CBI की रडार पर ईडी के अधिकारी: शिमला प्रवर्तन निदेशालय कार्यालय में हड़कंप, ढाई करोड़ की रिश्वत का है मामला
ढाई करोड़ की रिश्वत मामले में नामजद शिमला ईडी का अधिकारी मंगलवार से ही फरार है। आरोपी की आखिरी लोकेशन शिमला की ही आई थी और इसके बाद उसका फोन बंद हो गया था।
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शिमला प्रवर्तन निदेशालय ईडी के सहायक डायरेक्टर द्वारा बिचौलिए के साथ मिलकर ढाई करोड़ रुपये की रिश्वत मांगने के मामले में ईडी के दो अन्य अधिकारी भी सीबीआई के रडार पर आ गए हैं। जांच टीम ने कॉल डिटेल निकालने के बाद इन अधिकारियों को भी पूछताछ करने के लिए तलब किया है। ऐसे में इनके अलावा भी अभी अन्य कई की मुश्किलें बढ़ना लगभग तय माना जा रहा है। वहीं, शिमला ईडी कार्यालय के कर्मियों में भी इस मामले को लेकर हड़कंप मचा हुआ है। उधर, फरार चल रहे ईडी डिप्टी डायरेक्टर के जींद से गिरफ्तार किए गए भाई विकासदीप को सीबीआई ने कोर्ट में पेश कर दोे दिन का अतिरिक्त रिमांड मंजूर कराया है।
ढाई करोड़ की रिश्वत मामले में नामजद शिमला ईडी का अधिकारी मंगलवार से ही फरार है। आरोपी की आखिरी लोकेशन शिमला की ही आई थी और इसके बाद उसका फोन बंद हो गया था। जांच टीमें लगातार उसे व एक अन्य बिचौलिए को पकड़ने के लिए दिल्ली, हिमाचल, हरियाणाा, पंजाब सहित अन्य जगहों पर दबिश दे रही है। सूत्रों की मानें तो सीबीआई की जांच टीम ने इस मामले में फरार आरोपी की पिछले करीब एक से डेढ़ महीने की कॉल डिटेल निकाली है। आरोपी द्वारा दो अलग-अलग फोन में तीन नंबरों का प्रयोग किया जा रहा था, जिसमें एक निजी नंबर में ईडी के दो से तीन अधिकारियों से लगातार काफी लंबी-लंबी बात हो रखी है। हालांकि अभी जांच टीमें इस मामले में अभी कुछ भी बताने काे तैयार नहीं हैं। लेकिन कॉल डिटेल में जिनके नाम सामने आए हैं जांच टीम ने उन्हें भी पूछताछ कर जांच में शामिल करने के लिए तलब कर लिया है। इस मामले की जांच शिमला से लेकर चंडीगढ़ और दिल्ली सीबीआई मुख्यालय तक में हो रही है।
ईडी के फरार हुए अधिकारी के भाई विकासदीप को सीबीआई की जांच टीम ने दो दिन का रिमांड खत्म होने के बाद शुक्रवार दोपहर को जिला कोर्ट में मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया। जांच टीम ने कोर्ट को बताया कि आरोपी विकास उनकी जांच में कोई सहयोग नहीं कर रहा है। उसने दो दिन के रिमांड मेें उन्हें जितने भी सवाल पूछे गए, उन सबके जवाब केवल नहीं और पता नहीं में ही दिए हैं। जांच टीम ने कोर्ट से आरोपी का तीन दिन का अतिरिक्त रिमांड मांगा, लेकिन कोर्ट ने दाे दिन का ही रिमांड मंजूर किया है।
इस मामले में आरोपी पक्ष की ओर से दिल्ली से मुदित जैन कोर्ट में वीडियो कॉफ्रेंसिंग के जरिए पेश हुए। उन्होंने कोर्ट के सामने दलील दी कि उन्हें अभी तक यहीं नहीं बताया जा रहा है कि उनके मुवक्किल को किस मामले और किन धाराओं के तहत केस गिरफ्तार किया गया है। उन्होंने कोर्ट को बताया कि जांच टीमों द्वारा आरोपी से उन्हें मिलने तक नहीं दिया जा रहा है। इसलिए उन्होंने सीबीआई की दलीलों का विरोध किया और रिमांड नहीं देने के लिए बहस की।
आरोपी पक्ष के वकील ने कोर्ट में सीबीआई के खिलाफ एक एप्लीकेशन भी लगाई, जिसमें उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट व तीन नए कानूनों के तहत आरोपी पक्ष को केस दर्ज होने के बाद एफआईआर की प्रतिलिपि देने व 48 घंटे के अंदर-अंदर ऑनलाइन अपलोड करनी होती है, लेकिन सीबीआई द्वारा अभी तक उन्हें एफआईआर की प्रतिलिपि नहीं दी गई है। इस दलील पर सीबीआई की जांच टीम ने तर्क दिया कि अगर एफआईआर ऑनलाइन अपलोड नहीं की जाती तो 48 घंटे के अंदर-अंदर कोर्ट को इस बारे में मौखिक तौर पर जानकारी देनी होती है। इसलिए वह कोर्ट को पहले ही इस एफआईआर के बारे में बता चुके हैं और यह मामला ईडी के एक बड़े अधिकारी के खिलाफ ढाई करोड़ की रिश्वत मांगने से जुड़ा है जिसमें अभी जांच चल रही है। मुख्य आरोपी सहित अन्य संलिप्ततों की गिरफ्तारी कर उनसे पूछताछ की जानी है। इसलिए इस मामले को अभी सार्वजनिक नहीं किया जा सकता है।