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Chandigarh News: ट्रिब्यून फ्लाईओवर अटका तो खुड्डा लाहौरा-सारंगपुर कॉरिडोर पर भी संकट
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चंडीगढ़। ट्रिब्यून चौक फ्लाईओवर मामले में चंडीगढ़ प्रशासन ने अब सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) दायर नहीं करने का फैसला लिया है। प्रशासन ने कानूनी सलाह के बाद मिनिस्ट्री ऑफ रोड ट्रांसपोर्ट एंड हाईवे को पत्र लिखकर मामले की पैरवी अपने स्तर पर करने का आग्रह किया है। प्रशासन का तर्क है कि प्रस्तावित फ्लाईओवर नेशनल हाईवे नेटवर्क से जुड़ी सड़क व्यवस्था का हिस्सा है। इसलिए इसकी योजना, निर्माण और यातायात प्रबंधन को नेशनल हाईवे के नजरिए से देखा जाना चाहिए। खास बात यह है कि अगर ट्रिब्यून चौक फ्लाईओवर मामले में प्रशासन का पक्ष स्वीकार नहीं होता है तो खुड्डा लाहौरा-सारंगपुर एलिवेटेड कॉरिडोर की योजना पर भी रोक लगने की आशंका है।
प्रशासन के पत्र के बाद अब मंत्रालय परियोजना से जुड़े कानूनी पहलुओं, नेशनल हाईवे की अधिसूचना और इसकी मौजूदा स्थिति का अध्ययन कर सुप्रीम कोर्ट में जवाब दाखिल कर सकता है। इससे मामला अब चंडीगढ़ प्रशासन तक सीमित न रहकर मंत्रालय के दायरे में पहुंच गया है।
मास्टर प्लान 2031 बना विवाद की वजह
फ्लाईओवर मामले में प्रशासन ने लीगल रिमेम्ब्रेंसर (एलआर) की राय भी ली थी। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में एक एनजीओ ने फ्लाईओवर के निर्माण के खिलाफ याचिका दायर की थी। मई 2025 में मामला प्रशासन के पक्ष में जाता दिखा, लेकिन नवंबर 2025 में एनजीओ फिर हाईकोर्ट पहुंच गई। इस बार याचिका में चंडीगढ़ मास्टर प्लान-2031 को आधार बनाया गया। इसी आधार पर प्रशासन को झटका लगा। अब प्रशासन का कहना है कि नेशनल हाईवे की तैयार परियोजना और उससे जुड़े यातायात संबंधी निर्णयों को मास्टर प्लान में हस्तक्षेप के तौर पर नहीं माना जाना चाहिए। इसी आधार पर मंत्रालय से सुप्रीम कोर्ट में पक्ष रखने का आग्रह किया गया है।
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एलिवेटेड कॉरिडोर बनाने के लिए प्रशासन ने 89 करोड़ रुपये किए हैं मंजूर
खुड्डा लाहौरा से सारंगपुर तक एलिवेटेड कॉरिडोर बनाने के लिए प्रशासन ने 89 करोड़ रुपये मंजूर किए हैं। यह परियोजना भी मास्टर प्लान-2031 में खुड्डा लाहौरा-पीजीआई मेट्रो कॉरिडोर के रूप में दर्शाई गई है। अर्बन प्लानिंग डिपार्टमेंट ने 2022 में इस पर आपत्ति जताई थी।
कोट...
अब ट्रिब्यून फ्लाई ओवर केस को सुप्रीम कोर्ट में प्रशासन नहीं लड़ेगा। प्रशासन ने मिनिस्टरी को लेटर लिख दिया है कि मिनिस्टरी अपने स्तर पर नेशनल हाईवे के नाम पर सुप्रीम कोर्ट में पक्ष रखे। यह परियोजना बंद करनी पड़ी तो लाहौरा-सारंगपुर एलिवेटेड कोरिडोर प्रोजेक्ट भी बंद करना पड़ेगा। उसका भी मास्टर प्लान में जिक्र नहीं है। - सीबी ओझा, चीफ इंजीनियर, प्रशासन
प्रशासन के पत्र के बाद अब मंत्रालय परियोजना से जुड़े कानूनी पहलुओं, नेशनल हाईवे की अधिसूचना और इसकी मौजूदा स्थिति का अध्ययन कर सुप्रीम कोर्ट में जवाब दाखिल कर सकता है। इससे मामला अब चंडीगढ़ प्रशासन तक सीमित न रहकर मंत्रालय के दायरे में पहुंच गया है।
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मास्टर प्लान 2031 बना विवाद की वजह
फ्लाईओवर मामले में प्रशासन ने लीगल रिमेम्ब्रेंसर (एलआर) की राय भी ली थी। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में एक एनजीओ ने फ्लाईओवर के निर्माण के खिलाफ याचिका दायर की थी। मई 2025 में मामला प्रशासन के पक्ष में जाता दिखा, लेकिन नवंबर 2025 में एनजीओ फिर हाईकोर्ट पहुंच गई। इस बार याचिका में चंडीगढ़ मास्टर प्लान-2031 को आधार बनाया गया। इसी आधार पर प्रशासन को झटका लगा। अब प्रशासन का कहना है कि नेशनल हाईवे की तैयार परियोजना और उससे जुड़े यातायात संबंधी निर्णयों को मास्टर प्लान में हस्तक्षेप के तौर पर नहीं माना जाना चाहिए। इसी आधार पर मंत्रालय से सुप्रीम कोर्ट में पक्ष रखने का आग्रह किया गया है।
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एलिवेटेड कॉरिडोर बनाने के लिए प्रशासन ने 89 करोड़ रुपये किए हैं मंजूर
खुड्डा लाहौरा से सारंगपुर तक एलिवेटेड कॉरिडोर बनाने के लिए प्रशासन ने 89 करोड़ रुपये मंजूर किए हैं। यह परियोजना भी मास्टर प्लान-2031 में खुड्डा लाहौरा-पीजीआई मेट्रो कॉरिडोर के रूप में दर्शाई गई है। अर्बन प्लानिंग डिपार्टमेंट ने 2022 में इस पर आपत्ति जताई थी।
कोट...
अब ट्रिब्यून फ्लाई ओवर केस को सुप्रीम कोर्ट में प्रशासन नहीं लड़ेगा। प्रशासन ने मिनिस्टरी को लेटर लिख दिया है कि मिनिस्टरी अपने स्तर पर नेशनल हाईवे के नाम पर सुप्रीम कोर्ट में पक्ष रखे। यह परियोजना बंद करनी पड़ी तो लाहौरा-सारंगपुर एलिवेटेड कोरिडोर प्रोजेक्ट भी बंद करना पड़ेगा। उसका भी मास्टर प्लान में जिक्र नहीं है। - सीबी ओझा, चीफ इंजीनियर, प्रशासन