फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Chandigarh ›   Tri-city officials remember their teachers on Teachers' Day

अधिकारियों ने शिक्षकों को किया याद, बोले- गुरु न होते तो आज शायद हम इस मुकाम पर नहीं पहुंचते

Sat, 05 Sep 2020 02:00 PM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: ajay kumar Updated Sat, 05 Sep 2020 02:00 PM IST
विज्ञापन
Tri-city officials remember their teachers on Teachers' Day
- फोटो : अमर उजाला

जीवन में मां-बाप के बाद यदि सबसे प्यारा कोई रिश्ता है तो वह गुरु और शिष्य का होता है। हर गुरु की ख्वाहिश होती है कि उसका शिष्य उनके बताए मार्ग पर चलकर उनका नाम रोशन करे। ऐसा देखा भी गया है कि जो शिष्य गुरु की शिक्षा का अपने जीवन में अनुसरण करते हैं, सफल जरूर होते हैं। शिक्षक दिवस के उपलक्ष्य पर आज ट्राइसिटी के नामचीन लोगों से उनके गुरुओं के बारे में जानेंगे। आखिर उन्होंने अपने गुरु के कौन से मंत्र अपने जीवन में आत्मसात किए हैं।

विज्ञापन


                                   पद्मश्री जेटीएम गिब्सन (फाइल फोटो), वीपी सिंह बदनौर, चंडीगढ़ प्रशासक।
विज्ञापन


मैं अपने गुरु जेटीएम गिब्सन का हमेशा ऋणी रहूंगा
लोगों को शिक्षित करना सबसे बड़ा और सबसे अच्छा काम है। डॉ. एस राधाकृष्णन और डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम जैसे महान शिक्षक हम सभी के लिए प्रेरणास्रोत हैं। शिक्षक दिवस मुझे मेरे सभी अद्भुत शिक्षकों की याद दिलाता है, जिन्होंने मुझे एक बेहतर व्यक्ति के रूप में बदलने में मदद की।
विज्ञापन
विज्ञापन


 शिक्षक दिवस के अवसर पर मैं पद्मश्री और ओबीई (ऑर्डर ऑफ द ब्रिटिश एंपायर) जेटीएम गिब्सन को याद करता हूं। उन्हें राजस्थान के मेयो कॉलेज को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने का श्रेय दिया जाता है। वह वर्ष 1954 से 1969 तक करीब 15 साल कॉलेज में रहे। गिब्सन ने छात्रों के मन, शरीर और चरित्र के साथ-साथ संपूर्ण विकास पर काम किया। 

उन्होंने मेयो कॉलेज में एक नए दौर की शुरुआत की, जिससे कई विद्यार्थियों का जीवन बदला। उन्होंने हमें सही रास्ता दिखा, जिसका मेयो कालेज के विद्यार्थी हमेशा ऋणी रहेंगे। उनके उत्कृष्ट और मर्मस्पर्शी व्यक्तित्व ने विशेष रूप से मेरे जीवन के उन प्रारंभिक वर्षों के दौरान एक अमिट छाप छोड़ी। मैं अपनी प्रत्येक उपलब्धि और जिस जगह पर मैं अभी हूं, उसका श्रेय इस महान शिक्षक और मेयो फैकल्टी को देता हूं। - वीपी सिंह बदनौर, पंजाब के राज्यपाल व यूटी प्रशासक चंडीगढ़

सादगी और सरलता की मिसाल थे भुवनानंद मिश्रा, नहीं भूल सकता योगदान
मेरे एक अध्यापक थे भुवनानंद मिश्रा। मैं जब 9वीं कक्षा में पढ़ता था तब वह स्कूल के हेडमास्टर थे। मैं उड़ीसा के एक छोटे से टाउन जजपुर के एक सरकारी स्कूल में पढ़ता था। वह सरकारी स्कूल उड़िया माध्यम का था, जहां पर इंग्लिश बहुत कम बोली जाती थी। इनकी सबसे बड़ी खासियत थी कि वह रोजाना स्कूल आते थे। 

धोती कुर्ता पहनते थे और हाथ में गीता पकड़े रहते थे। भुवनानंद मिश्रा हमें इंग्लिश और ग्रामर पढ़ाते थे। उन्होंने उस वक्त कहा कि अगर जिंदगी में आगे बढ़ना चाहते हो तो इंग्लिश सीखना बहुत जरूरी है। उन्होंने हमें टूटी-फूटी इंग्लिश बोलना सिखाया। हमें सुधारने के लिए उन्होंने एक इंग्लिश एसोसिएशन बनाया और होनहार बच्चों को उसमें शामिल किया। 


