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बेमिसालः बेटी चली गई, पर मां-बाप ने अंग कराए दान, दो लोगों को मिली नई जिंदगी

Fri, 22 Sep 2017 09:08 AM IST
विशाल पाठक/अमर उजाला, चंडीगढ़
विशाल पाठक/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Fri, 22 Sep 2017 09:08 AM IST
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up parents donated 11 years old daughter tamreen organs
बच्ची के अंगदान किए गए
नम आंखें...शिथिल शरीर...बेबस लब। गम है ग्यारह साल की बेटी को खोने का और खुशी है बेटी की वजह से दो लोगों को नई जिंदगी मिलने का। तमरीन का अर्थ है मिठास और सुंदरता। छोटी सी तमरीन ने अपनी जिंदगी की मिठास दूसरों की जिंदगी में घोल दी। यही वजह है पिता युसूफ शाह कहते हैं हमारी तमरीन तो अभी जिंदा है उन दो जिंदगानियों में, जो उसकी किडनी से रोशन हो चुकी हैं।
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तमरीन के पिता यूसूफ शाह 17 सितंबर को अपनी बेटी तमरीन के साथ चंडीगढ़ आए थे। चंडीगढ़ में एक बस स्टैंड के  पास जब वे बस से उतरने लगे तो उनकी बेटी तमरीन चलती बस से गिर गई। इतने में पीछे से तेज रफ्तार में आ रही एक मिनी बस ने तमरीन को बुरी तरह रौंद डाला। तमरीन को पीजीआई में इलाज के लिए भर्ती क राया गया।
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लेकिन 19 सितंबर को तमरीन को पीजीआई के डॉक्टरों ने ब्रेन डेड घोषित कर दिया। एक मां-बाप के लिए यह बेहद ही भावुक क्षण था। फिर भी साहस, जिंदादिली और इंसानियत दिखाते हुए तमरीन के पिता यूसूफ शाह ने अपनी बेटी के अंगदान कर दो लोगों को नई जिंदगी देने का फैसला किया।
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पिता बोले- बेटी हमेशा इन दोनों लोगों में जिंदा रहेगी

up parents donated 11 years old daughter tamreen organs
बच्ची के अंगदान किए गए
तमरीन के पिता यूसूफ के जहन में बस एक ही बात चल रही थी कि मेरी बेटी से इन दो लोगों को नई जिंदगी मिल सकती है, और मेरी बेटी हमेशा इन दोनों लोगों में जिंदा रहेगी। 11 साल की तमरीन ने अपनी किडनी दान कर दो लोगों को नई जिंदगी दी। युसूफ शाह मूल रूप से उत्तर प्रदेश के संभल जिले के गांव अकरोली के निवासी।

तमरीन के पिता यूसूफ शाह ने अमर उजाला से बातचीत में बताया कि उनकी बेटी पढ़ाई-लिखाई में बहुत तेज थी। वह अपने मौसी से मिलना चाहती थी। इसी के चलते वह तमरीन के साथ चंडीगढ़ आए थे। लेकिन चंडीगढ़ पहुंचते ही तमरीन के साथ यह हादसा हो गया। यूसूफ ने बताया कि उनकी बेटी तमरीन पढ़ाई-लिखाई, खेल कूल के अलावा अपनी मां के साथ रसोई में भी हाथ बांटती थी।

तमरीन को अपनी मां के साथ खाना बनाना बहुत पसंद था। तमरीन के पिता यूसूफ ने कहा कि वह अपनी मां के साथ रसोई में खाना बनाती और अपने नन्हें-नन्हें हाथों के साथ मुझे खाना परोसती थी। यूसूफ ने भरे मन से कहा कि मेरी बेटी तो चली गई, लेकिन उन दो जिंदगियों में मैं अपनी बेटी को हमेशा तलाशता रहूंगा।
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