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खास खबर: 26 साल बाद सुपतिया से मिल भावुक हुए लोटन, बबलू को देख छलके डबलू के आंसू
Sun, 20 Aug 2023 11:03 PM IST
भूपेंद्र सिंह
प्रियंका ठाकुर, अमर उजाला ब्यूरो, चंडीगढ़
प्रियंका ठाकुर, अमर उजाला ब्यूरो, चंडीगढ़
Published by: भूपेंद्र सिंह
Updated Sun, 20 Aug 2023 11:03 PM IST
सार
पंचकूला के समाजसेवी सुभाष शर्मा के प्रयास से दो परिवार मिले हैं। भावुक चेहरों पर अपनों से बरसों से बिछुड़ने का दर्द दिखा। इस मिलन में पति-पत्नी एक-दूसरे से कुछ कह न सके लेकिन आंखों ही आंखों में भाव छलक उठे।
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सेक्टर 55 स्तिथ पिंगलवाड़ा में काफी सालो बाद लोटन सिंह से मिलते हुई उनकी पत्नी
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
तेरे लिए हम हैं जिए होठों को सीये, तेरे लिए हम हैं जिए हर आंसू पिए, दिल में मगर जलते रहे चाहत के दीये, तेरे लिए तेरे लिए... वीर जारा फिल्म के गीत की ये पक्तियां लोटन सिंह और सुपतिया के लिए सच हो गईं, जब 26 साल बाद दोनों ने एक-दूसरे को देखा। इस मिलन में पति-पत्नी एक-दूसरे से कुछ कह न सके लेकिन आंखों ही आंखों में भाव छलक उठे।
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उनके भावुक चेहरे ने बरसों से बिछुड़ने की दर्दभरी कहानी बयां कर दी। दूसरी ओर, 17 साल बाद अपने छोटे भाई बबलू को देख बड़े डबलू आंसू नहीं रोक पाए। बबलू के पैर छूते ही डबलू ने सीने से लगा लिया।
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बता दें कि बरसों पहले मानसिक स्थिति ठीक न होने के चलते लोटन सिंह और बबलू उर्फ अरविंद अपने-अपने घर से लापता हो गए थे। कई साल से सेक्टर-55 स्थित पिंगलवाड़ा आश्रम में रह रहे थे। इनकी अपने परिवार से बिछड़ने की उदासी देख पंचकूला के सेक्टर-24 के रहने वाले समाजसेवी सुभाष शर्मा ने घर का पता खोज निकाला।
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इसके बाद उत्तर प्रदेश के कौशांबी जिले के निगाहा गांव की रहने वाली सुपतिया अपने बेटों राम करण और राम सिया के साथ पति को लेने पिंगलवाड़ा पहुंची। सुपतिया ने उस वाकये का जिक्र करते बताया कि साल 1996 में पति लोटन सिंह को खाना देकर वह खेत के काम में व्यस्त हो गई और शाम को घर लौटी तो बच्चों ने बताया कि पिता जी घर नहीं लौटे।
इस घटना ने उसके जीवन में अंधेरा कर दिया। उसके बाद हर दिन इस इंतजार में थी कि कहीं न कहीं जरूर होंगे। बता दें कि 52 वर्षीय लोटन सिंह को 20 साल पहले पिंगलवाड़ा के मुख्य आश्रम अमृतसर से यहां भेजा गया था।
उत्तरप्रदेश के हरदोई के अकबरपुर के रहने वाले रविन्द्र कुमार उर्फ डबलू ने बताया कि 17 साल पहले उनका छोटा भाई बबलू बिन बताए घर से चला गया फिर नहीं मिला। बेटे के खो जाने के दुख में मां ने बिस्तर पकड़ लिया और पिता को भी गहरा सदमा लगा। उस समय बबलू की मानसिक स्थिति ठीक न होने पर इलाज चल रहा था।
डबलू ने बताया कि बबलू का पता लगते ही वह पहले अपने गांव गए, जहां बबलू के आने की खबर सुनकर त्योहार सा माहौल है। अगले दिन अपने भतीजों के साथ लखनऊ से चंडीगढ़ के लिए रवाना हुए और पिंगलवाड़ा पहुंचे। बता दें कि 49 वर्षीय बबलू को साल 2012 में जीएमसीएच-32 से पिंगलवाला आश्रम भेजा गया था।
अब अपने घर जाना है ...बबलू से जब डबलू की ओर इशारा कर पूछा गया कि यह कौन हैं तो धीमी आवाज में बोले अपना भाई। जब उनकी अध्यापिका ने घर जाने के लिए पूछा तो मुस्कुरा कर सिर हिला दिया। जब पूछा कि अब तक वह कहां रह रहे थे तो जवाब दिया घर में और अब कहां जा रहे हो तो बोले-अपने घर।
बरसों परिवार से बिछड़ कर बनाया नया परिवार ...पिंगलवाड़ा में बबलू और लोटन के अलावा 118 लोग रह रहे हैं, जिन्हें उनकी अक्षमता के कारण घर वालों ने छोड़ दिया है या वे लापता होकर यहां पहुंचे हैं। कई साल से पिंगलवाड़ा में रह रहे बबलू और लोटन सिंह ने यहां के स्पेशल एजुकेटर, कर्मचारियों के साथ खास रिश्ता बना लिया था। इतना ही नहीं, दोनों राज्य स्तर के खिलाड़ी हैं और स्पेशल ओलंपिक्स में भाग ले चुके हैं।
अब तक कई बेसहारों को मिलवा चुके हैं उनके परिवार से ...जहां सेवानिवृत्ति के बाद लोग तीर्थ यात्रा पर जाने की सोचते हैं, वहीं पंचकूला निवासी सुभाष शर्मा ने जीवन में नया लक्ष्य तय किया। उन्होंने बेसहारा लोगों को उनके परिवार से मिलाने का संकल्प लिया। विभिन्न सामाजिक संस्थाओं के साथ काम कर रहे सुभाष ने बताया कि वह कई लोगों को उनके परिवार से मिलवा चुके हैं। पिंगलवाड़ा चंडीगढ़ इंचार्ज रविंदर कौर और समाजसेवी हरपाल सिंह के साथ मिलकर लोटन और बबलू के घर का पता लगाया और अब दोनों परिवार से मिलकर बेहद खुश हैं।