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बजट 2019: डीजल पर सेस से टूटेगी लाखों किसानों की कमर, फसल की लागत में हो जाएगा इजाफा
Sat, 06 Jul 2019 10:03 AM IST
खुशबू गोयल
यशपाल शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़
यशपाल शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Sat, 06 Jul 2019 10:03 AM IST
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फाइल फोटो
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केंद्र सरकार के डीजल पर सेस लगाने से कर्ज तले डूबे हरियाणा के किसानों पर और आर्थिक बोझ पड़ेगा। प्रदेश के साढ़े सोलह लाख किसानों की कमर डीजल महंगा होने से टूटना तय है। चूंकि, हरियाणा के 22.50 लाख किसान पहले से 7707 करोड़ के कर्ज तले दबे हैं। कर्ज तले दबे किसानों की संख्या इसलिए 22.50 लाख बनती हैं, क्योंकि साढ़े सोलह लाख किसान एक से अधिक बैंक के कर्जदार हैं।
डीजल पर सेस लगने से कीमतों में इजाफा होगा, जिसका सीधा असर किसान पर पड़ेगा। फसल तैयार करने पर आने वाली लागत में बढ़ोतरी होगी। अभी एक सीजन में एक एकड़ जमीन पर फसल तैयार करने के लिए 35 से 50 लीटर डीजल खर्च होता है। इसके बाद फसल बिक्री के लिए भी ट्रैक्टर-ट्राली में ही मंडी तक ले जाई जाती है। जिसमें भी डीजल की खपत होती है।
डीजल की कीमतें बढ़ने से डीजल पर खर्च होने वाली राशि और बढ़ जाएगी। इसका सीधा असर किसान की जेब पर पड़ेगा। न्यूनतम समर्थन मूल्य पहले ही किसान की इच्छानुसार नहीं बढ़ा है। इससे किसानों में पहले से नाराजगी है जोकि डीजल पर सेस लगने से और बढ़ गई है।
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डीजल पर सेस लगने से कीमतों में इजाफा होगा, जिसका सीधा असर किसान पर पड़ेगा। फसल तैयार करने पर आने वाली लागत में बढ़ोतरी होगी। अभी एक सीजन में एक एकड़ जमीन पर फसल तैयार करने के लिए 35 से 50 लीटर डीजल खर्च होता है। इसके बाद फसल बिक्री के लिए भी ट्रैक्टर-ट्राली में ही मंडी तक ले जाई जाती है। जिसमें भी डीजल की खपत होती है।
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डीजल की कीमतें बढ़ने से डीजल पर खर्च होने वाली राशि और बढ़ जाएगी। इसका सीधा असर किसान की जेब पर पड़ेगा। न्यूनतम समर्थन मूल्य पहले ही किसान की इच्छानुसार नहीं बढ़ा है। इससे किसानों में पहले से नाराजगी है जोकि डीजल पर सेस लगने से और बढ़ गई है।
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किसान का पूरा फसल चक्र डीजल पर ही घूमता है, टयूबेल से सिंचाई करने में भी डीजल ही लगता है। किसान संगठनों की कृषि उपकरणों और खाद पर लगा जीएसटी हटाने की मांग भी बजट में पूरी नहीं हुई है। इससे भी उनमें मायूसी है। अभी कृषि यंत्रों पर किसान के लिए 12 प्रतिशत और खाद पर पांच प्रतिशत जीएसटी है। जिसका असर पर सीधा किसान की जेब पर ही पड़ता आ रहा है।
किसानों पर एक और आर्थिक कुठाराघात: भाकियू
भारतीय किसान यूनियन हरियाणा के अध्यक्ष गुरनाम सिंह चढ़ूनी व प्रेस प्रवक्ता राकेश बैंस ने कहा कि केंद्रीय बजट में किसानों पर एक और आर्थिक कुठाराघात किया गया है। पहले कृषि उपकरणों पर जीएसटी लगाया गया और अब डीजल पर सेस लगाकर किसान को खत्म करने की कोशिश की गई है।
किसानों को सरकार फलता-फूलता नहीं देखना चाहती। एमएसपी में भी ऊंट के मुंह में जीरा समान बढ़ोतरी हुई है। फसल पर खर्च लागत गई गुणा बढ़ जाएगी, जबकि मूल्य उससे कहीं मिलेगा। ऐसे में 2022 तक कैसे किसानों की आय दोगुनी हो पाएगी।
किसानों पर एक और आर्थिक कुठाराघात: भाकियू
भारतीय किसान यूनियन हरियाणा के अध्यक्ष गुरनाम सिंह चढ़ूनी व प्रेस प्रवक्ता राकेश बैंस ने कहा कि केंद्रीय बजट में किसानों पर एक और आर्थिक कुठाराघात किया गया है। पहले कृषि उपकरणों पर जीएसटी लगाया गया और अब डीजल पर सेस लगाकर किसान को खत्म करने की कोशिश की गई है।
किसानों को सरकार फलता-फूलता नहीं देखना चाहती। एमएसपी में भी ऊंट के मुंह में जीरा समान बढ़ोतरी हुई है। फसल पर खर्च लागत गई गुणा बढ़ जाएगी, जबकि मूल्य उससे कहीं मिलेगा। ऐसे में 2022 तक कैसे किसानों की आय दोगुनी हो पाएगी।