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए चंडीगढ़ से हरविंदर सिंह को उस्ताद बिस्मिल्लाह खां पुरस्कार मिला।
सेक्टर-41 स्थित बुटेरला गांव के रहने वाले हरविंदर सिंह ने कहा कि यह पुरस्कार मिलना मेरे लिए भावुक करने के साथ गौरवपूर्ण दिन है। उन्होंने कहा कि यह सब 25 वर्षों की तपस्या, परिवार व गुरुजनों के आशीर्वाद से सफल हुआ। हरविंदर सिंह को वर्ष 2022-23 के लिए संगीत नाटक अकादमी की ओर से उस्ताद बिस्मिल्लाह खां युवा पुरस्कार के लिए अभिनय श्रेणी के लिए मिला है। 40 से भी अधिक स्टेज प्ले और ढेरों नुक्कड़ नाटक हरविंदर ने किए हैं। हरविंदर सिंह रंगमंच के साथ-साथ सीसीईटी सेक्टर-26 में फीडर कम मैकेनिक के पद पर कार्यरत हैं।
हरविंदर ने बताया कि नाटक केवल मनोरंजन के लिए नहीं होते। उनमें कुछ ऐसी बातें होती हैं, जो आपको जीवन जीने की कला सिखाती हैं। बलवंत गार्गी की ओर से लिखित नाटक लोहा कुट्ट के एक संवाद का जिक्र करते हुए हरविंदर सिंह कहते हैं कि तुसी जो करदे हो ओदे मुताबिक ढलना पैंदा ए, ते मेरे काम ने हीं मैनू सांभ रखया है। उनका कहना है कि संयोगवश शुरुआती जीवन में ही लोहा कुट्ट नाटक में काम करने का अवसर मिला। इस नाटक के अर्थ हमेशा रिहर्सल करते हुए मुझे अब तक समझ में आते हैं। हरविंदर सिंह की शिक्षा चंडीगढ़ में हुई। उनको बचपन से ही अभिनय का शौक था। उन्होंने छठी कक्षा से ही भंगड़ा, कीमा मालिकी, वंगा दा वंजारा आदि सांस्कृतिक गतिविधियों में भाग लिया। उन्होंने बताया कि उनकी पूरे तौर पर रंगमंच की शुरुआत वर्ष 2001 में सुदेश शर्मा के निर्देशन में नाटक धमक नगाड़े से हुई।
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सुदेश शर्मा के सानिध्य में रहकर उन्होंने रंगमंच की बारीकियों के साथ-साथ जीवन जीने की बारीकियां भी सीखीं। उनके निर्देशन में धमक नगाड़े दी, कोर्ट मार्शल, चेहरे, आधी रात के बाहर, एक मामूली आदमी, वीर राजा नाहर सिंह, चांदनी चौक से लेकर सरहंद, विवेकानन्द मुक्तधारा, गाथा आनंदपुर साहिब दी, कल तारण गुरु नानक आया, हिंद दी चादर, संध्या छाया, शहीद उधम सिंह आजाद, बलदे टिब्बे आदि कई नाटक किए। हरविंदर सिंह ने निर्मल वर्मा का एकल नाटक ''''''''''''''''डेढ़ इंच ऊपर'''''''''''''''' में अभिनय किया और उन्होंने इस नाटक का पंजाबी में रूपांतरण किया। इस नाटक के माध्यम से उन्होंने लेखन की बारीकियों के बारे में भी सीखा। इसका मंचन भारत के विभिन्न राज्यों में हुआ।
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सेक्टर-41 स्थित बुटेरला गांव के रहने वाले हरविंदर सिंह ने कहा कि यह पुरस्कार मिलना मेरे लिए भावुक करने के साथ गौरवपूर्ण दिन है। उन्होंने कहा कि यह सब 25 वर्षों की तपस्या, परिवार व गुरुजनों के आशीर्वाद से सफल हुआ। हरविंदर सिंह को वर्ष 2022-23 के लिए संगीत नाटक अकादमी की ओर से उस्ताद बिस्मिल्लाह खां युवा पुरस्कार के लिए अभिनय श्रेणी के लिए मिला है। 40 से भी अधिक स्टेज प्ले और ढेरों नुक्कड़ नाटक हरविंदर ने किए हैं। हरविंदर सिंह रंगमंच के साथ-साथ सीसीईटी सेक्टर-26 में फीडर कम मैकेनिक के पद पर कार्यरत हैं।
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हरविंदर ने बताया कि नाटक केवल मनोरंजन के लिए नहीं होते। उनमें कुछ ऐसी बातें होती हैं, जो आपको जीवन जीने की कला सिखाती हैं। बलवंत गार्गी की ओर से लिखित नाटक लोहा कुट्ट के एक संवाद का जिक्र करते हुए हरविंदर सिंह कहते हैं कि तुसी जो करदे हो ओदे मुताबिक ढलना पैंदा ए, ते मेरे काम ने हीं मैनू सांभ रखया है। उनका कहना है कि संयोगवश शुरुआती जीवन में ही लोहा कुट्ट नाटक में काम करने का अवसर मिला। इस नाटक के अर्थ हमेशा रिहर्सल करते हुए मुझे अब तक समझ में आते हैं। हरविंदर सिंह की शिक्षा चंडीगढ़ में हुई। उनको बचपन से ही अभिनय का शौक था। उन्होंने छठी कक्षा से ही भंगड़ा, कीमा मालिकी, वंगा दा वंजारा आदि सांस्कृतिक गतिविधियों में भाग लिया। उन्होंने बताया कि उनकी पूरे तौर पर रंगमंच की शुरुआत वर्ष 2001 में सुदेश शर्मा के निर्देशन में नाटक धमक नगाड़े से हुई।
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सुदेश शर्मा के सानिध्य में रहकर उन्होंने रंगमंच की बारीकियों के साथ-साथ जीवन जीने की बारीकियां भी सीखीं। उनके निर्देशन में धमक नगाड़े दी, कोर्ट मार्शल, चेहरे, आधी रात के बाहर, एक मामूली आदमी, वीर राजा नाहर सिंह, चांदनी चौक से लेकर सरहंद, विवेकानन्द मुक्तधारा, गाथा आनंदपुर साहिब दी, कल तारण गुरु नानक आया, हिंद दी चादर, संध्या छाया, शहीद उधम सिंह आजाद, बलदे टिब्बे आदि कई नाटक किए। हरविंदर सिंह ने निर्मल वर्मा का एकल नाटक ''''''''''''''''डेढ़ इंच ऊपर'''''''''''''''' में अभिनय किया और उन्होंने इस नाटक का पंजाबी में रूपांतरण किया। इस नाटक के माध्यम से उन्होंने लेखन की बारीकियों के बारे में भी सीखा। इसका मंचन भारत के विभिन्न राज्यों में हुआ।