फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Chandigarh ›   underage girl kid pregnancy demolition case SC hearing

10 साल की बच्ची के पेट में 30 हफ्ते का गर्भ, SC ने मांगी पीजीआई से राय

Tue, 25 Jul 2017 04:56 PM IST
आशीष वर्मा/अमर उजाला, चंडीगढ़
आशीष वर्मा/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Tue, 25 Jul 2017 04:56 PM IST
विज्ञापन
underage girl kid pregnancy demolition case SC hearing
- फोटो : Demo Pic
दस साल की बच्ची 30 हफ्ते की गर्भवती है। अब सुप्रीमकोर्ट ने पीजीआई से राय मांगी है कि इस स्थिति में गर्भपात करना सुरक्षित है या नहीं। संभवत: पीजीआई दो दिन में अपनी रिपोर्ट सौंप देगी। हालांकि पीजीआई के गाइनेकोलाजिस्ट ने बताया कि बच्ची का अब गर्भपात नहीं हो सकता।
विज्ञापन


24 हफ्ते बाद भ्रूण प्रीमिच्योर बच्चे का रूप लेता है। प्रीमिच्योर बच्चे को जीने का अधिकार है। उसे ऐसे नहीं छोड़ा जा सकता। प्रीमिच्योर का मतलब उसके जीवन पर कई गंभीर खतरे हैं। जन्म लेने के बाद उसे न्यूबोर्न एंड इंफेंट क्रिटिकल केयर यूनिट (नीकू) में रखना होगा। जिसका खर्चा बहुत ज्यादा होता है। मध्यवर्गीय परिवार के लिए ये काफी मुश्किल है।
विज्ञापन


दूसरी सबसे गंभीर बात यह है कि प्रीमिच्योर बच्चे की जिम्मेदारी कौन संभालेगा? न तो परिजन जिम्मेदारी उठाने को तैयार होंगे और न ही कोई दूसरा। कड़वी सच्चाई यह है कि एक स्वस्थ बच्चे को तो लोग अपना सकते हैं, लेकिन प्रीमिच्योर बच्चे के लिए कोई सामने नहीं आएगा।
विज्ञापन
विज्ञापन

स्वस्थ्य प्रेग्नेंट के मुकाबले दस साल की बच्ची में दोगुने खतरे

underage girl kid pregnancy demolition case SC hearing
स्वस्थ्य प्रेग्नेंट के मुकाबले दस साल की बच्ची में दोगुने खतरे
पीजीआई के गाइनेकोलाजिस्ट मानते हैं कि दस साल की बच्ची के लिए नार्मल डिलीवरी भी संभव नहीं है। एक स्वस्थ प्रेग्नेंट महिला को डिलीवरी के दौरान जितने खतरे होते हैं, उससे कहीं ज्यादा खतरे दस साल की बच्ची को हैं।

एक आंकड़े के मुताबिक भारत में बच्चे को जन्म देते वक्त हर साल 40 हजार से ज्यादा महिलाओं की मौत होती है। यह खतरा उस समय और बढ़ जाता है जब बच्चे को जन्म देने वाली मां की उम्र मात्र दस साल हो।

डिलीवरी के वक्त बच्चे को आगे बढ़ाने के लिए बच्ची के पैल्विक (पेडू) हड्डियां मजबूत नहीं होती है। बच्ची के हार्मोन विकसित न होने के कारण इस उम्र में लेबर पेन नहीं होता। इस हिसाब से सीजेरियन कराना ही सबसे सुरक्षित विकल्प है। 

नवजात बच्चे के लिए ये भी खतरा है

underage girl kid pregnancy demolition case SC hearing
pregnancy - फोटो : डेमो फोटो
नवजात बच्चे के लिए ये भी खतरा है
महिला विशेषज्ञों ने बताया कि दस साल की बच्ची के पेट में पल रहे नवजात को भी कई तरह के खतरे हैं। जैसा कि खबरें आ रही हैं कि सात महीने में पता चला है कि बच्ची के पेट में बच्चा है। यानी तीन महीने से लेकर सात महीने के बीच बच्चे के संपूर्ण विकास के लिए दिए जाने वाले पोषक तत्व बच्ची को नहीं दिए गए।

दूसरे केसों में तीन महीने बाद ही प्रेग्नेंट लेडी को फोलिक एसिड, विटामिन, आयरन और कैल्शियम के डोज दिए जाते हैं, जिससे मां और बच्चे को संपूर्ण पोषण मिले। पोषक तत्व नहीं मिलने की स्थिति में बच्चे का  स्वास्थ्य प्रभावित हो सकता है।

दूसरा महत्वपूर्ण पहलू यह है कि एक बच्ची के मुकाबले वयस्क महिला अपने बच्चे को ज्यादा पोषण और आक्सीजन की आपूर्ति करती है। इससे बच्चे के दिल पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है और इससे अधिक रक्त पंप होता है।

कल अनुभवी डॉक्टर करेंगे बच्ची का परीक्षण

underage girl kid pregnancy demolition case SC hearing
पीजीआई चंडीगढ़ - फोटो : demo pics
कल अनुभवी डॉक्टर करेंगे बच्ची का परीक्षण
सुप्रीमकोर्ट से आदेश मिलने के तुरंत बाद पीजीआई प्रशासन ने अनुभवी डाक्टरों की एक कमेटी बना दी है। कमेटी का चेयरमैन पल्मनरी मेडिसिन के एचओडी डा. डी बेहरा को बनाया है।

गाइनेकोलाजी डिपार्टमेंट की एचओडी डा. वनीता सूरी, पीडियाट्रिक एचओडी डा. सुरजीत सिंह, मनोचिकित्सा विभाग के एचओडी डा. अजीत अवस्थी, रेडियोडाइग्नोसिस डिपार्टमेंट के एचओडी खंडेलवाल, काडियोलाजिस्ट डा. रोहित मनोज, हास्पिटल एडमिनिस्ट्रेशन के डा. विपिन कौशल व इंटरनल मेडिसिन की एचओडी प्रो. सविता कुमारी को कमेटी में शामिल किया गया है। ये सभी डाक्टर अपने-अपने फील्ड में माहिर हैं। बुधवार को बच्ची का एग्जामिन किया जाएगा। उसके बाद शुक्रवार को पीजीआई सुप्रीमकोर्ट में अपनी रिपोर्ट सौंपेगा।
 
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed