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Chandigarh News: छात्र को एआई के इस्तोमाल पर अयोग्य मानने के मामले में यूनिवर्सिटी का यूटर्न
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-सभी तिमाहियों की नई ट्रांसक्रिप्ट जमा करवाने की शर्त पर फैसला वापस
-परीक्षा में एआई आधारित उत्तर का प्रयोग करने के आरोप में उत्तर पुस्तिका कर दी रद्द
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। एलएलएम के एक छात्र के उत्तर को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) आधारित बताते हुए उसे अयोग्य करार देने के मामले में अब यूनिवर्सिटी ने यूटर्न ले लिया है। यूनिवर्सिटी ने सभी तिमाहियों की ट्रांसक्रिप्ट नए सिरे से जमा करवाने की शर्त पर फैसला बदल दिया है। हाईकोर्ट ने यूनिवर्सिटी के इस फैसले के बाद याचिका का निपटारा कर दिया है। मुंबई निवासी कौस्तुभ शक्करवार ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल करते हुए बताया कि परीक्षा में उसके द्वारा दिए गए उत्तर को सोनीपत की ओपी जिंदल यूनिवर्सिटी ने एआई-जनरेटेड घोषित कर दिया और उसे परीक्षा में असफल कर दिया गया। याची ने बताया कि परीक्षा में अनुचित साधन इस्तेमाल करने का उस पर आरोप लगा और इसके लिए बनाई गई कमेटी के समक्ष याची ने अपनी सभी दलीलें दी लेकिन इन्हें अस्वीकार कर दिया गया। यूनिवर्सिटी के अनुसार शक्करवार ने वैश्वीकरण की दुनिया में कानून और न्याय विषय के लिए उसने एआई-जनरेटेड सामग्री प्रस्तुत की है। याची ने कहा कि सामग्री उसने स्वयं तैयार की है, साथ ही यह भी कहा कि विश्वविद्यालय से एआई के उपयोग को प्रतिबंधित करने वाला कोई विशिष्ट नियम नहीं है। याची ने कहा कि कापीराइट अधिनियम स्पष्ट रूप से बताता है कि यदि याचिकाकर्ता ने एआई का उपयोग किया भी है, तो कलात्मक कार्य का कापीराइट याचिकाकर्ता के पास होगा और इस प्रकार कापीराइट के उल्लंघन का आरोप विफल हो जाता है। याची ने हाई कोर्ट से इस मामले में उचित आदेश पारित करने का आग्रह किया। फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई के दौरान सोनीपत की ओपी जिंदल ग्लोबल यूनिवर्सिटी ने बताया कि वे याची की सभी तिमाहियों की ट्रांसक्रिप्ट जमा करवाने की शर्त पर अपना फैसला वापिस ले सकते हैं। याची की सहमति पर हाईकोर्ट ने याचिका का निपटारा कर दिया।
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-परीक्षा में एआई आधारित उत्तर का प्रयोग करने के आरोप में उत्तर पुस्तिका कर दी रद्द
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। एलएलएम के एक छात्र के उत्तर को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) आधारित बताते हुए उसे अयोग्य करार देने के मामले में अब यूनिवर्सिटी ने यूटर्न ले लिया है। यूनिवर्सिटी ने सभी तिमाहियों की ट्रांसक्रिप्ट नए सिरे से जमा करवाने की शर्त पर फैसला बदल दिया है। हाईकोर्ट ने यूनिवर्सिटी के इस फैसले के बाद याचिका का निपटारा कर दिया है। मुंबई निवासी कौस्तुभ शक्करवार ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल करते हुए बताया कि परीक्षा में उसके द्वारा दिए गए उत्तर को सोनीपत की ओपी जिंदल यूनिवर्सिटी ने एआई-जनरेटेड घोषित कर दिया और उसे परीक्षा में असफल कर दिया गया। याची ने बताया कि परीक्षा में अनुचित साधन इस्तेमाल करने का उस पर आरोप लगा और इसके लिए बनाई गई कमेटी के समक्ष याची ने अपनी सभी दलीलें दी लेकिन इन्हें अस्वीकार कर दिया गया। यूनिवर्सिटी के अनुसार शक्करवार ने वैश्वीकरण की दुनिया में कानून और न्याय विषय के लिए उसने एआई-जनरेटेड सामग्री प्रस्तुत की है। याची ने कहा कि सामग्री उसने स्वयं तैयार की है, साथ ही यह भी कहा कि विश्वविद्यालय से एआई के उपयोग को प्रतिबंधित करने वाला कोई विशिष्ट नियम नहीं है। याची ने कहा कि कापीराइट अधिनियम स्पष्ट रूप से बताता है कि यदि याचिकाकर्ता ने एआई का उपयोग किया भी है, तो कलात्मक कार्य का कापीराइट याचिकाकर्ता के पास होगा और इस प्रकार कापीराइट के उल्लंघन का आरोप विफल हो जाता है। याची ने हाई कोर्ट से इस मामले में उचित आदेश पारित करने का आग्रह किया। फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई के दौरान सोनीपत की ओपी जिंदल ग्लोबल यूनिवर्सिटी ने बताया कि वे याची की सभी तिमाहियों की ट्रांसक्रिप्ट जमा करवाने की शर्त पर अपना फैसला वापिस ले सकते हैं। याची की सहमति पर हाईकोर्ट ने याचिका का निपटारा कर दिया।