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मुशायरे से पहले जुदा हो गए दोस्त निदा फाजली: शम्स

Tue, 09 Feb 2016 11:18 AM IST
अरविंद बाजपेयी/अमर उजाला, पंचकूला।
अरविंद बाजपेयी/अमर उजाला, पंचकूला। Updated Tue, 09 Feb 2016 11:18 AM IST
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urdu poet nida fazli memories

तुम्हारी कब्र में मैं दफन तुम मुझमें जिंदा हो, कभी फुरसत मिले तो फातेहा पढ़ने चले आना। अपने अब्बा के इंतकाल पर लिखी निदा फाजली की ये नज्म जितनी सीधी, सपाट और गहरी है उतनी ही गहराई थी निदा फाजली की जिंदगी में। अपने दोस्तों के बीच रहते तो लतीफों और चुटकुलों से सभी को हंसाते रहते थे।

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हरियाणा साहित्य अकादमी के समारोह हों या कवि सम्मेलन। निदा फाजली जहां भी जाते थे, सभी को दीवाना बना लेते थे। यह कहना है निदा फाजली के बेहद करीब रहने वाले हरियाणा उर्दू अकादमी के संपादक शम्स तबरेजी का।
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उन्होंने बताया कि निदा फाजली से बीते शनिवार को उनकी फोन पर बातचीत हुई थी। यह बातचीत चंडीगढ़ में 26 फरवरी को होने वाले मुशायरे को लेकर थी। इसके लिए उन्हें आमंत्रित करना था।
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निदा फाजली से उन्होंने पूछा कि जनाब टिकट करवाया क्या। तो वह बोले, मैं आ जाऊंगा। दुखी मन से शम्स तबरेजी ने कहा कि उस समय क्या मालूम था कि वह इतनी जल्दी हमसे जुदा हो जाएंगे।

शम्स तबरेजी ने कहा कि निदा फाजली अक्सर चंडीगढ़ आते रहते थे। कुछ समय पहले भोपाल में हुए एक मुशायरे के दौरान उनकी मुलाकात हुई तो मजाकिया अंदाज में बोले यहां शायरों की लिस्ट लंबी है, कुछ कम करवाओ भई। वह अक्सर ऐसे मजाक करते रहते थे। वास्तव में वह एक खुशमिजाज इंसान थे। उर्दू ही नहीं, उन्हें हर भाषा का ज्ञान था।

जिस शहर में वह जाते थे, उसके बारे में पहले ही सारी जानकारी जुटा लेते थे। उनकी लिखी किताब ‘गांव से शहर तक’ निदा फाजली की शायरी और उनकी जिंदगी की पूरी कहानी बयां करती है। शम्स ने बताया कि निदा फाजली ने उनकी किताब ‘कलाम ए शम्स’ पर टिप्पणी करते हुए लिखा कि शम्स यह अलग है, जिसमें तीखापन है, जो हमेशा याद रहेगा।


उर्दू के बेजोड़ शायर थे : माधव
निदा फाजली के निधन पर साहित्यकार माधव कौशिक ने कहा कि उर्दू के वह बेजोड़ शायर थे। निदा फाजली ने दोहों का दौर एक बार फिर लाया जो लगभग गायब हो चुका था। माधव कौशिक ने कहा कि जब वह राष्ट्रीय अकादमी के संयोजक थे तो उस दौरान अक्सर निदा फाजली साहब से मुलाकात होती रहती थी। उनके जैसा साहित्यकार और शायर अब नहीं होगा। हरियाणा साहित्य अकादमी के साहित्यकारों ने निदा फाजली के निधन को साहित्य जगत की गहरी क्षति बताया।

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