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अजब-गजब प्रथा: यहां पैसा दान देने के बाद मिलती है दुल्हन

Tue, 01 Mar 2016 02:10 PM IST
Updated Tue, 01 Mar 2016 02:10 PM IST
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unique marriage, after donation bride meet groom at dabwali

राजस्थान की सीमा से सटा हरियाणा का गांव कालूआना, एक ऐसा गांव है। यहां दुल्हन ले जाने से पहले दूल्हे को शिक्षा के लिए दान देना पड़ता है। दूल्हे की ओर से दिया गया दान कालूआना वेलफेयर शिक्षा समिति को मिलता है। इसी तरह मिले दानों को समिति करीब 30 से 35 गांवों की 300 बेटियों को पढ़ाने पर खर्च करती है। यह प्रथा पिछले करीब सात साल से चली आ रही है।

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सात साल पहले ऐसे शुरू हुई थी प्रथा
वर्ष 2005 से पहले शिक्षा के मामले में बेटियों की दशा काफी खराब थी। उस समय गांव कालूआना के राजकीय मिडिल स्कूल की एक बेटी भी पास नहीं हुई थी। मूलभूत सुविधाओं से पिछड़ा विद्यालय आखिरी सांस ले रहा था।
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विद्यालय के एक तरफ गलियां थी, दूसरी तरफ पंचायत घर, एक ओर जोहड़ था। उस समय की पंचायत ने जोहड़ को भरकर स्कूल का विस्तार करने की योजना बनाई। डेढ़ साल तक सरकारी कार्यालयों के चक्कर काटने के बाद जब न्याय नहीं मिला तो आखिरकार उस समय के सरपंच जगदेव सहारण ने कालूआना वेलफेयर शिक्षा समिति बनाकर जोहड़ को भरने की ठानी। युवाओं के जोश के आगे किसी का बस नहीं चला। जोहड़ भर दिया गया। सरकारी ग्रांट से धड़ाधड़ कमरे खड़े हो गए।
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दुल्हन का पिता मांगता है दान

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बसों में तेल, स्टॉफ का पूरा खर्च समिति वहन करती है। यहां तक कि समिति ने अपने खर्च पर गांव कालूआना के शिक्षण संस्थानों में गणित, अंग्रेजी, केमिस्ट्री के प्राध्यापकों साथ-साथ हिंदी, जेबीटी विषयों के अध्यापक भी नियुक्त कर रखे हैं। पूरा खर्च वहन करने के लिए करीब सात साल पहले एक अनोखी प्रथा की शुरुआत हुई।

गांव की बेटी को अपनी दुल्हन बनाने के लिए गांव में आने वाले दूल्हे से शिक्षा का दान लेना शुरू किया गया। यह प्रथा आज भी प्रचलित है। यह दान दुल्हन का पिता मांगता है। इससे समिति को लाखों रुपये की आमदन होती है। जिससे उपरोक्त खर्चा चलता है।


जुर्माने की राशि भी होती है खर्च
गांव में होने वाले लड़ाई-झगड़े जो पंचायत स्तर पर निपटते हैं। ऐसे झगड़ों में संबंधित पक्षों को जो जुर्माना लगाया जाता है। जुर्माना राशि को समिति के एकाऊंट में जमा करवाया जाता है। यहीं नहीं फसली सीजन के दौरान समिति सदस्य जमींदारों से उगाही करते हैं। समिति को उपरोक्त दोनों साधनों से आमदन होती है।

बसों में सफर करने वाली किसी बेटी से पैसा नहीं मांगा जाता। वह अपने स्तर पर समिति को डोनेशन दे सकती है। समिति रजिस्टर्ड है। प्रत्येक वर्ष ऑडिट होती है। ग्रामीणों की आपसी सहमति से शिक्षा का दान दूल्हा देता है। 100 रुपये से लेकर हजारों रुपये तक दान मिलता है। जब एक बेटी गांव से विवाह करके जाती है तो अन्य बेटियों के भविष्य को प्रकाश मय कर देती है। समिति की आमदन का यह सबसे बड़ा स्त्रोत है।
-जगदेव सहारण, अध्यक्ष, कालूआना वेलफेयर शिक्षा समिति


शिक्षा से ही बेटियों का जीवन उज्ज्वल हो सकता है। इसी मकसद से समिति कार्य कर रही है। पंचायत इस कार्य में बढ़चढ़कर अपना योगदान देगी। गांव में जब भी विवाह होता है तो गो शाला, मंदिर को दान देने के साथ-साथ शिक्षा के लिए भी दान निकाला जाता है। वर पक्ष यह दान अपने हाथ से देता है।
गीता सहारण, सरपंच, गांव कालूआना

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