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Chandigarh News: परिवहन विभाग पांच मंत्रियों पर भारी, अगला ही चुनाव हारे

Fri, 11 Oct 2024 05:51 AM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Fri, 11 Oct 2024 05:51 AM IST
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Transport department is heavy on five ministers they will lose the next election
असीम गोयल भी नहीं तोड़ पाए मिथक, इससे पहले चार मंत्री भी नहीं जीत पाए थे अपना अगला चुनाव
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कुलदीप शुक्ला
चंडीगढ़। हरियाणा के 15वें विधानसभा चुनाव में पूर्व परिवहन मंत्री असीम गोयल हार गए। हैट्रिक लगाने चुनावी मैदान में उतरे असीम गोयल सहित पांच मंत्रियों पर हरियाणा परिवहन विभाग भारी पड़ चुका है। ये पांच पूर्व परिवहन मंत्री लगातार अपना अगला ही चुनाव हार चुके हैं। इस चुनाव में भाजपा के पूर्व मंत्री असीम गोयल भी परिवहन मंत्री को लेकर मिथक नहीं तोड़ पाए।

राज्य में पांच पूर्व परिवहन मंत्रियों को लगातार दूसरी बार विधानसभा में पहुंचने का जनता ने मौका नहीं दिया है। 2024 के विधानसभा चुनाव में भाजपा सरकार के पूर्व परिवहन मंत्री असीम गोयल को अंबाला शहर की सीट से कांग्रेस के निर्मल सिंह मोहरा ने 11131 मतों से हराया है। जबकि भाजपा के टिकट पर असीम गोयल 2014 और 2019 में लगातार चुनाव जीते थे। 2014 में पानीपत के इसराना विधानसभा क्षेत्र से भाजपा के विधायक बनने वाले कृष्णलाल पंवार को परिवहन मंत्री बनाया गया। कृष्णलाल पंवार 2019 का चुनाव हार गए थे। 2009 में पानीपत ग्रामीण विधानसभा क्षेत्र से ओमप्रकाश जैन निर्दलीय विधायक बने। हुड्डा सरकार में ओपी जैन को परिवहन मंत्री बनाया गया। 2014 के विधानसभा चुनाव में ओमप्रकाश जैन पानीपत ग्रामीण क्षेत्र से हार गए।
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1987 में लोकदल से पहली बार विधायक चुने गए वेद सिंह मलिक परिवहन मंत्री बने थे। उन्होंने वर्ष 1991, 1996 व वर्ष 2000 में गन्नौर विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ा, लेकिन जीत दर्ज नहीं कर सके। वर्ष 2005 के चुनाव में इनेलो से टिकट नहीं मिलने पर वेद सिंह वर्ष 2007 में कांग्रेस में शामिल हो गए थे। इसी तरह मांगेराम गुप्ता भी परिवहन मंत्री बनने के बाद लगातार दूसरी बार नहीं जीते थे। जबकि मांगेराम चार बार विधायक और तीन बार मंत्री बने थे। उनके पास शिक्षा, वित्त और परिवहन मंत्रालय रहा है।
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मिथक : शुभ साबित नहीं हो रही दो कोठियां
राजधानी चंडीगढ़ में हरियाणा कोटे की दो कोठियां ऐसी हैं, जिनके साथ भी अशुभ माने जाने का मिथक जुड़ा है। वह मिथक इस बार भी नहीं टूट सका। इनमें सेक्टर-दो की कोठी नंबर 48 और सेक्टर सात की कोठी नंबर-78 हैं, जिनमें रहने वाले मंत्रियों में कोई भी लगातार दोबारा जीत नहीं पाया। इन कोठियों में रहने वाले कई मंत्री पहले वास्तु के हिसाब से बदलाव व हवन यज्ञ भी करवा चुके हैं। इस बार 48 नंबर कोठी दुष्यंत चौटाला को मिली थी। जबकि अब कोठी नंबर 78 को अफसरों के हवाले कर दिया गया।
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