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मनोनीत पार्षदों पर भाजपा का यू-टर्न, छीन सकती है वोटिंग का अधिकार

Wed, 21 Dec 2016 11:17 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Wed, 21 Dec 2016 11:17 PM IST
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U-turn BJP on the nominated councilors in chandigarh
भाजपा चाहे तो मनोनीत से छीन सकती है वोटिंग अधिकार - फोटो : अमर उजाला
भाजपा अपने दम पर नए साल में मेयर बनाएगी। ऐसे में अगर भाजपा चाहे तो वह मनोनीत पार्षदों से वोटिंग अधिकार छीन सकती है। क्योंकि जब तक भाजपा सत्ता में नहीं थी तो वह मनोनीत पार्षदों को वोटिंग का अधिकार नहीं दिए जाने के समर्थन में थी। लेकिन अब टंडन गुट खुद ही मनोनीत पार्षदों का समर्थन कर रहा है। हालांकि, भाजपा पार्षद सतिंदर सिंह ने मनोनीत को वोटिंग अधिकार दिए जाने के खिलाफ पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर रखी है। वह अभी विचाराधीन है।
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समय के साथ अपना स्टैंड बदला
वर्ष 2011 के नगर निगम चुनाव में भाजपा के सीनियर नेताओं ने अपनी चुनावी वादे में कहा था कि अगर वह सता में आए तो मनोनीत पार्षदों का वोटिंग अधिकार समाप्त कर देंगे। लेकिन उस समय भाजपा सत्ता में नहीं आ पाई थी। अब भाजपा पूरी बहुमत से सत्ता में आ चुकी है। लेकिन भाजपा अपना वादा पूरा करने के मूड़ में नहीं है। इस समय भाजपा को मेयर बनवाने के लिए न तो अकाली और न ही निर्दलीय पार्षद की जरूरत है। इसका कारण यह भी है कि टंडन गुट चाहता है कि ज्यादा से ज्यादा मनोनीत पार्षद उनके समर्थक बने।
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सूद के मेयर बनने के बाद पलटी पार्टी

U-turn BJP on the nominated councilors in chandigarh
Satinder Singh - फोटो : File Photo
सूद के मेयर बनने के बाद पलटी पार्टी
सूद इस साल 9 मनोनीत पार्षदों के समर्थन से मेयर बने थे, जबकि इससे पहले कांग्रेस ने 13 साल से मनोनीत के दम पर नगर निगम पर कब्जा जमाए थी। सूद के मेयर बनने के बाद भाजपा मनोनीत पार्षदों को वोटिंग का अधिकार न देने पर पलटी थी। जबकि अब कांग्रेस पार्टी पूरी तरह से मनोनीत पार्षदों को वोटिंग अधिकार दिए जाने के खिलाफ है।

अब कांग्रेस को भी मनोनीत का फायदा नहीं
अब कांग्रेस को भी मनोनीत पार्षदों का कोई फायदा नहीं है, क्योंकि कांग्रेस के सिर्फ 4 पार्षद ही जीते हैं। अगर एक निर्दलीय और 9 मनोनीत पार्षदों का वोट भी मिल जाता है तो भी कांग्रेस नगर निगम पर अपना मेयर नहीं बना सकती। ऐसे में यह भी कयास लगाए जा रहे हैं कि शायद कांग्रेस मेयर, सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर के चुनाव में भाजपा के खिलाफ अपने उम्मीदवार भी मैदान में न उतारे।

भाजपा को मनोनीत पार्षदों का वोटिंग अधिकार समाप्त करना चाहिए। वह मनोनीत नियुक्त करने के खिलाफ नहीं हैं। उन्हें मत का अधिकार नहीं मिलना चाहिए। भाजपा नेताओं ने वर्ष 2011 में वादा किया था कि वह मनोनीत का वोटिंग का अधिकार समाप्त करेंगे। ऐसे में उन्हें अपना वादा निभाना चाहिए।
सतिंदर सिंह, पार्षद, भाजपा 
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