शहीद सैनिकों को 157 वर्ष बाद श्रद्धांजलि
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पंजाब के अमृतसर के अजनाला में लंबे संघर्ष के बाद शुक्रवार दोपहर 1857 के राष्ट्रीय विद्रोह में शहीद हुए 282 हिंदुस्तानी सैनिकों को सामूहिक श्रद्धांजलि दी गई।
अमृतसर की तहसील अजनाला में जिस कुएं में से 157 साल से दफन ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी के हिंदुस्तानी सैनिकों के कंकाल निकाले गए थे, शुक्रवार को उसी जगह उन्हें पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि भेंट की गई।
श्रद्धांजलि भेंट करने वालों में हर समुदाय व जाति के लोग शामिल थे। इस दौरान हिंदू, सिख और मुस्लिम समुदाय के धार्मिक प्रतिनिधियों ने शहीद सैनिकों की आत्मिक शांति के लिए प्रार्थना की।
सैनिकों की अस्थियों का जुलूस
इस दौरान इतिहास शोधकर्ता सुरेंद्र कोछड़ ने गुरुद्वारा शहीदगंज कमेटी द्वारा आयोजित श्रद्धांजलि समारोह में कहा कि लंबे संघर्ष के बाद पंजाब सरकार द्वारा सैनिकों की अंतिम रस्में पूरी करने के लिए जो पांच कनाल भूमि उपलब्ध कराई गई है, उस पर सरकारी कब्जा कायम होने के कारण सैनिकों की अंतिम रस्में उस स्थान पर नहीं करवाई जा सकीं।
गुरुद्वारा शहीदगंज कमेटी के अध्यक्ष अमरजीत सिंह सरकारिया ने कहा कि 22 अगस्त को शाम 6 बजे हिंदुस्तानी सैनिकों की अस्थियों का अजनाला में विशाल जुलूस निकाला जाएगा। उन्होंने शहीदी स्मारक का निर्माण जल्द शुरू करवाने की मांग की।
अस्थियों को अजायबघर में रखने की मांग
कमेटी के महासचिव काबल सिंह शाहपुर ने बताया कि 24 अगस्त को शहीदों की अस्थियों को विधिपूर्वक गंगा जी में विसर्जित किया जाएगा।
पंजाब लोक सभ्याचारक मंच के अध्यक्ष अमोलक सिंह, देश भगत यादगार हाल जालंधर, पंजाब ब्राह्मण सभा, मिनराज उल कुरान इंटरनेशनल के नेताओं ने कहा कि कुएं में से निकाली गई साबुत बचीं अस्थियों को अजनाला में बनाए जाने वाले अजायबघर में रखा जाए।