Pathankot News: 36 घंटे बीते... नहीं उतरे 200 फुट ऊंचे टावर पर चढ़े बुजुर्ग, मूसलाधार बारिश भी नहीं डिगा सकी
सुजानपुर विधायक व कांग्रेस जिला प्रधान नरेश पुरी ने कहा कि उन्होंने विधानसभा में पहले भी इस मुद्दे को बड़ी गंभीरता के साथ उठाया गया था और वह दोबारा इस मुद्दे को विधानसभा में उठाएंगे। उन्होंने कहा कि अगर बांध परियोजना के निर्माण के समय औसती परिवारों की जमीनों को सरकार की ओर से अधिग्रहित किया गया है तो सरकार को उसके बदले में इन्हें इनके बनते हक जरूर देना चाहिए।
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बुधवार सुबह तड़के चार बजे से गांव सिंदूरी के 200 फीट ऊंचे टावर पर चढ़े दोनों बांध विस्थापित बुजुर्ग लगातार दूसरे दिन भी नीचे नहीं उतरे। लगभग 36 घंटे से दोनों बुजुर्ग केवल पानी के सहारे टावर पर डटे हैं। बुधवार देर शाम हुई मूसलाधार बारिश भी बुजुर्गों का हौसला पस्त नहीं कर पाई। दोनों के पास खाने के लिए कुछ नहीं है और उन्होंने नीचे से भी कुछ नहीं मंगवाया।
दोनों का कहना है कि जब तक फर्जी तरीके से भर्ती 50 लोगों को बाहर नहीं किया जाता और सही विस्थापितों को नौकरी नहीं मिलती, वह नीचे नहीं आएंगे। उन्हें मनाने एसडीएम धारकलां और तहसीलदार भी पहुंचे लेकिन दोनों ने नीचे आने से साफ इन्कार कर दिया। वहीं, अन्य विस्थापितों का धरना टावर के नीचे जारी है।
प्रधान दयाल सिंह ने कहा कि पंजाब में आप की सरकार बने एक साल हो गया है। मगर यह सबसे निकम्मी सरकार साबित हुई है। उन्होंने कहा कि वह लोग अपनी जायज मांगों को लेकर कई बार संघर्ष कर चुके हैं परंतु हर बार प्रशासनिक अधिकारी व सरकार के नुमाइंदे उन्हें झूठे आश्वासन देकर टालमटोल करते रहे हैं। इस बार ऐसा नहीं होगा, वह लोग आर पार की लड़ाई के लिए मैदान में उतर आए हैं।
उन्होंने बांध परियोजना के मुख्य अभियंता को यहां से बदलने की मांग की। दयाल सिंह ने शासन एवं प्रशासन को चेतावनी दी है कि अगर उनके बुजुर्गों को कुछ भी हुआ तो वह प्रशासन की ईंट से ईंट बजा देंगे। वे बड़ा संघर्ष करने के लिए मजबूर होंगे जिसकी सारी जिम्मेदारी बांध प्रशासन एवं पंजाब सरकार की होगी।
वहीं, हलका सुजानपुर विधायक व कांग्रेस जिला प्रधान नरेश पुरी ने कहा कि उन्होंने विधानसभा में पहले भी इस मुद्दे को बड़ी गंभीरता के साथ उठाया गया था और वह दोबारा इस मुद्दे को विधानसभा में उठाएंगे। उन्होंने कहा कि अगर बांध परियोजना के निर्माण के समय औसती परिवारों की जमीनों को सरकार की ओर से अधिग्रहित किया गया है तो सरकार को उसके बदले में इन्हें इनके बनते हक जरूर देना चाहिए।
वहीं, बुजुर्गों को मनाने के लिए पहुंचे तहसीलदार लक्ष्मण सिंह ने कहा कि लोकतंत्र में रोष जताने का सभी को अधिकार है लेकिन यह तरीका गलत है। उन्होंने कहा कि विस्थापितों को नौकरी देने संबंधी कार्रवाई सरकार के स्तर पर चल रही है। फर्जी भर्ती वाले मामले की जांच सचिव स्तर के अधिकारी कर रहे हैं। उसका फैसला भी जल्द आएगा। बुजुर्गों को समझाने का प्रयास किया गया था लेकिन वह नीचे नहीं उतरे हैं।