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डीएसडब्ल्यू के नाम को लेकर सिंडिकेट में हंगामा, प्रो. देवेंद्र सिंह के नाम पर गोयल ग्रुप की असहमति
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चंडीगढ़। लॉकडाउन के दौरान शनिवार को हुई पीयू सिंडिकेट की पहली बैठक हंगामेदार रही। प्रो. देवेंद्र सिंह को डीएसडब्ल्यू बनाए जाने को लेकर गोयल ग्रुप ने असहमति जताई। उन्होंने वीसी से कह दिया कि 27 जून तक वह किसी भी अनुभवी शिक्षक को चार्ज दे सकते हैं। 28 जून तक सिंडिकेट की बैठक न हुई तो डीयूआई को डीएसडब्ल्यू का चार्ज दे दिया जाए।
प्रो. देवेंद्र सिंह के नाम पर यही आपत्ति लगाई कि वह अनुभवी नहीं हैं। यानी वह वार्डन किसी हॉस्टल के नहीं रहे। प्रो. देवेंद्र के समर्थन में कुछ मेंबर आए लेकिन उनकी बात भी नहीं मानी गई। गोयल ग्रुप हावी रहा। इसके कारण वह मेंबर बैठक छोड़कर चले गए। वहीं दूसरी ओर महिला डीएसडब्ल्यू के लिए प्रो. सुखबीर कौर के नाम पर मुहर लगा दी गई।
डीएसडब्ल्यू का प्रकरण सिंडिकेट बैठक के सबसे आखिरी में आया। वीसी प्रो. राजकुमार ने डीएसडब्ल्यू के लिए प्रो. देवेंद्र सिंह के नाम का प्रस्ताव रखा तो गोयल ग्रुप ने विरोध किया और सहमति नहीं बन पाई। इस दौरान सिंडिकेट मेंबर राजेंद्र भंडारी ने मोर्चा संभाला। उन्होंने कहा कि मनमानी की जा रही है। एक ही पक्ष जो चाहे वह कर देता है। तानाशाहीपूर्ण रवैया अपनाया जा रहा है। वीसी चेयर का कोई ख्याल नहीं रखा जा रहा है। वह यह कहकर बैठक छोड़कर चले गए। उसके बाद मेंबर आरएस झांजी भी चले गए। उन्हें बुलाने के लिए किसी एक अधिकारी को भेजा गया, लेकिन वह नहीं लौटे। उसके बाद पता लगा कि प्रो. देवेंद्र सिंह के नाम पर सहमति नहीं बनी। उन्हें रेगुलर डीएसडब्ल्यू नहीं बनाने की बात कही।
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आखिर में तय हुआ कि वीसी 27 जून तक किसी को भी चार्ज दे सकते हैं। घंटों इस प्रकरण पर बहस चलती रही। वीसी प्रो. राजकुमार की भी बात नहीं मानी गई। सूत्रों का कहना है कि गोयल ग्रुप के दो लोगों को सुबह आठ बजे बुलाकर समझाया गया था कि इस प्रकरण पर शांति रखें, लेकिन बात नहीं बनी।
इनसेट---
वाट्सअप पर डीयूआई और डीन रिसर्च को दे दिया था चार्ज, इसको लेकर हंगामा
सिंडिकेट की बैठक जैसे ही शुरू हुई तो वीसी ने पहला एजेंडा पढ़ा। उसमें लिखा था कि डीयूआई प्रो. आरके सिंगला व डीन रिसर्च प्रो. वीरआर सिन्हा की तैनाती को सिंडिकेट मंजूरी दे। इस पर मेंबर राजेंद्र भंडारी उठ खड़े हुए। उन्होंने पूछा कि किस आधार पर और किस बैठक के जरिये उन्हें काम दिया गया। मीटिंग के पांच तरीकों के बारे में उन्हें बताया। जवाब मिला कि वाट्सएप पर बैठक कर इन दोनों अधिकारियों के नामों को मंजूरी दे दी गई। मेंबर राजेंद्र भंडारी ने इसका विरोध किया। कहा कि बिना लिखा-पढ़े यह कैसे हो सकता है। कई अन्य सवाल उठाए। इसको लेकर गोयल ग्रुप ने भी मोर्चा संभाला। लगभग सवा घंटे हंगामा चलता रहा। आखिर में वीसी ने एजेंडे में बदलाव करके इन पदों को मंजूरी दी। इसके अलावा डॉ. एसएस सांगा को दशमेश गर्ल्स कॉलेज का प्रिंसिपल बनाए जाने के प्रस्ताव पर मंजूरी नहीं दी गई। राजेंद्र भंडारी समेत तीन लोगों ने डॉ. एसएस सांगा का समर्थन किया लेकिन गोयल ग्रुप ने बात नहीं मानी। क्योंकि बहुमत उन्हीं के पास था। मालूम हो कि बैठक में 17 लोग शामिल हुए।
यह प्रस्ताव भी पास हुए
- एकेडमिक कैलेंडर में एग्जाम से लेकर नए सत्र की प्रवेश प्रक्रिया तय करने का काम वीसी पर सौंपा
- फिल्मों की शूटिंग के लिए सिक्योरिटी एक लाख रुपये होगी और हर दिन 50 हजार रुपये किराया लगेगा
- एससी एसटी के विद्यार्थी जिनके पैरेंट्स की वार्षिक आय 48 हजार से कम है, उनका रूम रेंट माफ किया गया
- लॉ विभाग के विद्यार्थियों के माइग्रेशन के लिए नियम बनेंगे
