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Hindi News ›   Chandigarh ›   Udai Bhan Appointed as new chief of Haryana congress

हरियाणा कांग्रेस को मिला नया अध्यक्ष: अशोक तंवर की तरह ही संगठन खड़ा करने में नाकाम रहीं सैलजा, कार्यकाल पूरा होने से पहले ही छोड़ा मैदान 

Thu, 28 Apr 2022 10:55 AM IST
निवेदिता वर्मा यशपाल शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़
यशपाल शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: निवेदिता वर्मा Updated Thu, 28 Apr 2022 10:55 AM IST
सार

अधिकतर विधायकों के हुड्डा के साथ होने पर पार्टी आलाकमान को भी समझ आ गया कि पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह के बिना प्रदेश की सत्ता पर काबिज नहीं हुआ जा सकता। इसे देखकर सोनिया गांधी और राहुल गांधी ने खुद कमान संभाली।

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Udai Bhan Appointed as new chief of Haryana congress
हरियाणा कांग्रेस के नए अध्यक्ष उदयभान और कुुमारी सैलजा। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

हरियाणा में कांग्रेस का संगठन खड़ा करने में निवर्तमान अध्यक्ष कुमारी सैलजा भी अशोक तंवर की तरह सफल नहीं हो पाईं। उन्होंने जोर तो पूरा लगाया, लेकिन प्रदेश कार्यकारिणी, जिला अध्यक्ष और ब्लॉक अध्यक्ष की नियुक्तियां नहीं करा सकीं। तीन साल का कार्यकाल पूरा होने से पहले ही उन्होंने मैदान छोड़ दिया। सितंबर 2019 में उनकी नियुक्ति अध्यक्ष पद पर हुई थी। उन्होंने हफ्ता पहले ही कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी को अपना इस्तीफा सौंपा था।

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वह हुड्डा खेमे का कूटनीतिक दबाव नहीं झेल पाईं। प्रदेशाध्यक्ष पद की कमान संभालने के कुछ समय बाद ही सैलजा के हुड्डा के साथ मतभेद शुरू हो गए थे। 2019 के विधानसभा चुनाव के बाद यह और बढ़े। टिकट आवंटन के दौरान ही दोनों में ठन गई थी। हुड्डा ने सैलजा कोटे में आवंटित अनेक टिकट पर आपत्ति जताई थी। हालांकि, सैलजा समर्थक पांच नेता शमशेर गोगी, प्रदीप चौधरी, शीशपाल केहरवाला, शैली व रेणुबाला जीतकर विधानसभा पहुंचे। यह उनके साथ हर मोर्चे पर डटे रहे। अन्य विधायकों का विश्वास जीतने में सैलजा नाकाम रहीं। हुड्डा खेमे के चंद विधायक ही उनकी बैठकों में कभी-कभार पहुंचते थे।
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हुड्डा और समर्थक विधायकों पर हाईकमान का अधिक जोर नहीं चला। अधिकतर विधायकों के हुड्डा के साथ होने पर पार्टी आलाकमान को भी समझ आ गया कि पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह के बिना प्रदेश की सत्ता पर काबिज नहीं हुआ जा सकता। इसे देखकर सोनिया गांधी और राहुल गांधी ने खुद कमान संभाली। राहुल ने सभी दिग्गज कांग्रेसियों की बैठक ली और अलग-अलग भी सबकी राय जानी, जिसमें अधिकतर नेताओं ने हुड्डा को फ्री हैंड देने की पैरवी की। इसके बाद सोनिया ने हरियाणा अनेक नेताओं को एक-एक कर बुलाया और उनकी राय जानी। उसके बाद बदलाव की पटकथा लिखी गई।

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नियुक्तियां कराने में सफल नहीं हुई सैलजा

प्रदेश में बीते साढ़े सात साल से कांग्रेस का संगठन नहीं है। प्रदेशाध्यक्ष तो दो बदल चुके, लेकिन प्रदेश कार्यकारिणी, जिला अध्यक्ष, ब्लॉक अध्यक्ष की नियुक्तियां नहीं हो पाईं। शकील अहमद, कमलनाथ, गुलाम नबी आजाद व विवेक बंसल पर प्रदेश प्रभारी की जिम्मेदारी रही, लेकिन वे भी संगठन खड़ा करने में विफल रहे। हुड्डा के आगे किसी की एक न चली। चंडीगढ़ से तैयार होकर दिल्ली गई सूचियां कभी अंतिम रूप ले ही नहीं पाईं। भूपेंद्र-दीपेंद्र की सियासी बिसात पर दिल्ली दरबार में कोई टिक ही नहीं पाया। यही कारण रहा कि संगठनात्मक नियुक्तियां नहीं हुईं। अशोक तंवर को राहुल गांधी और सैलजा को सोनिया का करीबी माना जाता था, लेकिन दोनों अपना जलवा नहीं दिखा सके।

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