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फिरोजपुरः मरणव्रत पर बैठी महिलाओं की हालत नाजुक, ग्लूकोज चढ़ाने से मना किया
अनिल कुमार/अमर उजाला, फिरोजपुर(पंजाब)
Updated Mon, 07 May 2018 09:48 AM IST
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मरणव्रत पर दो महिलाएं
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आमरण अनशन पर बैठी महिलाओं की हालत काफी नाजुक हो गई है। डॉक्टरों ने दो बोतल से ज्यादा ग्लूकोज चढ़ाने से इंकार कर दिया है। मामला पंजाब के फिरोजपुर का है। गांव झोक हरिहर में कांग्रेसियों द्वारा 26 एकड़ जमीन पर कब्जा किए जाने के मामले में पीड़ित परिवार की तरफ से मरणव्रत पर बैठी महिला सर्बजीत कौर की तबीयत बेहद खराब हो चुकी है। सिविल अस्पताल के डाक्टर ने ग्लूकोज की दो बोतलों से अधिक चढ़ाने से मना कर दिया है।
दूसरी महिला सिमरजीत कौर की हालत भी नाजुक बनी हुई है। दोनों महिलाओं का मरणव्रत चौदवें दिन भी जारी रहा। भारतीय किसान यूनियन एकता सिधूपुर के जिला प्रधान फतेह सिंह ने कहा कि जिला प्रशासन बहुत ज्यादा सियासी दबाव में है, इसीलिए पीड़ित परिवार की एक बात भी नहीं सुन रहा है, जबकि अदालती फैसला भी पीड़ित परिवार के हक में है। जिला प्रशासन ने नौ मई को जमीन पर लगी धारा 145 नहीं तोड़ी तो प्रदेशभर की किसान जत्थेबंदियां अनिश्चितकालीन फिरोजपुर में पीड़ित परिवार के हक में धरना देंगी।
सियासी दबाव में जिला प्रशासन
किसान नेता फतेह सिंह ने बताया कि इस जमीन के संबंध में जब वह तहसीलदार के पास गए थे तो उन्होंने कहा कि फैसला तुम्हारे हक में है और दफ्तर में बैठाकर चाय भी पिलाई थी। लेकिन कुछ दिन बाद जब नकल की कापी बरामद की तो पता चला कि फैसला आरोपियों के हक में कर दिया गया है। सिंह ने कहा कि दो दिन पहले पीड़ित परिवार के हक में किसान जत्थेबंदियों के धरने के बाद डीसी से मिलने गए थे, तब भी यही देखने को मिला था कि जिला प्रशासन सियासी दबाव में कार्य कर रहा है।
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दूसरी महिला सिमरजीत कौर की हालत भी नाजुक बनी हुई है। दोनों महिलाओं का मरणव्रत चौदवें दिन भी जारी रहा। भारतीय किसान यूनियन एकता सिधूपुर के जिला प्रधान फतेह सिंह ने कहा कि जिला प्रशासन बहुत ज्यादा सियासी दबाव में है, इसीलिए पीड़ित परिवार की एक बात भी नहीं सुन रहा है, जबकि अदालती फैसला भी पीड़ित परिवार के हक में है। जिला प्रशासन ने नौ मई को जमीन पर लगी धारा 145 नहीं तोड़ी तो प्रदेशभर की किसान जत्थेबंदियां अनिश्चितकालीन फिरोजपुर में पीड़ित परिवार के हक में धरना देंगी।
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सियासी दबाव में जिला प्रशासन
किसान नेता फतेह सिंह ने बताया कि इस जमीन के संबंध में जब वह तहसीलदार के पास गए थे तो उन्होंने कहा कि फैसला तुम्हारे हक में है और दफ्तर में बैठाकर चाय भी पिलाई थी। लेकिन कुछ दिन बाद जब नकल की कापी बरामद की तो पता चला कि फैसला आरोपियों के हक में कर दिया गया है। सिंह ने कहा कि दो दिन पहले पीड़ित परिवार के हक में किसान जत्थेबंदियों के धरने के बाद डीसी से मिलने गए थे, तब भी यही देखने को मिला था कि जिला प्रशासन सियासी दबाव में कार्य कर रहा है।
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अफसरों से मिलकर जमीन कब्जा रहा कांग्रेसी नेता
मरणव्रत पर दो महिलाएं
मरणव्रत पर बैठी महिला सर्बजीत कौर के बेटे गुरजीत सिंह ने बताया कि उसकी मां की तबीयत खराब होने पर उसे सिविल अस्पताल लेकर गए थे। तबीयत इतनी बिगड़ चुकी है कि डाक्टरों ने ग्लूकोज की दो बोतलों से अधिक लगाने पर मना कर दिया। रविवार को सर्बजीत कौर व सिमरजीत कौर को कोई भी डाक्टर देखने नहीं आया है।