- स्पोटर्स वर्ग से दाखिला लेने के नियम बनेंगे
- वैदिक स्टडीज कोर्स के लिए फीस आदि तय होगी।
- सीनेट चुनाव में गाड़ी आदि ले जाई जा सकेंगी
- पीयू स्वास्थ्य केंद्र को लेकर भी बहस हुई, एक सीनियर डॉक्टर को सीएमओ का चार्ज दिया गया
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प्रो. देवेंद्र सिंह के नाम पर यही आपत्ति लगाई कि वह अनुभवी नहीं हैं। यानी वह वार्डन किसी हॉस्टल के नहीं रहे। प्रो. देवेंद्र के समर्थन में कुछ मेंबर आए लेकिन उनकी बात भी नहीं मानी गई। गोयल ग्रुप हावी रहा। इसके कारण वह मेंबर बैठक छोड़कर चले गए। वहीं दूसरी ओर महिला डीएसडब्ल्यू के लिए प्रो. सुखबीर कौर के नाम पर मुहर लगा दी गई।
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डीएसडब्ल्यू का प्रकरण सिंडिकेट बैठक के सबसे आखिरी में आया। वीसी प्रो. राजकुमार ने डीएसडब्ल्यू के लिए प्रो. देवेंद्र सिंह के नाम का प्रस्ताव रखा तो गोयल ग्रुप ने विरोध किया और सहमति नहीं बन पाई। इस दौरान सिंडिकेट मेंबर राजेंद्र भंडारी ने मोर्चा संभाला। उन्होंने कहा कि मनमानी की जा रही है। एक ही पक्ष जो चाहे वह कर देता है। तानाशाहीपूर्ण रवैया अपनाया जा रहा है। वीसी चेयर का कोई ख्याल नहीं रखा जा रहा है। वह यह कहकर बैठक छोड़कर चले गए। उसके बाद मेंबर आरएस झांजी भी चले गए। उन्हें बुलाने के लिए किसी एक अधिकारी को भेजा गया, लेकिन वह नहीं लौटे। उसके बाद पता लगा कि प्रो. देवेंद्र सिंह के नाम पर सहमति नहीं बनी। उन्हें रेगुलर डीएसडब्ल्यू नहीं बनाने की बात कही।
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आखिर में तय हुआ कि वीसी 27 जून तक किसी को भी चार्ज दे सकते हैं। घंटों इस प्रकरण पर बहस चलती रही। वीसी प्रो. राजकुमार की भी बात नहीं मानी गई। सूत्रों का कहना है कि गोयल ग्रुप के दो लोगों को सुबह आठ बजे बुलाकर समझाया गया था कि इस प्रकरण पर शांति रखें, लेकिन बात नहीं बनी।
इनसेट---
वाट्सअप पर डीयूआई और डीन रिसर्च को दे दिया था चार्ज, इसको लेकर हंगामा
सिंडिकेट की बैठक जैसे ही शुरू हुई तो वीसी ने पहला एजेंडा पढ़ा। उसमें लिखा था कि डीयूआई प्रो. आरके सिंगला व डीन रिसर्च प्रो. वीरआर सिन्हा की तैनाती को सिंडिकेट मंजूरी दे। इस पर मेंबर राजेंद्र भंडारी उठ खड़े हुए। उन्होंने पूछा कि किस आधार पर और किस बैठक के जरिये उन्हें काम दिया गया। मीटिंग के पांच तरीकों के बारे में उन्हें बताया। जवाब मिला कि वाट्सएप पर बैठक कर इन दोनों अधिकारियों के नामों को मंजूरी दे दी गई। मेंबर राजेंद्र भंडारी ने इसका विरोध किया। कहा कि बिना लिखा-पढ़े यह कैसे हो सकता है। कई अन्य सवाल उठाए। इसको लेकर गोयल ग्रुप ने भी मोर्चा संभाला। लगभग सवा घंटे हंगामा चलता रहा। आखिर में वीसी ने एजेंडे में बदलाव करके इन पदों को मंजूरी दी। इसके अलावा डॉ. एसएस सांगा को दशमेश गर्ल्स कॉलेज का प्रिंसिपल बनाए जाने के प्रस्ताव पर मंजूरी नहीं दी गई। राजेंद्र भंडारी समेत तीन लोगों ने डॉ. एसएस सांगा का समर्थन किया लेकिन गोयल ग्रुप ने बात नहीं मानी। क्योंकि बहुमत उन्हीं के पास था। मालूम हो कि बैठक में 17 लोग शामिल हुए।
यह प्रस्ताव भी पास हुए
- एकेडमिक कैलेंडर में एग्जाम से लेकर नए सत्र की प्रवेश प्रक्रिया तय करने का काम वीसी पर सौंपा
- फिल्मों की शूटिंग के लिए सिक्योरिटी एक लाख रुपये होगी और हर दिन 50 हजार रुपये किराया लगेगा
- एससी एसटी के विद्यार्थी जिनके पैरेंट्स की वार्षिक आय 48 हजार से कम है, उनका रूम रेंट माफ किया गया
- लॉ विभाग के विद्यार्थियों के माइग्रेशन के लिए नियम बनेंगे
- स्पोटर्स वर्ग से दाखिला लेने के नियम बनेंगे
- वैदिक स्टडीज कोर्स के लिए फीस आदि तय होगी।
- सीनेट चुनाव में गाड़ी आदि ले जाई जा सकेंगी
- पीयू स्वास्थ्य केंद्र को लेकर भी बहस हुई, एक सीनियर डॉक्टर को सीएमओ का चार्ज दिया गया