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पंजाब विधानसभा सत्र: अब राज्यपाल नहीं CM होंगे विश्वविद्यालयों के चांसलर, पंजाब ने विधेयक किया पारित

Tue, 20 Jun 2023 08:53 PM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: ajay kumar Updated Tue, 20 Jun 2023 08:53 PM IST
सार

सीएम भगवंत मान ने कहा कि पंजाब के राज्यपाल पंजाब के बजाय हरियाणा की वकालत करते रहे हैं। वे पंजाब यूनिवर्सिटी की सीनेट में हरियाणा का दखल चाहते हैं। मान ने कहा कि हमारी सरकार ने राज्य के विश्वविद्यालयों के लिए फंड की कोई कमी नहीं होने दी है।

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Universities Law Amendment Bill 2023 passed in Punjab Assembly
पंजाब विधानसभा सत्र। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

पंजाब में अब सभी सरकारी विश्वविद्यालयों के चांसलर राज्यपाल नहीं बल्कि मुख्यमंत्री होंगे। मंगलवार को पंजाब विधानसभा के दो दिवसीय सत्र के दौरान शिक्षा मंत्री हरजोत बैंस की ओर से लाया गया पंजाब यूनिवर्सिटीज लॉ (संशोधन) बिल 2023 को सदन ने सर्वसम्मति के पारित कर दिया।

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सदन में इस बिल का शिरोमणि अकाली दल ने भी समर्थन किया। हालांकि, इस समय सदन में कांग्रेस के सदस्य मौजूद नहीं थे। अब यह बिल मंजूरी के लिए राज्यपाल के पास भेजा जाएगा। सदन में बिल पर मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा कि अगर विश्वविद्यालय का चांसलर अच्छा हो तो कल्याण हो जाता है। मान ने कहा कि पंजाब के राज्यपाल पंजाब के बजाय हरियाणा की वकालत करते रहे हैं। वे पंजाब यूनिवर्सिटी की सीनेट में हरियाणा का दखल चाहते हैं। मान ने कहा कि हमारी सरकार ने राज्य के विश्वविद्यालयों के लिए फंड की कोई कमी नहीं होने दी है।
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सदन में पारित उक्त बिल के लिए सरकार ने पंजाबी यूनिवर्सिटी एक्ट 1961, गुरु नानक देव यूनिवर्सिटी अमृतसर एक्ट 1969, गुरु नानक देव पंजाब स्टेट ओपन यूनिवर्सिटी एक्ट 2019, गुरु तेग बहादुर स्टेट यूनिवर्सिटी ऑफ लॉ पंजाब एक्ट 2020, आईके गुजराल पंजाब टेक्निकल यूनिवर्सिटी एक्ट 1996, शहीद भगत सिंह स्टेट यूनिवर्सिटी एक्ट 2021, सरकार बेअंत सिंह स्टेट यूनिवर्सिटी एक्ट 2021, बाबा फरीद यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ साइंसेज एक्ट 1998, गुरु रविदास आयुर्वेद यूनिवर्सिटी पंजाब एक्ट 2009, महाराजा भूपिंदर सिंह पंजाब स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी एक्ट 2019 और गुरु अंगद देव वेटरिनरी एंड एनिमल साइंसेज यूनिवर्सिटीज एक्ट 2005 के सेक्शन 9 में संशोधन किया है। अब चांसलर के रूप में मुख्यमंत्री उक्त विश्वविद्यालयों में वाइस चांसलर की नियुक्ति कर सकेंगे।
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जस्टिस पंछी आयोग की सिफारिशों को बनाया आधार
संशोधित बिल पेश करते हुए सरकार ने केंद्र सरकार की ओर से जस्टिस मदन मोहन पंछी के नेतृत्व में राज्य-केंद्र संबंधों पर गठित आयोग की उन सिफारिशों को आधार बनाया है, जिसमें आयोग ने कहा है कि राज्यपाल के पास वैधानिक कार्यों की बहुत बड़ी जिम्मेदारी होती है। वह अपनी सांविधानिक जिम्मेदारियों का निर्वाह पूर्ण पारदर्शी व निष्पक्ष तरीके से कर सकें, इसके लिए उन पर राज्य से जुड़े शैक्षिक प्रशासन का बोझ नहीं डाला जाना चाहिए। आयोग ने यह भी सिफारिश की है कि राज्यपाल को किसी भी कानून के तहत आकस्मिक रूप से कार्य नहीं सौंपा जाना चाहिए। पंजाब सरकार ने इन सिफारिशों के आधार पर मुख्यमंत्री को राज्य के विश्वविद्यालयों का वाइस चांसलर नियुक्त करने का फैसला लिया।

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