Amit Shah: NCB सम्मेलन में पहुंचे केंद्रीय गृहमंत्री, कहा-नशे से निपटने में पंजाब को देंगे हर मदद
गृहमंत्री के आने की तैयारियों को लेकर शुक्रवार को पूरे दिन प्रशासन जुटा रहा। एयरपोर्ट से जिस रास्ते वह राजभवन पहुंचेंगे, उन सभी रास्तों की मरम्मत की गई और पत्थरों को पेंट किया गया। सड़क किनारे घासों की कटाई की गई।
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केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने शनिवार को चंडीगढ़ में नशीली दवाओं की तस्करी और राष्ट्रीय सुरक्षा विषय पर राष्ट्रीय सम्मेलन को संबोधित किया। इस मौके पर उन्होंने कहा कि आज उत्तर भारत के प्रमुख 5 राज्यों के मुख्यमंत्री के साथ नशे की समस्या को लेकर बैठक हुई। इसमें पता चला कि पंजाब में ड्रग्स की समस्या ज्यादा है क्योंकि यह बॉर्डर का प्रदेश है इसलिए नशे से मुक्ति के लिए यहां प्रयास भी ज्यादा करना पड़ेगा।
उन्होंने पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान से अपील की कि केंद्र को जगह उपलब्ध कराई जाए तो वह अमृतसर में भी एक फॉरेंसिक लैब बनाएंगे। साथ ही एनसीबी का एक छोटा सेंटर भी खोला जाएगा जो प्रशिक्षण उपलब्ध कराएगा। केंद्र सरकार ड्रग्स के खिलाफ लड़ाई में पंजाब के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ी है, पंजाब के युवाओं को नशे से बाहर निकालना है और इसके लिए पंजाब जो भी प्रयास करता है और पंजाब की नशे के खिलाफ जो भी लड़ाई है उसमें केंद्र सरकार पूरा साथ देगी।
अमित शाह ने कहा कि नशे के खिलाफ लड़ाई में पंजाब, हरियाणा, जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और दिल्ली को मिलकर लड़ना होगा। ताकि एक जगह से दूसरी जगह नशे का आदान प्रदान रोका जा सके। कार्यक्रम में हरियाणा, हिमाचल प्रदेश और पंजाब के मुख्यमंत्री, चंडीगढ़ के प्रशासक, बीएसएफ, एनआईए व एनसीबीके अधिकारियों के साथ ही राज्यों के एंटी नक्सल टास्क फोर्स के प्रमुख और नार्को कॉर्डिनेशन सेंटर के सदस्य मौजूद रहे।
शाह ने कहा कि वर्ष 2014 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जीरो टॉलरेंस नीति अपनाकर नशे को खत्म करने का वादा किया था। ड्रग्स की तस्करी और प्रसार किसी भी समाज के लिए बहुत घातक होता है। ड्रग्स तस्करी के बाद जब उसका प्रसार समाज में होता है तो वो पीढ़ियों को खोखला कर देता है और दीमक की तरह देश और समाज की जड़ों को खोखला करने का काम करता है। कोई भी स्वस्थ, समृद्ध, सक्षम और सुरक्षित राष्ट्र ड्रग्स तस्करी के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाए बिना अपने उद्देश्य सिद्ध नहीं कर सकता है। इस लड़ाई में केंद्र के साथ राज्यों को को भी लड़ना होगा।
आठ साल में 200 प्रतिशत ज्यादा मामले दर्ज हुए
अमित शाह ने कहा कि पिछले आठ सालों में ड्रग्स के खिलाफ लड़ाई में शानदार नतीजे आए हैं। 2006-2013 की तुलना में 2014-2022 के बीच पिछले 8 साल में लगभग 200 प्रतिशत ज्यादा मामले दर्ज किए गए हैं। गिरफ्तारियों की संख्या में 260 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। क्वालिटी केसेज में 800 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। जब्त किए गए ड्रग्स की मात्रा दोगने से अधिक हुई है। 2006 से 2013 के बीच 1.52 लाख किलोग्राम मादक पदार्थ जब्त हुए थे, जबकि 2014 से 2022 के बीच 3.3 लाख किलोग्राम ड्रग्स पकड़ी गई है। ज्यादा नुकसान पहुंचाने वाले और शरीर और समाज को खोखला करने वाले मादक पदार्थों पर हमने ज्यादा ध्यान दिया है। 2006 से 2013 तक 768 करोड़ रुपये की ड्रग्स पकड़ी गई, जबकि 2014 से 2021 के बीच 20 हजार करोड़ रुपये के ड्रग्स पकड़ कर उसे नष्ट किया गया। 81 प्रतिशत नशा समुद्री मार्ग से देश में पहुंचता है।
