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जालंधर से झारखंड को भेजी गई ट्रेन, सैकड़ों मजदूरों को छोड़ा
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चंडीगढ़। पंजाब के वह अफसर जो चंडीगढ़ मुख्यालय पर रहकर मजदूरों को उनके प्रदेश भेजने का जिम्मा संभाल रहे हैं, उनके लिए मजदूरों ने एक जानकारी भेजी है। मोबाइल व अन्य साधनों से तो संपर्क नहीं हो पाया तो उन्होंने मीडिया का सहारा लेते हुए मांग करते हुए कहा, जिस ट्रेन को झारखंड मजदूरों को लेकर भेजा गया है उसमें झारखंड के सभी मजदूर नहीं आ पाए। सैकड़ों लोग छूट गए हैं। अब उनकी ट्रेन कब आएगी, आएगी भी या नहीं। इसकी जानकारी कोई देने को तैयार नहीं है।
जालंधर में फंसे झारखंड के श्रमिक नवीन, सुनील, राकेश कुमार, हेमंत, उमराव आदि ने बताया कि तीन दिन पहले झारखंड के लिए ट्रेन गई थी। उनके पास भी मैसेज आया था। दस बजे मेडिकल जांच के लिए अस्पताल पहुंचने को कहा गया। दस बजे जैसे ही पहुंचे तो स्वास्थ्य कर्मियों व पुलिस ने उन्हें अंदर नहीं जाने दिया। कहा कि ट्रेन फुल हो गई है। 1200 लोगों की जगह थी जो चले गए। उन्होंने हाथ-पांव जोड़े। कहा कि खाने के लिए राशन तक नहीं है। उन्हें जाने दें लेकिन कोई नहीं पसीजा। आखिर में वह लौट आए। मकान मालिक के आगे हाथ जोड़कर दोबारा कमरा देने को कहा और फिर रात गुजारघी। डउन्होंने कहा कि दो दिन से कई जगह फोन लगाए। ट्रेन कब आएगी कोई बताने को तैयार नहीं है। ुयह जानकारी महत्वपूर्ण है और अधिकारियों को समाचार पत्र या सोशल साइट्स आदि के माध्यम से सार्वजनिक करनी चाहिए। मैसेज भी नहीं आ रहे हैं। उन्होंने चंडीगढ़ में बैठे पंजाब के अधिकारियों व रेलवे के अधिकारियों से मांग की है कि उनके लिए ट्रेन की व्यवस्था की जाए।
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जालंधर में फंसे झारखंड के श्रमिक नवीन, सुनील, राकेश कुमार, हेमंत, उमराव आदि ने बताया कि तीन दिन पहले झारखंड के लिए ट्रेन गई थी। उनके पास भी मैसेज आया था। दस बजे मेडिकल जांच के लिए अस्पताल पहुंचने को कहा गया। दस बजे जैसे ही पहुंचे तो स्वास्थ्य कर्मियों व पुलिस ने उन्हें अंदर नहीं जाने दिया। कहा कि ट्रेन फुल हो गई है। 1200 लोगों की जगह थी जो चले गए। उन्होंने हाथ-पांव जोड़े। कहा कि खाने के लिए राशन तक नहीं है। उन्हें जाने दें लेकिन कोई नहीं पसीजा। आखिर में वह लौट आए। मकान मालिक के आगे हाथ जोड़कर दोबारा कमरा देने को कहा और फिर रात गुजारघी। डउन्होंने कहा कि दो दिन से कई जगह फोन लगाए। ट्रेन कब आएगी कोई बताने को तैयार नहीं है। ुयह जानकारी महत्वपूर्ण है और अधिकारियों को समाचार पत्र या सोशल साइट्स आदि के माध्यम से सार्वजनिक करनी चाहिए। मैसेज भी नहीं आ रहे हैं। उन्होंने चंडीगढ़ में बैठे पंजाब के अधिकारियों व रेलवे के अधिकारियों से मांग की है कि उनके लिए ट्रेन की व्यवस्था की जाए।
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