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रेलिएंट इंफ्रास्ट्रक्चर के एमडी को दो साल कैद
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Tue, 01 Jul 2014 01:23 AM IST
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राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने रेलिएंट इफ्रास्ट्रक्चर प्रा.लि. के एमडी हमरीत सिंह चावला को दो साल की कैद और दस हजार रुपये का जुर्माना लगाया है।
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जुर्माना न भरने की स्थिति में छह माह की अतिरिक्त सजा काटनी होगी। आयोग ने 21 जुलाई 2014 तक के लिए नॉन वेलेवल वारंट भी जारी किया है।
इसके लिए सेक्टर-17 के पुलिस स्टेशन स्थित पीओ एंड समन ब्रांच के इंचार्ज को पत्र भेजा गया है। यह आदेश आयोग के अध्यक्ष रिटा. जस्टिस शाम सुंदर, सदस्य देवराज और पद्मा पांडे ने सुनवाई के बाद दिया।
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यह सुनाया था फैसला
उपभोक्ता आयोग ने एक मई 2013 को दोनों पक्षों की सुनवाई के बाद फैसला दिया कि रेलिएंट इंफ्रास्ट्रक्चर शिकायतकर्ता को 5 लाख 24 हजार 920 रुपये लेने के बाद अपार्टमेंट का कब्जा दे।
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साथ ही कंपनी दो लाख रुपये मुआवजा और 20 हजार रुपये मुकदमा खर्च शिकायतकर्ता को अदा करे। रेलिएंट ने आयोग के फैसले के खिलाफ राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग में अपील की थी। लेकिन, राष्ट्रीय आयोग ने रेलिएंट की अपील 16 जनवरी 2014 को डिसमिस कर दी थी।
यह था मामला
शिकायतकर्ता योगेश खंडूजा और राजेश खंडूजा निवासी पुणे ने सेक्टर-17 स्थित रेलिएंट इंफ्रास्टक्चर प्रा.लि. के खिलाफ उपभोक्ता आयोग में शिकायत दी थी। खंडूजा ने शिकायत में कहा कि उन्होंने एक अखबार के विज्ञापन के आधार पर रेलिएंट के मेगा हाउसिंग प्रोजेक्ट में ए-1 204 (सेमी फिनिश्ड) अपार्टमेंट बुक कराया था।
इसके लिए उन्होंने 27 दिसंबर 2006 को पांच लाख 85 हजार रुपये चेक के माध्यम से जमा कराए थे। अपार्टमेंट की कुल कीमत 23 लाख 43 हजार 229 रुपये थी, जिसे शिकायतकर्ता ने जमा करा दी थी।
19 जुलाई 2007 को दोनों पार्टियों के बीच बायर्स एग्रीमेंट हुआ। एग्रीमेंट के मुताबिक सितंबर 2008 में अपार्टमेंट का कब्जा देना था, लेकिन समय पर नहीं मिला।
शिकायतकर्ता ने आयोग को बताया कि सितंबर 2008 में जब चंडीगढ़ आकर देखा तो वहां केवल ईंटों का काम चल रहा था। बाउंड्रीवाल तक नहीं बनी थी। बिजली पानी और सीवरेज के अलावा अन्य कई सुविधा नहीं थी। इसके अलावा उनसे और राशि की मांग की गई। अधिक राशि मांगे जाने पर शिकायतकर्ता ने अपना धन वापस मांगा, जिसे रेलिएंट ने नहीं दिया।