15 अगस्त तक एक लाख किलो ड्रग्स खत्म करने का संकल्प
सेमिनार में अमित शाह ने कहा कि 1 जून से 15 अगस्त तक 75 दिन के ड्रग्स नष्ट करने के अभियान की शुरुआत हुई है। अब तक 1200 करोड़ रुपये मूल्य के 51 हजार किलोग्राम ड्रग्स नष्ट किए जा चुके हैं। आज लगभग 31 हजार किलोग्राम ड्रग्स का काला बाजार मूल्य क़रीब 800 करोड़ रुपये है। इस प्रकार आज तक क़रीब 2000 करोड़ रुपये की क़ीमत के 82000 किलोग्राम ड्रग्स नष्ट किए जा चुके हैं। 15 अगस्त को 75 दिन के अभियान की समाप्ति पर इसकी मात्रा एक लाख किलोग्राम पहुंच जाएगी। जिसका अनुमानित काला बाजार मूल्य क़रीब 3000 करोड़ रुपये होगा।
राज्यों को लैब बनाने में मदद करेगी नेशनल फॉरेंसिक साइंस यूनिवर्सिटी व एनसीबी
शाह ने कहा कि राष्ट्रीय नारकोटिक्स हेल्पलाइन बनाने की आवश्यकता को देखते हुए एनसीबी ने मानस हेल्पलाइन का प्रयास शुरु किया है। 21 राज्यों ने एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स का गठन भी किया है। गृह मंत्री कहा कि ड्रग्स और डार्क नेट पर लगाम लागने के लिए बहुत तेजी से काम करने की जरूरत है। डार्क वेब और क्रिप्टोकरंसी का व्यापार दोनों एक दूसरे के साथ जुड़ा हुए हैं। गृह मंत्रालय ने हाल ही में डार्क वेब और क्रिप्टो मुद्राओं पर एक टास्क फोर्स का गठन किया है। एनसीबी और नेशनल फॉरेंसिक साइंस यूनिवर्सिटी के बीच एक समझौता हुआ है, इसके तहत किसी भी राज्य को मॉडर्न फॉरेंसिक लैब बनाने में नेशनल फॉरेंसिक साइंस यूनिवर्सिटी और एनसीबी उन्हे पूरी मदद करेगा। इस दिशा में एक एसओपी भी बनाने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं।
एन्कार्ड व निदान पोर्टल का भी किया उदघाटन, स्वान दल का उदघाटन
केन्द्रीय गृह मंत्री ने एन्कोर्ड पोर्टल का भी शुभारंभ किया। इस पोर्टल से देशभर की सभी एजेंसियां न केवल सूचना ले पाएंगी बल्कि यह एन्कोर्ड की बेस्ट प्रैक्टिसेज का एक्सचेंज होगा। इससे जिले स्तर के पुलिस तक आसानी से सूचना पहुंच पाएगी। इसके साथ ही शाह ने कहा कि नार्को-अपराधियों पर राष्ट्रीय एकीकृत डेटाबेस (निदान) का निर्माण भी हुआ है। इसमें एनडीपीएस अधिकृत एजेंसियां और एनसीबी के समस्त नार्को अपराधों का डाटा उपलब्ध है। वहीं गृहमंत्री ने एक स्वान दल को भी हरी झंडी दिखाई। अब कुत्ते भी नशे को पकड़वाने में मदद करेंगे।
अवैध ड्रग्स खेती के लिए ड्रोन उपयोग तकनीक पर हो रहा तेजी से काम
गृहमंत्री ने कहा कि अवैध ड्रग्स की खेती के लिए भी राज्य में ड्रोन उपयोग और टेक्नोलॉजी का उपयोग बढ़ाकर बहुत जल्दी इसे रोकना पड़ेगा। एनसीबी भास्कराचार्य सेंटर के साथ मिलकर एक संयुक्त प्रयास कर रही है, सेटेलाइट के माध्यम से एरिया आईडेंटिफाई किया जा रहा है और एक विशिष्ट प्रकार की सेटेलाइट इमेज की पहचान सिस्टम भी डेवलप की जा रही है। इससे सचिवालय के अंदर ही सर्वे नंबर के साथ आपको उस एरिया की जानकारी मिल जाएगा जहां ड्रग्स की खेती होती है। यह संभव हो गया तो फिर ड्रग्स नष्ट करने में देरी नहीं लगेगी। उन्होने सभी राज्यों से अनुरोध किया कि वे भी भास्कराचार्य इंस्टिट्यूट से संपर्क कर सकते हैं और उनकी मदद ले सकते हैं।
272 जिले और 80 हजार गांव चिह्नित
शाह ने कहा कि हमने 272 जिले और लगभग 80 हजार से ज्यादा गांव चिह्नित किए हैं। अब हमारा एरिया तय है कि हमें यह लड़ाई कहां लड़नी है। अब हमारा काम है कि संकल्प के साथ हर व्यक्ति, हर एजेंसी अपने-अपने कार्य क्षेत्र में इस लड़ाई को मजबूती से ले जाए। उन्होंने कहा कि भारत सरकार ने 44 देशों के साथ नारकोटिक्स के लिए अलग-अलग समझौता ज्ञापन किए हैं।