                                                मनोज परिदा, एडवाइजर। 


मुझे उस एसोसिएशन का सेक्रेटरी बनाया। इसके बाद हम दिन में एक घंटा इंग्लिश में ही बात करते थे। यही कारण है कि मुझे जेएनयू के इंटरव्यू, स्टील अथॉरिटी, आरबीआई और आईएएस के इंटरव्यू में कभी कोई समस्या नहीं आई। मैं अपने शिक्षक के योगदान को अपने जीवन में कभी नहीं भूल सकता। मैं अभी भी उनको याद करता हूं व हमेशा करता रहूंगा। मनोज परिदा, एडवाइजर

आज भी कहीं जाता हूं तो टिफिन लेकर जाता हूं

Tri-city officials remember their teachers on Teachers' Day
मुकेश कुमार आहूजा, डीसी पंचकूला - फोटो : अमर उजाला

मैं अपने गुरु के बताए सिद्धांतों पर अभी भी चल रहा हूं। मेरे सामने जब भी कोई विकट स्थिति आती है तो उससे उबरने के लिए उन्हें ही याद करता हूं। मैं उनका नाम तो नहीं बता सकता लेकिन इतना जरूर है कि छठी कक्षा में जो मंत्र मेरे गुर ने दिया था, वह अब तक याद है। ऐसा नहीं है कि यह गुरुमंत्र उन्होंने सिर्फ मुझे ही दिया था लेकिन मैंने लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए उन्हें अपना शस्त्र बनाया। 

जीवन में मैंने गुरुजी के मंत्रों को उतारा तो जीवन एकदम सरल बन गया। गुरुजी कहते थे कि जब भी अपनी ड्यूटी पर जाना तो अपना टिफिन साथ लेकर जाना। टिफिन ईमानदारी का परिचायक है इसलिए मैं जब भी कहीं जाता हूं तो अपने साथ टिफिन जरूर लेकर जाता हूं। मेरा जिले के प्रत्येक छात्र और अध्यापक और माता-पिता से शिक्षक दिवस पर यही अनुरोध है कि सभी एक संकल्प लें कि नई पीढ़ी को अच्छा ज्ञान देकर उनको आगे बढ़ने की प्रेरणा देंगे। इसकी वजह है जो आज छात्र है कल शिक्षक भी बन सकता है। - मुकेश कुमार आहूजा, डीसी पंचकूला


                                                 मोहित हांडा, डीसीपी, पंचकूला

मैं हर शिक्षक से कुछ न कुछ सीखा हूं
गुरु हमेशा से पूज्यनीय रहे हैं और रहेंगे। मैंने समय-समय पर शिक्षकों से कुछ न कुछ ग्रहण किया। जो रास्ते बचपन में बनाए जाते हैं, वही रास्ते मंजिल तक पहुंचाते हैं। मुझको जितने भी गुरु मिले अच्छे मिले। मेरे समय की शिक्षा और अब की शिक्षा में जमीन-आसमान का बदलाव आ गया है। हमारे समय में यदि हमसे गलती होती थी तो हमारे गुरु हमको सजा देते थे, अब माहौल बदल गया है। 

अब मैं अक्सर सुनता हूं कि अध्यापक किसी भी बच्चे को जरा सी सजा दे दें तो उसके अभिभावक स्कूल पहुंच जाते हैं। यह माहौल ठीक नहीं है। अध्यापक कभी भी किसी का बुरा नहीं करते हैं। वह बच्चे को अच्छा बनाने के लिए ही डांटते और फटकारते हैं, क्योंकि उनकी डांट-फटकार से ही बच्चे का भविष्य संवर सकता है। मैं शिक्षक दिवस पर सभी से सिर्फ यही कहूंगा कि बच्चे हमारे देश का भविष्य हैं और उनकी शिक्षा के प्रति हमको ज्यादा सजगता बरतनी होगी। - मोहित हांडा, डीसीपी, पंचकूला

सीनियर व जूनियर मलिक को नहीं भूलता

Tri-city officials remember their teachers on Teachers' Day
धीरज सांघी, डायरेक्टर पेक चंडीगढ़ - फोटो : अमर उजाला

मैं अपने स्कूल के समय के कुछ अध्यापकों को कभी नहीं भूल पाता हूं। मैंने छठी कक्षा से दसवीं कक्षा तक एक ही स्कूल में पढ़ाई की है, जिसमें पीटीआई टीचर सीनियर मलिक थे। 11वीं की पढ़ाई मैंने दूसरे स्कूल में की, वहां उनके बेटे जूनियर मलिक मेरे पीटीआई टीचर थे। दोनों से मुझे बहुत कुछ सीखने को मिला।

