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Hindi News ›   Chandigarh ›   Trilingualism Mushaira and poet Conference in tagore theater

पदमभूषण 'नीरज' के आते ही मुशायरे की महफिल गुलजार, देखिए कैसे?

Sat, 16 Apr 2016 11:50 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Sat, 16 Apr 2016 11:50 AM IST
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Trilingualism Mushaira and poet Conference in tagore theater
टैगोर थियेटर में मुशायरे में भाग लेने पहुंचे पदमभूषण गोपाल दास नीरज गवर्नर कप्तान सिंह सौलंकी - फोटो : amar ujala

‘जिंदगी मैंने गुजारी नहीं सभी की तरह, मैंने हर पल को जिया पूरी जिंदगी की तरह।’ इन पंक्तियों में अपने जीवन के फलसफे को बयां करने वाले और बॉलीवुड को कई सदाबहार और यादगार गीत देने के साथ ही गजल व नज्म की दुनियां में एक मुकाम बना चुके पद्म भूषण डॉ. गोपाल दास ‘नीरज’ शुक्रवार को शहर में अमन का पैगाम लेकर पहुंचे।

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मौका था सेक्टर-18 स्थित टैगोर थिएटर में त्रिभाषीय मुशायरे और कवि सम्मेलन ‘एक शाम अमन के नाम’ का। इस कार्यक्रम में शिरकत करने कई प्रख्यात कवि और शायर भी पहुंचे। सभी ने अपनी नज्मों, गजलों और शेरों से टैगोर थिएटर की शाम को खुशगवार बनाया। 
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मुशायरे की शुरुआत डॉ. भूपेंद्र ने कुछ इस तरह की, ‘तुम्हारे घर में दरवाजा है पर तुम्हें खतरा नहीं, हमारे घर में खतरा है पर दरवाजा नहीं’। इसके बाद जितेंद्र अब्बास ने अमन शांति के लिए कुछ पंक्तियां कही, ख्वाब में आकर बात जब वो कर जाते हैं, सारा कमरा खुशबू से भर जाते हैं, अखबारों में खूनी मंजर मत छापो, बच्चे इन तस्वीरों से डर जाते हैं। इसके अलावा उन्होंने कहा, मेरे दिल के ताजमहल में रहने को तैयार नहीं, या तो वो मुमताज नहीं या फिर उसे मुझसे प्यार नहीं। 
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इसके बाद युवा कवि अल्तमश अब्बास ने महफिल में रंग जमाया। उन्होंने अपनी प्रस्तुति की शुरुआत इस तरह की, हम न ऊंचे मकान वाले हैं, न बड़े खानदान वाले हैं, लोग करते हैं पसंद हमें क्यूं, हम ऊर्दू जुबां वाले जो हैं। इसके बाद उन्होंने युवाओं पर आधारित कुछ पंक्तियां कहीं, ‘आयते इश्क रवानी में पढ़ी जाती है, ये दुआ सिर्फ जवानी में पढ़ी जाती है।’ इसके अलावा ‘जिंदगी जब ढलान पर उतरे, ये दुआ है जरा शान से उतरे’ से जिंदगी के उतरान को बयां करने की कोशिश की।

वहीं, महक भारती ने माता-पिता को छोड़ विदेश में बसने वाले और लौटकर कभी न आने वाली अपनी संतान को भेजे पत्र के जरिए एक बुजुर्ग पिता के दर्द को गीत में ढाला है। उनके गीत के बोल थे, आ जाओ घर आ जाओ, जाने तुम कब आओगे। वहीं, नवीन नीर ने अपनी प्रस्तुति कुछ यूं बया की, धूप आती ही नहीं फिर भी कभी घर मेरे, घर के पर्दों को हटाते हुए थक जाता हूं।


इनके अलावा कार्यक्रम में कई अन्य कवियों और शायरों ने अपनी प्रस्तुति दी। इनमें सविता असीम, राजेंद्र कौर, शशांक प्रभाकर, डॉ. रमा सिंह, शम्स तबरेजी, फयाज फारुखी शामिल थे। कार्यक्रम का शुभारंभ बतौर मुख्य अतिथि पंजाब और हरियाणा के राज्यपाल और यूटी के प्रशासक कप्तान सिंह सोलंकी ने किया। इस मौके पर गृह सचिव अनुराग अग्रवाल, सेशन जज एसके अग्रवाल, आईजीपी तेजिंदर सिंह लूथरा, आईएएस जितेंद्र यादव, कार्यक्रम कोआर्डिनेटर डॉ. एसके पुनिया आदि मौजूद रहे। 

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