आम बजटः चुनावी साल में हरियाणा की बड़े तोहफे की उम्मीदें हुई धराशयी, एम्स भी पचड़े में फंसा
एनडीए टू के पहले आम बजट से हरियाणा की झोली में कुछ खास नहीं आया। हरियाणा के लिए इस चुनावी साल में वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने सूबे को कोई खास प्रोजेक्ट देकर निहाल नहीं किया। हालांकि देशभर में समग्र विकास के लिए की गई घोषणाओं का लाभ अन्य राज्यों की तरह हरियाणा को भी मिल जाएगा। मगर जिस खास बड़े प्रोजेक्ट व योजनाओं की आस हरियाणा को थी, वो फिलहाल टूट गई है।
उधर, हरियाणा सरकार ने कृषि एवं कृषक कल्याण के लिए भी हरियाणा के लिए विशेष तौर पर कई योजनाएं मांगी थी। लेकिन इन्हें लेकर भी आम बजट में कोई खास घोषणा नहीं हुई। वहीं दूसरी ओर, हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने इस बजट को गरीब, किसान और गांव का बजट करार दिया है। उनका कहना है कि इस बजट से निश्चित तौर पर निवेश और रोजगार सृजन को बढ़ावा मिलेगा और इसका फायदा हरियाणा को भी होगा।
सीएम मनोहर लाल ने कहा कि यह एक संपूर्ण बजट है और इससे हरियाणा के हर वर्ग को कुछ न कुछ जरूर मिलेगा, जबकि सूबे के वित्तमंत्री कैप्टन अभिमन्यु ने भी केंद्रीय बजट को ऐतिहासिक और विकासोन्मुखी बताया है। उनके अनुसार इस बजट से प्रदेश के गांव, किसान, गरीब, युवाओं समेत अन्य वर्ग को लाभ मिलेगा।
दरअसल, हरियाणा के लिए यह साल एक चुनाव साल है। करीब तीन महीने बाद हरियाणा में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। इसके लिए सत्तारूढ़ भाजपा ने कुल 90 विधानसभा सीटों में से मिशन 75 प्लस का टारगेट भी रखा हुआ है।
सरकार भी रिपीट के लिए पूरी तरह इलेक्शन मोड में है। सूबे के हर वर्ग को लाभान्वित करने के लिए हालांकि प्रदेश सरकार अपने स्तर पर काम कर रही है और सूबे के लोगों को प्रदेश की योजनाओं से लाभान्वित करने में जुटी हुई है।
प्रदेश सरकार ये चाहती थी कि केंद्रीय बजट से भी यदि हरियाणा के लिए कोई बड़ी सौगात की घोषणा हो जाती, तो उनके मिशन को और मजबूती मिल सकती थी। मगर केंद्रीय बजट में फिलहाल हरियाणा के लिए कोई विशेष बड़ी घोषणा नहीं दिखाई दी। दूसरी ओर, पिछले बजट में हरियाणा को देश के 22वें एम्स का तोहफा मिला था। इसे रेवाड़ी के मनेठी में बनाया जाना था लेकिन वो भी जमीनी विवाद में फंसकर रह गया।
उद्योगों के लिए भी कुछ खास नहीं
हरियाणा चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री समेत प्रदेश के अन्य औद्योगिक एवं व्यापारिक संगठनों ने वित्तमंत्री को कई तरह के सुझाव व डिमांड भेजकर उनसे प्रदेश के सूक्ष्म और लघु उद्योगों के लिए विशेष पैकेज मांगा था।
उधर, हरियाणा से ताल्लुक रखने वाले राज्यमंत्री रतनलाल कटारिया भी देश की सबसे बड़ी साइंस, मेडिकल एवं रिसर्च उपकरणों की इंडस्ट्री वाले शहर अंबाला व प्लाइवुड इंडस्ट्री वाले शहर यमुनानगर को औद्योगिक पिछड़ा जोन घोषित करवाने में भी जुटे हुए थे। मगर ये मांग भी अधूरी ही रह गई। सूबे के उद्योगपत्तियों के अनुसार उम्मीद थी कि इस बार केंद्र हरियाणा के छोटे उद्योगों के लिए विशेष पैकेज देगा, मगर बजट में ये आस भी टूट गई।