20 नवंबर से को-वैक्सीन के तीसरे चरण का ट्रायल शुरू, स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज लगवाएंगे टीका
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
को-वैक्सीन के तीसरे चरण का ट्रायल पीजीआईएमएस रोहतक, हैदराबाद व गोवा से शुरू होगा। इसके तहत तीनों संस्थानों में 200-200 वालंटियर्स को शुक्रवार से वैक्सीन की डोज दी जाएगी। यह डोज छह-छह एमजी की होगी। पहली डोज के 28 दिन बाद दूसरी डोज दी जाएगी और 48 दिन बाद उनके शरीर में एंटीबॉडी की जांच की जाएगी। सही परिणाम मिलने पर देशभर में चिह्नित 21 संस्थानों में कुल 25,800 वालंटियरों को यह डोज दी जाएगी।
यह जानकारी बुधवार को पीजीआई के कुलपति डॉ. ओपी कालरा ने दी। उन्होंने बताया कि को-वैक्सीन के खतरे काफी कम हैं। अभी तक की रिसर्च में एक दो वालंटियर को हल्का बुखार व टीके के स्थान पर दर्द जैसी समस्या आई है। हमारे सभी वालंटियर स्वस्थ हैं और अभी तक किसी को कोरोना होने की रिपोर्ट भी नहीं है।
रिसर्च में देखा जाएगा कि वैक्सीन का क्या साइड इफेक्ट है और इसका असर कितने दिन रहता है। क्योंकि अभी तक यह पता नहीं चल पाया है कि वैक्सीन लगने के बाद बनने वाली एंटीबॉडी का असर कितना समय रहता है। आगामी एक साल तक वालंटियरों के अंदर एंटीबॉडी की जांच होगी।
स्वास्थ्य मंत्री ने को-वैक्सीन की रिसर्च में वालंटियर बनने की जताई इच्छा
स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज ने को-वैक्सीन की तीसरे फेज की रिसर्च में बतौर वालंटियर शामिल होने की इच्छा जताई है। इस पर पीजीआईएमएस के कुलपति डॉ. ओपी कालरा ने बताया कि तीसरे फेज में हेल्थ कर्मियों के अलावा मरीजों को भी शामिल कर रहे हैं। जो भी इस रिसर्च में शामिल होगा उसे सहमति पत्र देना होगा। यदि स्वास्थ्य मंत्री सहमति पत्र देंगे तो उन्हें भी शामिल किया जाएगा।
हरियाणा की 1.01 मृत्युदर, इसे नीचे लाने का प्रयास: कुलपति
पीजीआईएमएस के कुलपति ने बताया कि विदेश में कोरोना संक्रमितों की मृत्युदर पांच से सात प्रतिशत रही है, जबकि भारत में यह दो से ढाई प्रतिशत रही है। हरियाणा में कोरोना संक्रमितों की मृत्यु दर 1.01 प्रतिशत चल रही है और प्रयास किया जा रहा है कि इसे एक से भी कम लाया जाए। उन्होंने पत्रकारों को बताया कि पीजीआईएमएस में गंभीर स्थिति वाले मरीज आते हैं, ऐसे में समस्या होती है।
ए कैटेगरी वाले मरीजों को होम आइसोलेशन पर रखा जाता है, जबकि जिन्हें उपचार की जरूरत होती है, उन्हें विश्व भर में दी जा रही हर तरह की दवा देकर निशुल्क उपचार किया जाता है। संस्थान में वेंटिलेटर, दवा, स्टाफ किसी की कोई कमी नहीं है। हमारे यहां निम्न रक्तचाप व कम ऑक्सीजन वाले मरीजों को भी बचाया गया है। घर पर रह रहे मरीजों की टीम निगरानी करती है। कुलपति ने बताया कि जब तक वैक्सीन नहीं आती तब तक मास्क व सोशल डिस्टेंसिंग जरूरी है।
कल आ सकती है को-वैक्सीन
कुलपति ने बताया कि गुरुवार को को-वैक्सीन आने की उम्मीद है। ऐसे में शुक्रवार से टीकाकरण शुरू हो सकता है। उन्होंने बताया कि शुरुआत में छह व नौ एमजी की डोज दी गई थी। इससे कोई खास फर्क देखने को नहीं मिला, इसलिए छह एमजी की वैक्सीन की डोज ही काफी है। उन्होंने बताया कि फेज वन व टू में हम अभी तक कामयाब रहे हैं।
फरवरी के बाद बाजार में आ सकती है वैक्सीन
कुलपति ने बताया कि फरवरी के बाद वैक्सीन बाजार में आ सकती है। फिलहाल भारत बॉयोटैक कंपनी इस वैक्सीन पर शोध करवा रही है। शोध में सफल होने पर आईसीएमआर की ओर से वैक्सीन निर्माण के लिए संबंधित कंपनी को दिया जाएगा। उसके बाद बाजार में वैक्सीन उपलब्ध होगी। उन्होंने यह भी बताया कि केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन शुक्रवार को मॉड्यूलर ओटी का उद्घाटन करेंगे।