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परिवहन विभाग ने वॉल्वो के लिए बनाई नई पॉलिसी, जानें नए प्रावधान

Tue, 02 Aug 2016 01:24 AM IST
बलवान करिवाल/ अमर उजाला ब्यूरो, चंडीगढ़
बलवान करिवाल/ अमर उजाला ब्यूरो, चंडीगढ़ Updated Tue, 02 Aug 2016 01:24 AM IST
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transport department now start bus service by outsourcing policy at chandigarh,
सीटीयू बस - फोटो : file photo
ट्रांसपोर्ट डिपार्टमेंट सीधे तौर पर अपने बजट से वॉल्वो खरीदने की बजाए आउटसोर्सिंग पॉलिसी के तहत इन्हें चलाएगा। केंद्र सरकार ने जिन वॉल्वो कंपनियों को इसके लिए अधिकृत कर रखा है। डिपार्टमेंट उन कंपनियों में से ही किसी एक को मेरिट के आधार पर यह जिम्मेदारी देगा। आउटसोर्सिंग पॉलिसी के तहत 40 वॉल्वो चलाए जाने का प्रस्ताव तैयार हो चुका है। जल्द ही प्रस्ताव के तहत आगे की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। 
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अभी सीटीयू के पास एक भी वॉल्वो बस नहीं है। बसें खरीदने से लेकर उनको चलाने और मेंटेनेंस करने तक की जिम्मेदारी कंपनी की ही होगी। कंपनी को हर पांच साल बाद नई बस लगानी होगी। एक बस पांच साल ही चलाई जा सकेगी। सीटीयू केवल इन बसों के रेवेन्यू का काम देखेगा। यानी हर बस में कंडक्टर सीटीयू का ही होगा, लेकिन ड्राइवर वॉल्वो कंपनी का होगा। वॉल्वो के साथ ही कुछ हीटिंग वेंटिलेटिंग एंड एयर कंडीशनिंग (एचवीएसी) बसें भी इसी पॉलिसी के तहत चलाई जाएंगी।
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स्टाफ की कमी और महंगी बसों के कारण लिया आउटसोर्सिंग का निर्णय
दरअसल वॉल्वो बसें दूसरी बसों से कई गुणा महंगी हैं। एक वॉल्वो बस की कीमत लगभग 1 करोड़ रुपये है। 40 वॉल्वो के लिए 40 करोड़ रुपये खर्च हो जाएंगे। सीटीयू इतना मोटा बजट इन बसों की खरीददारी में नहीं लगाना चाहता। दूसरी बात यह कि सीटीयू के पास पहले ही स्टाफ की कमी है। वॉल्वो के लिए अलग से स्टाफ की जरूरत पड़ेगी। जिसकी व्यवस्था सीटीयू के लिए अभी संभव नहीं है। इन सब बातों को देखते हुए ही प्रशासन ने आउटसोर्सिंग पॉलिसी के तहत ही वॉल्वो चलाने का फैसला लिया है।
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सीटीयू को प्रति किलोमीटर मिलेंगे 15 रुपये
सीटीयू को इस पॉलिसी के तहत प्रति किलोमीटर 15 रुपये मिलेंगे। बाकी सब पैसे वॉल्वो कंपनी के होंगे। हालांकि ये सब चीजें अभी पूरी तरह से तय नहीं हैं। इसमें कुछ बदलाव भी हो सकता है, लेकिन पॉलिसी अनुसार कुछ ऐसी ही आय सीटीयू को होगी। अभी सीटीयू काफी घाटे में चल रही है।

200 बसें खरीदने का प्रस्ताव है तैयार
लंबी दूरी के लिए 200 बसें खरीदने का प्रस्ताव तैयार हुआ है, जिसमें 120 बसें एचवीएसी, 40 वॉल्वो और 40 साधारण बसें शामिल हैं। अभी लंबी दूरी की बसें न होने के कारण 70 में से अधिकतर रूट बंद हो चुके हैं। लंबी दूरी की बसें न होने से घाटा भी बढ़ रहा है। सिटी सर्विस में बसों की माइलेज कम रहती है, जबकि लंबी दूरी की बसें काफी कमाई का जरिया होती हैं।


केंद्र सरकार की स्कीम के तहत वॉल्वो चलाई जाएंगी। बजाए अपने बजट से खरीदने के आउटसोर्स कर वॉल्वो चलाने की योजना है।  ऑपरेट करने और मेंटेनेंस का काम वॉल्वो कंपनी ही देखेगी, जिससे स्टाफ की दिक्कत भी नहीं रहेगी।
केके जिंदल, सेक्रेटरी, ट्रांसपोर्ट चंडीगढ़।
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