अभी भी उन्हें याद करता हूं। मैं स्कूल शिक्षा की तरफ ज्यादा और खेल की तरफ थोड़ा कम ध्यान रखता था। हॉकी का प्लेयर होने के साथ अन्य गतिविधियों में भी सक्रिय रूप से हिस्सा लेता हूं। ऐसे में मेरा सबसे ज्यादा साथ सीनियर मलिक देते थे। इसके बाद 11वीं कक्षा में मैं दूसरे स्कूल में आ गया तो वहां पर उनके बेटे जूनियर मलिक ने भी काफी सहयोग दिया। हालांकि कुछ सालों बाद सीनियर मलिक की मृत्यु हो गई। उनके बेटे दिल्ली में रहते हैं, जहां मैं उनसे मिलने भी गया। 

दोनों से मैंने अनुशासन सीखा है, जिसे मैंने अपने जीवन के हर स्तर पर लागू किया। बीते कुछ सालों में शिक्षक और छात्र के बीच पर्सनल टच थोड़ा कम हो गया है। इसके पीछे कई कारण हैं। पहले एक कक्षा में करीब 20 विद्यार्थी होते थे तो शिक्षक प्रत्येक विद्यार्थियों को उनके नाम से और उन्हें बहुत अच्छे से पहचानते थे लेकिन अब एक कक्षा में 40 से 60 विद्यार्थी होते हैं। ऐसे में एक अध्यापक के लिए सभी बच्चों को जानना और समझना बहुत मुश्किल होता है। अब शिक्षकों के ऊपर पढ़ाई के अलावा अन्य कामों का भी बोझ बढ़ गया है। - धीरज सांघी, डायरेक्टर पेक चंडीगढ़

अध्यापक की वजह से समर्पण व अनुशासन मिला

Tri-city officials remember their teachers on Teachers' Day
हिम्मत सिंह, जिला शिक्षा अधिकारी, मोहाली - फोटो : अमर उजाला

मैं आज जो कुछ भी हूं, अपने शिक्षक की वजह से हूं। इलेक्ट्रिक्ल इंजीनियरिंग करने के बाद साल 1997 में मेरा चयन बिजली विभाग के एसडीओ के पद पर हो गया था। लेकिन मैं शिक्षा के क्षेत्र में जाना चाहता था। मेरे पिता की भी यही इच्छा थी। इसलिए मैंने बिजली विभाग ज्वाइन नहीं किया। फतेहगढ़ साहिब के गांव रूपालहेड़ी के रहने वाले हिम्मत ने बताया कि उन्हें शिक्षा के प्रति लगाव अपने अध्यापक जसपाल सिंह की वजह से हुआ।

वह बताते हैं कि जसपाल सिंह समर्पित व अनुशासित अध्यापक थे। शनिवार, रविवार सहित अवकाश के अन्य दिनों में भी पढ़ाया करते थे। बचपन में यह अच्छा नहीं लगता था लेकिन उनका समर्पण आज याद आता है। जसपाल सिंह पढ़ाई में कमजोर विद्यार्थियों पर ज्यादा ध्यान देते थे। जब तक हम विषय का गहन अध्ययन नहीं कर लेते तब तक हमें छुट्टी नहीं मिलती थी। उनसे मिली समर्पण व अनुशासन की शिक्षा के बूते ही आज जीवन को बेहतर ढंग से जी पा रहे हैं। - हिम्मत सिंह, जिला शिक्षा अधिकारी, मोहाली


                                   डेराबस्सी सब-डिवीजन के डीएसपी गुरबख्शीश सिंह मान

गुरु के बिना सफल होना असंभव : डीएसपी
अध्यापक गुरु के समान होता है जिसके बिना सफल होना संभव नहीं है। ये कहना है डेराबस्सी सब-डिवीजन के डीएसपी गुरबख्शीश सिंह मान का। पुराने दिनों को याद करते हुए उन्होंने कहा कि आज भी मुझे प्रिंसिपल की वो बात याद आती है, जो अक्सर पढ़ाते समय दोहराया करते थे कि पहले उस चीज के काबिल बनो, फिर उसे हासिल करने की कोशिश करो। 

मेरे करियर में अध्यापकों की वो बातें आज भी याद आती हैं, जिनको मैंने अपनी जिंदगी में उतारा है। आज उनके दिए निर्देशों का ही नतीजा है कि मुझे डीएसपी बनकर लोगों की सेवा करने का मौका मिला है। अध्यापकों से ये सीखने को मिला है कि व्यक्ति को समय का पाबंद होना चाहिए। जिस चीज को काम करने जा रहे हैं तो उसकी मूलभूत बातें पता होनी चाहिए फिर आप कभी मात नहीं खाओगे। 

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed