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Chandigarh News: ट्रायल कोर्ट ने नहीं किया नियमों का पालन, टिप्पणी व एफआईआर रद्द

Sat, 03 Aug 2024 05:53 AM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Sat, 03 Aug 2024 05:53 AM IST
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Trial court did not follow rules, comments and FIR canceled
चंडीगढ़। आपराधिक मामले में दोषपूर्ण जांच के लिए चंडीगढ़ पुलिस के जांच अधिकारी व एसएचओ के खिलाफ एसएसपी को एफआईआर दर्ज करने का आदेश देने की प्रक्रिया कानून के लिए अज्ञात है। हाईकोर्ट ने यह टिप्पणी करते हुए ट्रायल कोर्ट के आदेश पर हुए एफआईआर को रद्द कर याचिका का निपटारा कर दिया।
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चंडीगढ़ की ट्रायल कोर्ट ने आपराधिक मामले में आरोपी को बरी करते हुए जांच अधिकारी और संबंधित एसएचओ दोनों को अनुचित और दोषपूर्ण जांच के लिए दोषी माना था और एसएसपी को आदेश की प्रति भेजकर कानूनी कार्रवाई का आदेश दिया था। ट्रायल कोर्ट ने कहा था कि दोषपूर्ण जांच से आरोपियों के संविधान के अनुच्छेद 21 में मिले जीवन और स्वतंत्रता के मौलिक अधिकार का उल्लंघन हुआ है।
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ट्रायल कोर्ट के आदेश में अधिकारियों के खिलाफ आईपीसी की धारा 166-ए (लोक सेवक द्वारा कानून के तहत निर्देश की अवहेलना) और 167 के तहत कार्रवाई शुरू करने को कहा गया था। इसके बाद जांच अधिकारी और एसएचओ के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी। तत्कालीन एसएचओ कृपाल सिंह कूनर ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल करते हुए आपत्तिजनक आदेश में पारित अपमानजनक टिप्पणियां व एफआईआर को चुनौती दी थी।
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मामले की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि हाईकोर्ट रूल्स (चैप्टर 1 पार्ट एच रूल 6) के अवलोकन से पता चलता है कि यदि पुलिस अधिकारियों और अन्य अधिकारियों के आचरण की आलोचना की जानी है या किसी अधिकारी के खिलाफ कोई कार्रवाई की जानी है तो तय प्रक्रिया का पालन जरूरी है। ट्रायल कोर्ट को फैसले की एक प्रति जिला मजिस्ट्रेट को भेजनी चाहिए, जो इसे हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार को भेजेंगे। इस मामले में ऐसी कोई प्रक्रिया नहीं अपनाई गई थी और ट्रायल कोर्ट ने अभियुक्तों को बरी करते हुए निर्देश दिया था कि बरी करने के फैसले की एक प्रति एसएसपी चंडीगढ़ को कार्रवाई के लिए भेज दी। ट्रायल कोर्ट की ओर से अपनाई गई यह प्रक्रिया कानून के लिए अज्ञात है। ट्रायल कोर्ट ने नियमों का पालन नहीं किया। ऐसे में हाईकोर्ट ने विवादित निर्देश और पुलिस अधिकारी के खिलाफ दर्ज एफआईआर को रद्द कर दिया है।
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