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अनुचित प्रभाव, निष्पक्ष सुनवाई के अधिकार का उल्लंघन: हाईकोर्ट
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-वकील के खिलाफ केस को हाईकोर्ट ने किया अन्य जिले में ट्रांसफर
-अन्य वकील आरोपी के खिलाफ केस लड़ने को नहीं हो रहे थे तैयार
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अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने वकील के खिलाफ केस को अन्य जिले में ट्रांसफर करते हुए कहा कि अनुचित प्रभाव निष्पक्ष सुनवाई के अधिकार का उल्लंघन करता है, जिसे स्वीकार नहीं किया जा सकता।
जस्टिस हरप्रीत सिंह बरार ने कहा कि विपरीत पक्ष की ओर से अनुचित प्रभाव या शत्रुतापूर्ण वातावरण के निर्माण के कारण प्रभावी कानूनी सहायता प्राप्त करने में शिकायतकर्ता असमर्थ हो जाता है। आरोपी उसी न्यायालय में अभ्यास करने वाला अधिवक्ता है और ऐेसे मेंं निष्पक्ष सुनवाई के मूलभूत सिद्धांतों से समझौता हो सकता है। न्यायालय ने कहा कि यह सामान्य कानून है कि स्थानीय कारकों के कारण वकील को नियुक्त करने में असमर्थता मुकदमे के स्थानांतरण के लिए एक वैध आधार बन सकती है।
याचिकाकर्ता के वकील ने तर्क दिया कि याचिकाकर्ता ने मृतक की संपत्ति हड़पने के लिए याचिकाकर्ता के दिवंगत चाचा, मंजीत सिंह के नाम पर जाली वसीयत तैयार करने के लिए प्रतिवादियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई थी। उन्होंने आगे तर्क दिया कि एफआईआर में तीन आरोपी अधिवक्ता हैं जो उसी जिले में प्रैक्टिस करते हैं जहां एफआईआर लंबित है। इस कारण उक्त जिले का कोई भी अधिवक्ता याचिकाकर्ता का प्रतिनिधित्व करने के लिए तैयार नहीं था। राज्य के वकील ने कहा कि एएसआई राजविंदर सिंह ने इस दावे की जांच की थी कि कोई भी वकील निजी प्रतिवादियों के खिलाफ याचिकाकर्ता का प्रतिनिधित्व करने के लिए तैयार नहीं था और इसे सही पाया। हालांकि अजनाला बार एसोसिएशन के वकीलों ने इस संबंध में कोई भी बयान दर्ज करने से इन्कार कर दिया था। प्रस्तुतियों की जांच करने के बाद अदालत ने कहा कि चूंकि याचिकाकर्ता अमृतसर में लाभदायक कानूनी प्रतिनिधित्व हासिल करने में असमर्थ है, इसलिए मुकदमे को दूसरे जिले में स्थानांतरित करना उचित होगा। हाईकोर्ट ने मामले को अजनाला से होशियारपुर स्थानांतरित कर दिया।
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-अन्य वकील आरोपी के खिलाफ केस लड़ने को नहीं हो रहे थे तैयार
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने वकील के खिलाफ केस को अन्य जिले में ट्रांसफर करते हुए कहा कि अनुचित प्रभाव निष्पक्ष सुनवाई के अधिकार का उल्लंघन करता है, जिसे स्वीकार नहीं किया जा सकता।
जस्टिस हरप्रीत सिंह बरार ने कहा कि विपरीत पक्ष की ओर से अनुचित प्रभाव या शत्रुतापूर्ण वातावरण के निर्माण के कारण प्रभावी कानूनी सहायता प्राप्त करने में शिकायतकर्ता असमर्थ हो जाता है। आरोपी उसी न्यायालय में अभ्यास करने वाला अधिवक्ता है और ऐेसे मेंं निष्पक्ष सुनवाई के मूलभूत सिद्धांतों से समझौता हो सकता है। न्यायालय ने कहा कि यह सामान्य कानून है कि स्थानीय कारकों के कारण वकील को नियुक्त करने में असमर्थता मुकदमे के स्थानांतरण के लिए एक वैध आधार बन सकती है।
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याचिकाकर्ता के वकील ने तर्क दिया कि याचिकाकर्ता ने मृतक की संपत्ति हड़पने के लिए याचिकाकर्ता के दिवंगत चाचा, मंजीत सिंह के नाम पर जाली वसीयत तैयार करने के लिए प्रतिवादियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई थी। उन्होंने आगे तर्क दिया कि एफआईआर में तीन आरोपी अधिवक्ता हैं जो उसी जिले में प्रैक्टिस करते हैं जहां एफआईआर लंबित है। इस कारण उक्त जिले का कोई भी अधिवक्ता याचिकाकर्ता का प्रतिनिधित्व करने के लिए तैयार नहीं था। राज्य के वकील ने कहा कि एएसआई राजविंदर सिंह ने इस दावे की जांच की थी कि कोई भी वकील निजी प्रतिवादियों के खिलाफ याचिकाकर्ता का प्रतिनिधित्व करने के लिए तैयार नहीं था और इसे सही पाया। हालांकि अजनाला बार एसोसिएशन के वकीलों ने इस संबंध में कोई भी बयान दर्ज करने से इन्कार कर दिया था। प्रस्तुतियों की जांच करने के बाद अदालत ने कहा कि चूंकि याचिकाकर्ता अमृतसर में लाभदायक कानूनी प्रतिनिधित्व हासिल करने में असमर्थ है, इसलिए मुकदमे को दूसरे जिले में स्थानांतरित करना उचित होगा। हाईकोर्ट ने मामले को अजनाला से होशियारपुर स्थानांतरित कर दिया।
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