अमृतसर रेल हादसे पर खुलासाः घटना वाले दिन दो गेटमैन थे तैनात, फिर भी नहीं दिखी भीड़...
दशहरे के दिन जिस रेल पटरी पर खूनी हादसा हुआ, उस ट्रैक के फाटकों में एक नहीं दो-दो गेटमैन तैनात थे। एक पठानकोट रेलवे लाइन के फाटक और दूसरा जालंधर ट्रैक के फाटक पर था, लेकिन दोनों को ही 200 कदम की दूरी पर जुटी भीड़ नहीं दिखाई दी। उल्टे जालंधर ट्रैक पर तैनात गेटमैन ने टार्च से ग्रीन सिग्नल देकर डीएमयू को पासिंग और लाइन क्लीयर होने का संकेत दे दिया था।
धोबी घाट की दीवार के पास से तीन रेलवे लाइन निकलती हैं। एक लाइन थोड़ी टेढ़ी होकर पठानकोट की तरफ जाती है जबकि बाकी लाइन जालंधर की तरफ निकलती हैं। जालंधर की तरफ जाने वाली रेलवे लाइन बिल्कुल सीधी हैं और एक किलोमीटर दूर तक आसानी से सब कुछ दिखाई देता है। रेलवे की तरफ से दो गेटमैन तैनात किए गए थे। एक पठानकोट लाइन और दूसरा जालंधर रेलवे लाइन पर। घटना के दिन दोनों ही अपने-अपने केबिन में मौजूद थे।
सांसद औजला ने उठाई रेल हादसे की जांच की मांग
रेल हादसे में 59 लोगों का मारा जाना और रेलवे की तरफ से ट्रेन ड्राइवर व अन्य स्टाफ को क्लीन चिट दे दिया जाना किसी को हजम नहीं हो रहा है। इसकी बारीकी से जांच की जाए और इसमें सभी को शामिल किया जाए। यह मांग अमृतसर के सांसद गुरजीत औजला ने रेल मंत्री पीयूष गोयल के सामने उठाई। सांसद औजला मंगलवार को रेल भवन दिल्ली में केंद्रीय रेल मंत्री पीयूष गोयल से मिले और उनसे मांग की कि पीड़ित परिवारों को 20-20 लाख रुपये मुआवजा दिया जाए।
सांसद ने रेल मंत्री को पूरी घटना के बारे विस्तार से बताया और भौगोलिक स्थिति से अवगत करवाया। औजला ने रेल दुर्घटना के दौरान रेलवे की तरफ से बनाए गए सभी नियमों का भी हवाला दिया जिसमें दुर्घटना करने वाली ट्रेन की रफ्तार, दुर्घटना के समय ड्राइवर के हालात, रेलवे गेटमैन की भूमिका व अन्य पहलुओं की भी जांच करने की मांग की है। औजला का कहना है कि रेलमंत्री ने उनकी बात को ध्यान से सुना और यकीन दिलाया कि इसकी उच्चस्तरीय जांच रेलवे द्वारा की जा रही है।
अमृतसर हादसे की हो निष्पक्ष जांच : मान
आम आदमी पार्टी पंजाब की कोर समिति की मंगलवार को हुई बैठक में अमृतसर रेल हादसे को एक भयंकर त्रासदी करार देते हुए सभी मृतकों को दो मिनट का मौन रख कर श्रद्धांजलि दी गई। बैठक के बाद पत्रकारों से बातचीत करते हुए आप सांसद भगवंत मान ने कहा कि सरकार इस हादसे की निष्पक्ष जांच कराए। उन्होंने कहा कि जांच न्यायिक पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट की निगरानी में होनी चाहिए और इस बड़े दुखांत पर कोई राजनीति नहीं होनी चाहिए।
एक सवाल के जवाब में भगवंत मान ने कहा कि यह बहुत बड़ा और बेहद दर्दनाक हादसा है। लोग इसकी तुलना 1947 के बटवारे समय घटी त्रासदियों के साथ करते हैं। मान ने कहा कि जब तक जांच मुकम्मल नहीं होती, तब तक न किसी को क्लीन चिट दी जा सकती है और न ही किसी व्यक्ति विशेष को दोषी साबित किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि तय समयसीमा में हादसे की जांच जरूरी है, क्योंकि इस घटना के लिए प्रबंधक, प्रशासन, पुलिस और रेलवे की लापरवाही जिम्मेदार है। उन्होंने मांग की कि पीड़ितों को बिना देरी इंसाफ, एक -एक करोड़ मुआवजा और सरकारी नौकरी दी जाए।