इस्तीफे के मुद्दे पर सामने आया पाटिल का सच
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केंद्र में मोदी सरकार के शपथ लेने से पहले ही यूटी के प्रशासक और पंजाब के राज्यपाल शिवराज पाटिल ने अपने पद से इस्तीफा देने की पेशकश कर दी थी। लेकिन, कांग्रेस के बड़े नेताओं ने उन्हें ऐसा करने से रोक दिया था।
कांग्रेस के सूत्रों के अनुसार, कांग्रेस ने इस्तीफा देने के लिए इसलिए मना कर दिया था क्योंकि ऐसा करने से कुछ और राज्यपालों पर भी इस्तीफा देने का दबाव बढ़ जाता।
कांग्रेस ऐसा नहीं चाहती थी। वर्ष 2004 में जब केंद्र में यूपीए सरकार आई थी, तब पाटिल केंद्रीय गृह मंत्री बने थे और पाटिल ने ही एनडीए की ओर से नियुक्त कुछ राज्यपालों से त्याग पत्र मांगा था। यही वजह है कि पाटिल ने किसी विवाद से बचने के लिए पहले ही अपना इस्तीफा देने की पेशकश कर दी थी।
करीब सात माह बचा है कार्यकाल
अब उम्मीद की जा रही है कि पाटिल या तो लगभग सात माह का बचा हुआ कार्यकाल पूरा करेंगे या उन्हें किसी दूसरे राज्य का राज्यपाल नियुक्त कर दिया जाएगा। लेकिन, जिस तरह से पाटिल और भाजपा के नेताओं के बीच तनातनी चल रही है उससे यह स्पष्ट है कि केंद्र पर उन्हें यहां से हटाने का दबाव बढ़ रहा है।
ऐसे में चर्चा यह भी है कि पाटिल को किसी दूसरे राज्य का राज्यपाल नियुक्त किया जा सकता है। ध्यान रहे कि भाजपा चंडीगढ़ के अध्यक्ष संजय टंडन पाटिल के खिलाफ केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह को पत्र भेज चुके हैं।
इससे पहले चंडीगढ़ की सांसद किरण खेर ने भी गृह मंत्री को पद लिखा था। प्रशासक की सलाहकार समिति की बैठक सांसद से पूछकर तय न करने का विवाद काफी बढ़ गया था और मामला गृह मंत्रालय तक पहुंच गया है।
पाटिल रहेंगे या जाएंगे फैसला जल्द
संसद का सत्र 7 जुलाई से शुरू होगा। यह माना जा रहा है कि इससे पहले नए राज्यपालों की नियुक्ति और तबादले हो जाएंगे। ऐसे में पाटिल यूटी के प्रशासक रहेंगे या कोई अन्य प्रशासक आएगा यह 6 जुलाई से पहले तय हो जाएगा।
भाजपा के स्थानीय नेता भाजपा के वरिष्ठ नेता विजय कुमार मल्होत्रा को यूटी का प्रशासक नियुक्त कराने के लिए लाबिंग कर रहे हैं। भाजपा नेता चाहते हैं कि पंजाबी पृष्ठभूमि वाला व्यक्ति ही यूटी का अगला प्रशासक बने।