गुरजीत ने बताया कि उनके बुजुर्ग वर्ष 1961 से पहले से इस जमीन पर खेती करते आ रहे हैं। उनके पास जमीन के दस्तावेज भी हैं और अदालतों ने उनके हक में फैसला भी दिया है। सिंह ने बताया कि एक कांग्रेस नेता ने झोक हरिहर में 17 एकड़ जमीन खरीदी है, उसी के साथ उनकी 26 एकड़ जमीन लगती है। इसीलिए कांग्रेस नेता ने माल विभाग के अधिकारियों की मिलीभगत से उनकी जमीन पर कब्जा किया है।
पीड़ित परिवार से अकालियों की दूरी इसलिए
पंडाल में बैठे एक किसान नेता ने बताया कि पीड़ित परिवार की महिलाएं सर्बजीत कौर व सिमरजीत कौर के हक में अकाली इसलिए नहीं आ रहे हैं क्योंकि 2008 में एक अकाली नेता ने गांव झोक हरिहर में मंदिर की 70 एकड़ जमीन पर कब्जा किया था। यही नहीं कुछेक अकालियों ने भी इसी गांव में गरीब और कमजोर लोगों की जमीनों पर कब्जे किए थे। इसीलिए कोई भी अकाली नेता इस पीड़ित परिवार के हक में कांग्रेसियों के खिलाफ नहीं बोल रहा है। गांव झोक हरिहर की विवादित जमीन पर कुछ अकाली नेताओं ने इमारत बना दी है और कुछ खेती कर रहे हैं।
मंदिर की है 206 एकड़ जमीन
गांव झोक हरिहर में 206 एकड़ जमीन मंदिर की है। मौजूदा समय में भी मंदिर बना है। बंटवारे से पहले बहुत कम लोग खेती करते थे, जमीन पर जंगल था। धीरे-धीरे लोग जमीन पर खेतीबाड़ी करने लगे। कुछेक जमीन मंदिर की तरफ से लोगों को दान कर दी गई। कुछ लोग बंटवारे के समय से खेती करते आ रहे हैं, उनके नाम पर जमीन की गिरदावरी भी है। अब जमीन की कीमत बढ़ गई और सियासी लोगों की नजरे उक्त जमीन पर है। सियासी लोगों ने प्रदेश में उनकी सरकार बनते ही जमीन पर कब्जा करना शुरू कर दिया। चाहे अकाली है या फिर कांग्रेसी है, सभी ने मौका देख गरीब व कमजोर लोगों को डरा धमका कर जमीन पर कब्जा किया है। नियम मुताबिक मंदिर की जमीन बेची नहीं जा सकती है। मंदिर की जमीन पर बढ़े-बढ़े सियासी लोगों का कब्जा है और उसी की कमाई खा रहे हैं।
गुरजीत ने बताया कि उनके बुजुर्ग वर्ष 1961 से पहले से इस जमीन पर खेती करते आ रहे हैं। उनके पास जमीन के दस्तावेज भी हैं और अदालतों ने उनके हक में फैसला भी दिया है। सिंह ने बताया कि एक कांग्रेस नेता ने झोक हरिहर में 17 एकड़ जमीन खरीदी है, उसी के साथ उनकी 26 एकड़ जमीन लगती है। इसीलिए कांग्रेस नेता ने माल विभाग के अधिकारियों की मिलीभगत से उनकी जमीन पर कब्जा किया है।
पीड़ित परिवार से अकालियों की दूरी इसलिए
पंडाल में बैठे एक किसान नेता ने बताया कि पीड़ित परिवार की महिलाएं सर्बजीत कौर व सिमरजीत कौर के हक में अकाली इसलिए नहीं आ रहे हैं क्योंकि 2008 में एक अकाली नेता ने गांव झोक हरिहर में मंदिर की 70 एकड़ जमीन पर कब्जा किया था। यही नहीं कुछेक अकालियों ने भी इसी गांव में गरीब और कमजोर लोगों की जमीनों पर कब्जे किए थे। इसीलिए कोई भी अकाली नेता इस पीड़ित परिवार के हक में कांग्रेसियों के खिलाफ नहीं बोल रहा है। गांव झोक हरिहर की विवादित जमीन पर कुछ अकाली नेताओं ने इमारत बना दी है और कुछ खेती कर रहे हैं।
मंदिर की है 206 एकड़ जमीन
गांव झोक हरिहर में 206 एकड़ जमीन मंदिर की है। मौजूदा समय में भी मंदिर बना है। बंटवारे से पहले बहुत कम लोग खेती करते थे, जमीन पर जंगल था। धीरे-धीरे लोग जमीन पर खेतीबाड़ी करने लगे। कुछेक जमीन मंदिर की तरफ से लोगों को दान कर दी गई। कुछ लोग बंटवारे के समय से खेती करते आ रहे हैं, उनके नाम पर जमीन की गिरदावरी भी है। अब जमीन की कीमत बढ़ गई और सियासी लोगों की नजरे उक्त जमीन पर है। सियासी लोगों ने प्रदेश में उनकी सरकार बनते ही जमीन पर कब्जा करना शुरू कर दिया। चाहे अकाली है या फिर कांग्रेसी है, सभी ने मौका देख गरीब व कमजोर लोगों को डरा धमका कर जमीन पर कब्जा किया है। नियम मुताबिक मंदिर की जमीन बेची नहीं जा सकती है। मंदिर की जमीन पर बढ़े-बढ़े सियासी लोगों का कब्जा है और उसी की कमाई खा रहे हैं।